पुस्तक समीक्षा #1 : एक हसीन क़त्ल – लेखक -मोहन मौर्य

EHQ

Reviewed By :- SABA KHAN

अपनी अन्तःप्रेरणा के चलते जब कोई अपने भीतर गहरे में पक रहे किसी कथानक को एक छोटे अफ़साने या एक उपन्यास के रूप में लिखता है और सकुचाते हुवे उसे पाठकों के मध्य समर्पण भाव से  भेजता है यह जानने के लिए की उसका लेखन किस हद तक फलित हुआ है, किस हद तक वो लेखक अपने पाठकों को खुद से जोड़ पाने में कामयाब रहा है, ये सब बातें एक तरफा तौर पर पाठकों की पसंद नापसंद के पैमानों पर मुनहसर है I ये पैमाने भी परम्परागत खांचों में ही रचे बसे हो सकते हैं या फिर किसी हद तक लेखक के प्रति उदारवादी दृष्टिकोण अपनाकर उसका उत्साहवर्धन करने वाले हो सकते हैं I किसी भी विधा में सर्वप्रथम लेखन क्षेत्र में अपना प्रयास करने वाले लेखक से किसी भी स्तर पर बहुत ज्यादा उम्मीदें बाँध लेना उस लेखक के साथ एक तरह की ज्यादती है और ये उम्मीद तो और भी ज्यादा बेमानी है जब उसी विधा के किसी स्थापित लेखक से उसकी तुलना करते हुवे उसके लेखन को परख की कसौटी पर परखा जाए I देशी विदेशी सभी प्रकार के साहित्य में ऐसे कई महान लेखक हुवे हैं जिन्होंने बहुत आगे जाकर अपनी वर्तमान उपलब्धियों का आंकलन करते हुवे जब अपने पूर्व लेखन का निरीक्षण किया है तो उसे खारिज किये जाने लायक तक आँक दिया है I आज लेखन में नित नए नए नवोदित लेखकों के आगमन से जहाँ एक ओर पाठकों के सामने ये सवाल खड़ा हो जाता है की क्या पढ़ें क्या न पढ़े, इसे पढ़ें या उसे पढ़ें वहां इस बात की जरूरत बड़ी शिद्दत से पैदा हो जाती है की अगर किसी पाठक को किसी नवोदित लेखक में ‘बतौर लेखक कोई भी तत्व’ पढ़ते समय नजर आता है तो पाठक को उस नवोदित लेखक को प्रोत्साहित करना चाहिए और नवोदित होने के खाते में कुछ नापसंदगी जैसा भाव तिरोहित किया जा सकता है I यहाँ पर उस नवोदित लेखक को भी आत्ममुग्धता जैसी स्थिति से बचते हुवे संभलकर आगे बढ़ना वाजिब है I

तकरीबन एक महीने पहले अमीर सिंह जी ने एक अपील करती हुई पोस्ट डाली थी मोहन मौर्य के उपन्यास ‘एक हसीन क़त्ल’ को पाठकों द्वारा पढ़े जाने की I ये एक सराहनीय प्रयास था एक नवोदित को उन जैसे साहित्यिक अभिरुचियों वाले व्यक्ति द्वारा प्रोत्साहन के तौर पर I मैंने उसी दिन अमेज़न पर आर्डर कर दिया था और एक हफ्ते के भीतर मुझे मिल गया था I मैंने उसे पढ़कर खत्म भी उसी दिन कर दिया था लेकिन कुछ व्यक्तिगत और कुछ प्रोफेशनल मजबूरियों के तहत उस बाबत अपनी कैसी भी राय प्रेषित ना कर सकी थी, खैर देर आयद दुरुस्त आयद I

उपन्यास हाथ में आते ही ‘कवर आर्ट’ ने अरुचि सी पैदा की क्योंकि कवर आर्ट कहीं से भी आकर्षक न लगा लेकिन भीतर पन्नों पर नजर डालते ही जो चीज़ सबसे पहले निगाह के दायरे में आई वो इस किताब की पेपर क्वालिटी – जो कि बहुत उम्दा है I १६० के करीब सफ्हें हैं और कीमत १९९ रुपये (हालांकि मुझे अमेज़न से मंगाने पर १५० के आसपास पड़ी थी ) –ये कीमत बहुत ज्यादा है, मगर तकनीकी तौर पर देखा जाए तो प्रकाशित हुई प्रतियों का भी इस कीमत पर फर्क पड़ना लाजिमी है I अन्दर के पृष्ठों पर हुई छपाई देखकर हैरत हुई की टाइपिस्ट ने एलाइनमेंट को जस्टीफाई किया ही नहीं है और पूरे text को जस का तस word format से प्रिंट में ले लिया गया है I किताब पढ़ते हुवे निरंतर ‘प्रूफ’ की गलतियों से दो चार होना पड़ा और निकट भविष्य में प्रकाशन संस्था ‘सूरज पॉकेट बुक्स’ को इस दिशा में सार्थक और भरसक प्रयास करने होंगे I

