अनुवाद – ‘ द ब्लू सेक्विन’ लेखक – आर ० आस्टिन फ्रीमैन

आर० आस्टिन फ्रीमैन एक ब्रिटिश रहस्य कथा लेखक थे जो अपने समय में उस वक़्त रहस्य कथाओं की परम्परागत लेखन शैली के ऐन उलट उलटे सिरे से कहानियां गढ़ने के लिए जाने जाते थे, अर्थात उनकी कहानियों में आपराधिक कृत्य और अपराधी दोनों ही कहानी के आरम्भ में पाठकों के सामने होते थे और फिर उनका नायक परत दर परत रहस्य को सुलझाते हुवे हो चुकी घटना या अपराध में छुपे रहस्य को खोजता था I

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आर० आस्टिन फ्रीमैन एक ब्रिटिश रहस्य कथा लेखक थे जो अपने समय में उस वक़्त रहस्य कथाओं की परम्परागत लेखन शैली के ऐन उलट उलटे सिरे से कहानियां गढ़ने के लिए जाने जाते थे, अर्थात उनकी कहानियों में आपराधिक कृत्य और अपराधी दोनों ही कहानी के आरम्भ में पाठकों के सामने होते थे और फिर उनका नायक परत दर परत रहस्य को सुलझाते हुवे हो चुकी घटना या अपराध में छुपे रहस्य को खोजता था I उनकी अधिकतर कथाओं का नायक डॉक्टर थार्नडाइक है जो एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट है और तथ्यों एवं सूत्रों के वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर रहस्य सुलझाता है I

प्रस्तुत कथा ‘थार्नडाइक सीरीज’ की एक प्रसिद्ध कहानी ‘द ब्लू सेक्विन‘ का अविकल अनुवाद है I

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मूल कथा – आर० आस्टिन फ्रीमैन

अनुवाद – सबा खान

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थार्नडाईक बेचैनी के आलम में प्लेटफार्म पर खड़ा बार बार इधर उधर ताके जा रहा था, और जैसे जैसे ट्रेन के चलने का समय निकट आ रहा था, उसी अनुपात में उसकी बेचैनी भी बढ़ती जा रही थी  I

“पता नहीं कहाँ रह गया ? काम का कुछ अता पता नहीं और पनौती पहले ही शुरू ?” – वह मन ही मन झुंझलाते हुवे बुदबुदाया और गार्ड के हरी झंडी दिखाते ही लपक कर एक खाली ‘स्मोकिंग कम्पार्टमेंट’ में घुस गया – “ अब तो आने से रहा वह ” – उसने ये कहते हुवे निराश भाव से दरवाजा बंद किया और ट्रेन के रेंगना शुरू करते ही उम्मीद भरी निगाहों से एक बार फिर खिड़की से बाहर की ओर झाँका I

“ अरे !! कहीं यह वही तो नहीं ? ”- उसका बडबडाना पूर्ववत जारी था – “ क्या आदमी है यार…भला कोई ऐसा करता है, खामखाह में जान दांव पर लगा दी, अगर यह वही है तो अगले किसी कम्पार्टमेंट में है ” – उसके स्वर में उत्तेजना के साथ साथ आश्चर्य का भी भाव था I शायद उसने पटरियों पर रेंगती ट्रेन पर अंतिम समय में किसी को सवार होते देख लिया था I

मैं चुपचाप खड़ा उसका ये बडबडाना सुन रहा था I दरअसल थार्नडाइक की इस पूरी बातचीत और बेचैनी का मरकज़ ‘पुर्तगाल स्ट्रीट’ स्थित सॉलिसिटर्स की फर्म ‘स्टॉपफ़ोर्ड एंड मायर्स’ के सदस्य ‘मि० एडवर्ड स्टॉपफ़ोर्ड थे’, जिनसे मौजूदा हालातों में हमारा त़ाअल्लुक महज़ एक टेलीग्राम की बुनियाद पर बन गया था जो कि पिछली शाम को हमारे कार्यालय तक पहुँची थी और जिसकी इबारत कुछ यूँ थी –