उपन्यास की कहानी शुरू होती है राजनगर पब्लिक स्कूल से जहाँ लंचटाइम में रिया नाम की एक लड़की सहपाठियों से राज नाम के लड़के के बारे में पूछती है और जब उसे ज्ञात होता है की राज को किसी सीमा नाम की लड़की के साथ देखा गया था तो उसे ये जानकर गहरा धक्का पहुंचता है I रिया एक 17 वर्षीय निहायत ही खूबसूरत लड़की है जिसमे खूबसूरत होना अगर गुण है तो इस गुण के अलावा उसके निहायत ही जिद्दी होने और गुस्सैल होने के अवगुण भी हैं I रिया शहर के पुलिस कमिश्नर एम्० के० शर्मा की दुलारी बेटी है जो राज पर दिलोजान से फ़िदा है I दूसरी ओर सीमा है जो एक 17 वर्षीय रिया जितनी ही खूबसूरत लड़की है मगर मिज़ाज में ऐन रिया के उलट है और हर बात को निहायत ही संजीदगी और समझदारी से लेती है और उसका यही मिज़ाज राज को अपनी ओर खींच लेता है I सीमा के पिता मधुसूदन गुप्ता राष्ट्रीय राजनीति का एक पुराना घाघ चेहरा हैं और केंद्र में मंत्री हैं जो 2G घोटाले में फंसा हुआ है I त्रिकोण का तीसरा कोण राज है जो एक १८ वर्षीय खूबसूरत लड़का है और जिसे रिया मन ही मन में प्यार करती है मगर कभी इज़हार नहीं कर पायी है I राज का एक बड़ा भाई है धीरज जो एक पुलिस इंस्पेक्टर है और राज पर जान लुटाता है और राज उस पर I कुछ छोटी छोटी घटनाओं, प्रसंगों, प्रेमियों की चुहलबाजियों, कॉलेज की मौज मस्ती के सहारे कहानी आगे बढ़ती है और फिर एक दिन एक क़त्ल हो जाता है और उसी क़त्ल को लेकर हुई उठा पटक, तफ्तीश और कातिल के बेनकाब होने के साथ साथ प्रेम में समर्पण, त्याग, बाप का बेटी के प्रति , बेटी का बाप के प्रति , भाई का भाई के प्रति अगाध प्रेम जैसी मानवीय भावनाओं से ओत प्रोत कथानक से युक्त उपन्यास है ‘एक हसीन क़त्ल’ I

उपन्यास लिखते समय मोहन मौर्य कुछ दुविधा में फंसे से नजर आये हैं विशेषकर narrative form को लेकर I क्यूंकि शुरुवात उन्होंने अध्याय की जगह दृश्य १,  दृश्य २ करके की है जो कुछ समझ में नहीं आया की उसका मंतव्य क्या है ? कोई Play का Scene लिखा गया है या film का ? पहले अध्याय में स्थान –राजनगर पब्लिक स्कूल, समय -११.०५, लंच टाइम से अफ़साने को आगाज़ दिया गया है और पहले अध्याय को दृश्य १ लिखने को सार्थक किया है की किसी स्थान विशेष पर विशेष समय पर उक्त घटना घटित हो रही है I लेकिन बाद के सभी दृश्यों में ये form गायब है और कहानी आम उपन्यासों जैसे ही चलती है I तो बेहतर यही रहता की दृश्य के स्थान पर पहला अध्याय, दूसरा अध्याय करके ही लिखा जाता I पूरा उपन्यास कुल २३ अध्यायों (दृश्यों) में लिखा गया है I

कुल जमा १६० सफ़हों पर बिखरी इस दास्तान में क़त्ल के विषय में ८० वें पृष्ठ (दृश्य १५) पर बताया गया है जो एक रहस्य कथा के अनुसार बिलकुल ही सही नहीं है I ये बात इस आधार पर कही जा रही है जबकि इस उपन्यास का जोर शोर से प्रचार प्रसार बतौर murder mystery किया गया था और किताब के टाइटल कवर पर लिखी हुईं पंक्तियाँ “एक स्कूल गर्ल के मर्डर की उलझी हुई दास्तान जिसे सुलझाने के लिए पूरी पुलिस फ़ोर्स को दांतों तले पसीना आ गया और जब राज खुला तो …” साबित भी करती है I

पहले ७९ पृष्ठों तक ९० के दशक की बॉलीवुड मूवीज में दर्शाए गए कॉलेज जीवन की झांकियां वही स्टूडेंट्स की चुहलबाजियां और कोरी भावुकता से भरे दृश्यों की भरमार है और पढ़ते हुवे दिमाग के अन्दर आयशा जुल्का, अक्षय कुमार, मोहनीश बहल, सईद जाफरी, जैसे कलाकारों की तस्वीरें भी आती जाती हैं I ८० पृष्ठ के बाद कहानी रफ़्तार पकडती है और अंत तक बाँध कर रखती है लेकिन क़त्ल की तफ्तीश और तहकीकात के angle कहीं से उभर कर सामने नहीं आते हैं ( जबकि किरदार के तौर पर इंस्पेक्टर का भी दखल है कहानी को बढ़ाने में और ये किरदार महज तफ्तीश के लिए नियुक्त जासूस जैसा किरदार न होकर कहानी का ही एक अहम् अंग है ) I कातिल की शिनाख्त Rules of Inference के आधार पर विस्तृत रूप में न किये जाकर काम चलाऊ deduction के आधार पर ही करना अच्छा आईडिया नहीं है वो भी तब जब लेखक खुद को बतौर एक रहस्य कथा लेखक स्थापित करने के लिए प्रयासरत हो I

बात जब रहस्य कथा की हो तो कम से कम एक ऐसी कोजी mystery तो जरूर अपेक्षित होती है जिसमे कोई गुत्थी हो, सुराग हो और परत दर परत रहस्य पर से पर्दा उठे I लेकिन यहाँ पर लेखक ने चतुराई का परिचय देते हुवे इस ‘murder mystery’ के प्लाट को एक hardcore murder mystery के दाएरे से बाहर ले जा कर  sub genre ‘Romantic Suspense Thriller’ के खांचे में फिट करके सारी खताएं बख्शवा ली हैं I क्यूंकि mystery उपन्यास में जब Romance Peripheral हो जैसा की Carola Dunn, Dorothy L. Sayers की किताबों में है तो रहस्य कथा के बहाव् में उसका कोई फर्क नहीं पड़ता है I लेकिन जब Mystery Secondry  हो और romance प्रमुख हो तो रहस्य कथा रहस्य कथा जैसा रोमांच पैदा ही नहीं कर सकती है I और दोनों का समावेश करके कोई hardcore mystery लिखना किसी विरले लेखक का ही काम होगा I ‘एक हसीन क़त्ल’ में एक कामयाब Romantic Suspense Thriller के लिए जरूरी सभी तत्व मौजूद हैं और Suspense का स्तर ऊंचा रखा गया है जो इसकी गुणवत्ता में इजाफा करता है I

लेखक ने सबसे ज्यादा प्रभावित अपनी भाषा और शैली में किया है I लेखक के पास एक सशक्त भाषा और शैली है I  आम बोलचाल की भाषा, अंग्रेजी के बड़े बड़े शब्दों, वाक्यों और लच्छेदार मुहावरों के प्रयोग से परहेज़ रखा है और बहुत आसान और सहज भाषा में अपने उपन्यास को पढ़वा ले जाते हैं I

उपन्यास को पढ़वा ले जाना किसी लेखक के लिए बड़ी सफलता है और मोहन मौर्य इस मामले में पूरी तरह कामयाब हैं I

कुल मिलाकर ‘एक हसीन क़त्ल’ को नवोदित लेखक का प्रथम प्रयास जानकर, बगैर किसी स्थापित लेखक से तुलना किये बगैर, बगैर किसी पूर्वाग्रह के पढ़े जाने की जरूरत है I और hardcore Mystery Lover को भी Change के तौर पर ही सही इस उपन्यास को जरूर पढ़ना चाहिए अगर एक प्यारी सी हलकी फुलकी कहानी पढ़ने का मन है और दिमागी मशक्कत का लोभ भी तब तो मोहन मौर्य ने ये उपन्यास इसी मकसद से लिखा है I और बतौर लेखक उन्होंने उम्मीद जगाई है I आशा है की बहुत जल्द और भी बेहतर कुछ लेकर आयेंगे वो I लेखक के रूप में किया गया उनका ये प्रयास सराहनीय है I मेरी तरफ से इस उपन्यास को 3.5 स्टार रेटिंग I

© Copyrights Reserved

You can get his book and reach him with one click below:

Amazon

Facebook

Advertisements