“ क्या आप एक महत्वपूर्ण केस के सिलसिले में कल यहाँ आ सकते हैं ? सभी जरूरी खर्चे हम वहन करेंगे – स्टॉपफ़ोर्ड एंड मायर्स ”

थार्नडाइक नें उक्त टेलीग्राम का जवाब हाँ में दिया था और आज अलस्सुबह एक और टेलीग्राम आन पहुची थी –

“ सुबह तकरीबन ८.२५ पर ‘चेरिंग क्रॉस’ से ‘वोल्डहर्स्ट’ के लिए निकलूंगा I अगर संभव हो सका तो फ़ोन करूंगा – एडवर्ड स्टॉपफ़ोर्ड ”

लेकिन उसका कोई फ़ोन नहीं आया था, मगर दूसरी टेलीग्राम के सन्देश के अनुसार हमने ये अंदाज़ा गलत भी नहीं लगाया था कि स्टेशन पर ही वह मिलना चाहता था और हमारे साथ ही ‘वोल्डहर्स्ट’ तक चलना चाहता था I वैसे भी अभी तक हमें यह तक मालूम नहीं था कि असल में केस था क्या ? तो हम दोनों की निगाहें भी उसे ही तलाश कर रही थीं I मगर ट्रेन चल भी चुकी थी और उसका कहीं कुछ अता पता तक ना था I चूंकि हम दोनों का पहले कभी उससे किसी भी सिलसिले में रु ब रू साबका न पड़ा था, तो हम दोनों के लिए ही उसकी प्लेटफार्म पर मौजूदगी या ग़ैरमौजूदगी के सिलसिले में ऐन कील ठोंककर कुछ कहना भी मुहाल था I

“ यार यह कोई अच्छी बात नहीं है ” – थार्नडाइक का मूड उखड़ा हुआ था, उसने फिर अपना राग अलापना शुरू कर दिया – “ अगर वह मिल जाता तो उस केस के सिलसिले में हमें पहले से ही मोटे तौर पर बहुत कुछ पता चल सकता था ” – उसने असहाय भाव से कंधे उचकाये और कुछ सोचते हुवे अपना पाइप सुलगाया और लम्बे लम्बे कश खींचकर ‘लंदन ब्रिज प्लेटफार्म’ की ओर ताकने लगा I मैंने अभी तक इस पूरे सिलसिले में अपनी ओर से कुछ भी टीका टिपण्णी न की थी I कुछ पलों तक वह यूँ ही अपनी सोचों में गुम, रफ़्तार के साथ पीछे छूटते प्लेटफार्म को निहारता रहा फिर उसकी तवज्जोह हाथ में थमे अखबार की ओर गयी और यूँ ही अनमने भाव से उसने अखबार में छपी खबरों पर बगैर किसी अतिरिक्त तवज्जोह के सरसरी तौर पर ऊपर से नीचे निगाहें फिरानी शुरू कर दी I

“ किसी भी केस पर काम शुरू करने का भला यह कोई तरीका है ” – उसने अखबार से सर उठाये बगैर फिर बडबडाना शुरू कर दिया – “ कि केस की किस्म का कुछ अता पता भी न हो और बगैर किसी पूर्व सूचना के सीधे इन्वेस्टीगेशन में कूद पड़ा जाए, उस पर अफ़सोस की बात यह कि जब केस की बाबत जानकारी प्राप्त करने का एक सुनहरा अवसर हो, और वह मौक़ा भी हाथ से जाता रहे I यह तो ऐसा हुआ कि ……………”

अपनी बात को पूरी किये बगैर वह अचानक चुप हो गया I जब उसमे अचानक आई इस तब्दीली को भांपने के लिए मैंने उसकी ओर देखा तो वह अखबार में छपी किसी खबर को बड़ी तल्लीनता से पढ़ रहा था I “ जार्विस, देखो तो शायद यह अपने ही केस के बारे में छपा है ” – उसने अखबार मेरी ओर सरकाया और पृष्ठ पर सबसे ऊपर मोटे अक्षरों में छपी एक खबर की ओर इशारा किया जिसका शीर्षक था –‘ केंट में एक खौफनाक क़त्ल’ I अखबार में छपी उस घटना का विवरण कुछ इस तरह से दिया गया था :-

“ ‘हैलबरी जंक्शन’ से सटे हुवे एक छोटे से क़स्बे ‘वोल्डहर्स्ट’ में कल सुबह एक हृदयविदारक घटना हुई I यह घटना सर्वप्रथम कल सुबह एक खलासी के संज्ञान में आई जब वह हमेशा की तरह यात्रियों से खाली हुई ट्रेन की साफ़ सफाई हेतु उसके डिब्बों का निरीक्षण कर रहा था I एक प्रथम श्रेणी के कम्पार्टमेंट का दरवाजा खोलने पर उसे फर्श पर एक आधुनिक वस्त्रों में सजी धजी, फैशनेबल महिला का शव मिला जिसकी सूचना उसने सम्बंधित अधिकारियों को दी जिन्होंने फौरी कार्यवाई के तहत मेडिकल टीम को बुलवा भेजा I उक्त टीम के डिवीज़नल सर्जन डा० मार्टन नें निरीक्षण के उपरान्त यह पाया कि उक्त महिला की मृत्यु कुछ ही मिनटों पहले हुई थी I लाश की हालत देखकर यह अंदाजा लगाना कतई  मुश्किल नहीं था कि उक्त महिला का बड़ी बेरहमी से क़त्ल किया गया था और मौत की वजह सर में किसी नुकीले और धारदार हथियार का भीषण वार था जिसके चलते खोपड़ी में छेद सा हो गया था I वार की भीषणता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि खोपड़ी में बड़ा सा झरोखा बन गया था और हथियार मष्तिष्क तक जा पहुंचा था I घटना स्थल पर मौजूद कीमती ड्रेसिंग बैग, मकतूला के शरीर पर मौजूद कीमती आभूषणों और हाथों में कई कीमती हीरों की अंगूठियों की मौजूदगी यह दर्शाने के लिए काफी थी कि क़त्ल का मकसद लूटपाट न होकर महज़ उक्त महिला का क़त्ल ही था I ऐसी भी अफवाहें हैं कि स्थानीय पुलिस ने इस सिलसिले में एक गिरफ़्तारी भी की है मगर खबर लिखे जाने तक इस अफवाह की पुष्टि नहीं हो पायी थी ”

मैंने अखबार उसे वापस सौंपते हुवे कहा –“ सचमुच बड़ा ही अजीब केस है, मगर इस खबर के ज़रिये हमें कोई बहुत काम की जानकारी तो नहीं मिली I हाँ, अगर यही अपना केस है तो कम से कम एक शिकायत जरूर दूर हो गयी कि केस की किस्म क्या है ”

“ किसी हद तक तुम सही कह रहे हो ” – थार्नडाइक ने सहमति जताते हुवे अपनी बात भी जोड़ी  – “ मगर फिर भी इस खबर के ज़रिये हमें इतना कुछ तो पता चल ही गया है जिस पर हम तबसरा कर सकते हैं I मसलन, खोपड़ी में हुआ वह झरोखे जैसा घाव जो इस खबर के मुताबिक किसी नुकीले और धारदार हथियार के चलते हुआ है, जाहिर है कि वह गोली का घाव तो हो नहीं सकता क्यूंकि गोली से हुआ घाव इस तरह से नहीं होता और फिर एक काबिल डॉक्टर नें भी इस बात की पुष्टि की है कि आलाए क़त्ल कोई नुकीली और धारदार चीज़ है I अब सोचने की बात यह है कि वह आखिर किस तरह का हथियार हो सकता है जिसकी मारक क्षमता भी इस कदर भीषण थी ? कातिल के लिए रेल के डिब्बे जैसी संकरी और कदरन सीमित जगह पर इतना भीषण और हिंसक वार कर पाना कैसे मुमकिन हुआ ? और सबसे बड़ी बात यह है कि कातिल किस तरह का शख्स है और इस तरह के हथियार तक उसकी पहुँच क्यूँकर थी ?” – अपनी कही बातों का मुझ पर प्रभाव देखने के लिए उसने ठहरकर मेरी ओर अपलक देखा और मुझे पूरी तवज्जोह से अपनी बातों की ओर मुखातिब पाकर उसने बात बढ़ाई – “ ये कुछ ऐसी बुनियादी बातें हैं जिनपर तबसरा किया जाना निहायत ही जरूरी है I इसके अलावा कुछ अन्य बिन्दुवों पर भी गौर किया जा सकता है – मसलन, लूटपाट के अलावा क़त्ल जैसे संगीन जुर्म के लिए अन्य संभावित मोटिव और क्या हो सकते हैं ? या क़त्ल के अलावा दूसरे ऐसे कौन से संभावित कारक हो सकते हैं जिनके चलते दुर्घटनावश इस तरह के प्राणघातक घाव और चोटें पैदा हो सकती हैं ?”

“ क़ातिल नें बतौर आलाए क़त्ल इस्तेमाल के लिए हथियार चुनते समय जरा भी दूरंदेशी और दानिशमंदी नहीं दिखाई है ” – मैंने अपना ख्याल ज़ाहिर किया

उसने प्रशंसात्मक निगाहों से मेरी ओर देखते हुवे कहा – “ हाँ, चोटों और घावों की प्रकृति को देखते हुवे अगर किसी हथियार की कल्पना की जाए तो यह जरूर किसी विशेष प्रकार का ‘हैंडीटूल’ जैसा ही उपकरण होगा जिनकी उपलब्धता का दाएरा भी सीमित होता है I जैसे किसी राजमिस्त्री के पास ‘कन्नी’ या बढ़ई के पास ‘हथौड़ी’ या किसी लुहार के पास कदरन वजन में भारी हथौड़े की उपलब्धता सहज है, क्यूंकि ये ऐसे विशेष उपकरण हैं जो कुछ विशेष काम धंधों से जुड़े लोगों के पास ही सुलभ होते हैं I क्या तुम्हारे पास कोई सादा कागज़ या कोई कापी है ?”

मैंने बगैर कोई सवाल किये अपने बैग में हाथ डाला और उसे एक नोटबुक थमा दी और ख़ामोशी से उसे देखने लगा I काफी देर तक हम दोनों के बीच कोई दूसरी बात नहीं हुई और वह उसी मुद्रा में – घुटने पर नोटबुक रखे खिड़की से बाहर झांकते हुवे, बीच बीच में नोटबुक पर कुछ लिखता रहा I उसकी ये तन्द्रा तभी भंग हुई जब ट्रेन की रफ़्तार ‘हैलबरी जंक्शन’ के पास आकर कम हो गयी I अब हमें यहाँ से ‘ब्रांचलाइन’ की ट्रेन पकडनी थी I

जब हम प्लेटफार्म पर उतरे तो मैंने देखा कि गाडी के अगले सिरे की ओर से एक संजीदा सूरत और पहनावे से संभ्रांत लगने वाला एक व्यक्ति गाडी से उतरने वाले हर यात्री पर खोजपूर्ण दृष्टि डालता हुआ हमारी ही ओर आ रहा था I जल्द ही उसने हमें परख लिया और तेज़ी से आगे बढ़कर थार्नडाइक से मुखातिब हुआ – “ डा० थार्नडाइक ?”

उसने सहमति में सर हिलाया और आगंतुक से बोला – “ जहाँ तक मेरा ख्याल है आप ही शायद मि० एडवर्ड स्टॉपफ़ोर्ड हैं ?”

आगंतुक ने सहमति जताते हुवे अपने सर को हल्का सा ख़म देकर हमारा अभिवादन किया और फिर उत्तेजित भाव से बोला – “ आपको यक़ीन नहीं होगा की आपको यहाँ देखकर मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है I मेरी ट्रेन तो लगभग छूट ही गयी थी और साथ ही मुझे ये भी लगा था की अब आपसे मुलाकात शायद न हो सके ” – बात करते करते उसकी निगाह थार्नडाइक के हाथ में थमें अखबार पर गयी – “ शायद आप घटना के बारे में जान गये हैं, सच में यह घटना इस छोटी सी जगह पर दिल को दहलाने वाली है और यहाँ के हिसाब से तो बिलकुल अनोखी है I”

“इसमें लिखा है की इस सिलसिले में कोई गिरफ्तारी भी हुई है?” थार्नडाइक ने पूछा

“ हाँ –हुई तो है I दरअसल वह मेरा भाई है I उसके साथ बहुत ही बुरी बीती” – उसने कुछ हिचकिचाते हुवे बताया – “ अब सूरतेहाल यह है कि भाई की हालत देखकर मैं भी उलझन में पड़ गया हूँ, लेकिन………… ठहरिये……. मैं शुरू से सारे तथ्य आपके सामने रखता हूँ, आप ही बेहतर तरीके से परिस्थितियों का आंकलन कर सकते हैं,……….. लेकिन……….. पहले आइये प्लेटफार्म की ओर चलते हैं, ट्रेन अभी तकरीबन १५ मिनट तक यहाँ ठहरी रहेगी ”- उसने कई टुकड़ों में अपनी बात खत्म की, दरअसल वो अपनी बात शुरू करने से पहले कुछ वक़्त चाहता था ताकि बातों का कोई सिरा तलाश सके I

हमने अपने बैग एक खाली ‘फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट’ में रखे और प्लेटफार्म के कदरन कम शोरगुल वाले सिरे की ओर बढ़ गए I वह हम दोनों के बीच में चल रहा था जिससे उसकी कही बातें हम दोनों ही समान रूप से सुन रहे थे – “ दरअसल जिस महिला का इस बेरहमी से क़त्ल हुआ है उसका नाम मिस एडिथ ग्रांट था I वह पहले एक चित्रकार की मॉडल हुआ करती थी I चूंकि मेरा भाई – हेरोल्ड स्टॉपफ़ोर्ड भी एक पेंटर है तो एडिथ भी मेरे भाई के लिए मॉडलिंग किया करती थी I शायद आपने भाई का नाम सुना हो ?”

“ हाँ, सुना है और उसकी पेंटिंग्स भी काफी देखी हैं, काफी सिद्धहस्त पेंटर है आपका भाई ”

“ हाँ मुझे भी लगता है कि बतौर पेंटर उसका भविष्य बहुत उज्जवल है…तो उन दिनों वह नौजवान था –तकरीबन २० के आसपास की उम्र रही होगी उसकी  –  मॉडलिंग और पेंटिंग बनाने के दरमियान उसके और मिस ग्रांट के बीच की नजदीकियां बढ़ती गयीं और वह दोनों एक दुसरे के काफी करीब आ गये थे —एक तरह से यह एक निर्दोष सा खूबसूरत रिश्ता था जिसमे अश्लीलता और वासना की कहीं कोई गुंजाइश नहीं थी क्यूंकि हर इंग्लिश मॉडल की तरह ही मिस एडिथ भी एक इज्ज़तदार और शरीफ लड़की थी……जैसा की आप भी जानते होंगे की यहाँ इस तरह की मॉडलिंग को गिरी हुई निगाह से नहीं देखा जाता है और अच्छे घरानों की लड़कियां भी यह पेशा अपनाने से गुरेज़ नहीं करती हैं I” – उसने ठहरकर अपनी कही बातों का जायजा लिया और फिर आगे बोला –“ बहरहाल उनका यह सम्बन्ध खूब परवान चढ़ा और उस सिलसिले में दोनों ही तरफ से काफी खतोकिताबत भी हुई, और कुछ छोटे बड़े तोहफों का भी लेन देन हुआ जिसमे एक मोतियों के मनकों वाली चेन भी थी जिसमे एक लॉकेट पड़ा हुआ था I मेरे  भाई ने जब बतौर तोहफा वह चेन एडिथ को दी थी तो उस वक़्त उसने लॉकेट में न केवल अपना पोर्ट्रेट रखने की, बल्कि उसपर ‘ टू एडिथ, फ्रॉम हेरोल्ड’ खुदवाने की निहायत ही बचकानी और अव्वल दर्जे की अहमकाना हरकत भी की थी I”

मिस ग्रांट की आवाज़ भी बड़ी सुरीली थी जिसके चलते उसने बाद में मॉडलिंग छोड़ दी और ‘ओपेरा शोज’ से जुड़ गयी और साथ ही मंचीय प्रस्तुतियां भी देने लगी I इस दिशा में उसने ख़ासा नाम भी कमाया था जिसके चलते न केवल उसकी रुचियों में बदलाव आया बल्कि उसके सहयोगी और संगी साथी भी बदल गए जिनके बीच विचरना उसे अच्छा लगने लगा था I जाहिर था इन नाइत्तेफाकियों का असर उनके रिश्तों पर भी पड़ना था, तो बगैर किसी शोर शराबे के दोनों ही अपनी राह लग लिए थे I इसी बीच हेरोल्ड की भी सगाई हो गयी और उसने मिस ग्रांट से अपने सारे ख़त वापस मांगने शुरू कर दिए, विशेषकर वह लॉकेट जिसमे उसने पोर्ट्रेट के साथ साथ ‘टू एडिथ, फ्रॉम हेरोल्ड’ की इबारत भी खुदवाई थी I मगर मिस ग्रांट ने किसी भी कीमत पर वह लॉकेट लौटाने से इनकार कर दिया I हालांकि हेरोल्ड ने बदले में उससे भी कीमती कोई दूसरा तोहफा देने की भी पेशकश की थी, मगर उसने अनसुनी कर दी I हाँ उसने वह सारे ख़त जरूर हेरोल्ड को वापस कर दिए थे I

“ अभी पिछले महीने से हेरोल्ड यहाँ हैलबरी में रह रहा था और आसपास के इलाकों में भ्रमण करते हुवे यहाँ चारों ओर बिखरे प्राकृतिक सौंदर्य को अपनी कला के माध्यम से उकेरने की कोशिश कर रहा था I इसी सिलसिले में कल सुबह वह ‘शिंगलहर्स्ट’ के लिए ट्रेन पकड़ने इधर आया था ……..‘शिंगलहर्स्ट’ यहाँ से तीसरा और ‘वोल्डहर्स्ट’ से एक स्टेशन पहले एक कदरन शांत और खूबसूरत सी जगह है जहाँ वो कुछ ‘स्केच’ बनाने के लिए जाना चाहता था I

प्लेटफार्म पर उसकी मुलाक़ात अचानक मिस ग्रांट से हो गयी जो लंदन से आई थी और जहाँ आगे उसका मुकाम ‘वोर्थिंग’ था I दोनों ने ही ‘ब्रांचलाइन’ ट्रेन के एक ‘फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट’ में एक साथ अपनी सीट ली थी I उस वक़्त भी उसने गले में वही लॉकेट पहना हुआ था, जिसे देखकर हेरोल्ड नें अपनी मांग दोबारा दोहराई और हमेशा की तरह उसने फिर इनकार कर दिया  I और यही मुद्दा बढ़ते बढ़ते तीखी झड़प में बदल गया था क्यूंकि ‘मंस्डेन’ स्टेशन के गार्ड और एक खलासी के दिए गए बयानों के मुताबिक़ वो दोनों एक दूसरे से लड़ झगड़ रहे थे और चीख चिल्ला रहे थे I मगर इस पूरे घटनाक्रम का सबसे हैरतंगेज़ पहलू ये है कि झगड़े के दौरान उस औरत ने लॉकेट को चेन समेत अपने गले से गुस्से में नोचकर चीखते हुवे मेरे भाई की ओर उछाल दिया था जिससे उन दोनों के बीच शुरू हुई गहमागहमी थम सी गयी थी और आगे ‘शिंगलहर्स्ट’ पर दोनों ख़ामोशी से एक दूसरे से अलग हो गए थे जहाँ मेरा भाई ट्रेन से उतर गया था I उस वक़्त उसके पास उसकी पूरी ‘स्केचिंग किट’ के साजो सामान के अलावा एक बड़ा सा ‘छाता’ था जिसका निचला सिरा ‘ऐशवुड’ के बने एक लम्बे डंडे से जुड़ा हुआ था जिसके अगले सिरे पर एक मजबूत स्टील का असाधारण रूप से ‘लम्बा कीला’ सा लगा हुआ था जो जमीन पर चलते समय पकड़ बनाने के काम आता था I

“१०.३० बजे के आसपास वह शिंगलहर्स्ट पर उतरा था और ११.०० बजे तक वह पास के एक खूबसूरत स्थान पर पहुँच गया था जहाँ तकरीबन अगले तीन घंटों तक वह मुसलसल पूरी तन्मयता के साथ पेंट करता रहा था I अपना काम समाप्त करके और साजोसामान समेटकर जब वह स्टेशन की वापसी के सफ़र पर था, तभी उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था I

“अब उसके खिलाफ उपलब्ध परिस्थितिजन्य सबूतों पर यदि गौर किया जाए तो बहुत कुछ ऐसा है जो कहीं से भी उसे बेगुनाह साबित नहीं कर सकता I वह अंतिम शख्स था जो मकतूला के साथ देखा गया था, क्यूंकि ऐसा कोई दूसरा शख्स अभी तक सामने नहीं आया है जिसने ‘मंस्डेन’ के बाद मकतूला को देखा हो I जब मकतूला जीवित थी तो वही वह अंतिम शख्स था जिसे उसके साथ झगड़ते देखा गया था और जिसके गवाह भी मौजूद हैं I उसके पास मकतूला को जान से मारने की पर्याप्त वजह भी थीं I और सबसे बड़ी बात आलाए क़त्ल उसके छाते में लगे ‘लम्बे कीले’ की सूरत में फौरी तौर पर मुहैय्या था जो अपनी बनावट और उपलब्धता के आधार पर मकतूला के जिस्म पर उस तरह की चोटें पहुंचाने और वार करने में पूरी तरह सक्षम था जिससे मकतूला की जान चली जाती I और फिर गिरफ़्तारी के बाद जब उसकी जामातलाशी हुई तो कोढ़ में खाज की तरह उसके पास से टूटी हुई चेन और वह लॉकेट भी बरामद हो गया जिसे लेकर फ़ौरन ही यह सोच लिया गया कि क़त्ल करने के बाद उसी नें उस चेन को  मकतूला की गर्दन से झटके के साथ नोच लिया था जिससे चेन टूट गयी थी I

“इतना कुछ उसके खिलाफ होने के वाबजूद सिर्फ एक ही चीज़ है जिसके चलते मेरा मन उसे किसी भी सूरत में अपराधी मानने को तैयार नहीं है …….और वह एक चीज़ है – उसका अब तक का चाल चलन, उसका चरित्र – जो न केवल आला दर्जे का है, बल्कि उसकी यही कुछ विशेषताएं उसे औरों से अलग भी करती हैं – वह एक सम्मानित पेशे में है और पेशेगत सम्मान से इतर भी वह लोगों के बीच अपने किरदार के चलते सम्मानित है I एक पल के लिए अगर हाल में मिस ग्रांट से हुई झड़प को हाल फिलहाल उसके मिजाज में आई ऐसी तब्दीली मान भी लिया जाए जिसे वक़्त रहते मैं न जान सका होऊँ ,तो भी मैं यह मानने को कतई तैयार नहीं कि वह इस दर्जे की मूर्खता करेगा और क़त्ल जैसा जघन्य अपराध कर बैठेगा I उपलब्ध परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर उसे अपराधी करार देना अव्वल दर्जे की बेवकूफी के सिवा कुछ भी नहीं I भाई होने के नाते और उसके अब तक के चाल चलन के आधार पर मुझे उसकी कही हर एक बात पर यक़ीन है, लेकिन एक वकील होने के नाते अगर मैं उस नुक्ते निगाह से सारे हालात का जाएजा लूं तो यह कबूल करते हुवे मेरा कलेजा फटता है कि हालात उतने हौसलाअफजाह नहीं हैं I उसके बचने के चांसेस न के बराबर हैं और मेरी सारी उम्मीदें टूटती नज़र आ रही हैं ”- अपनी रामकहानी के अंतिम अंश सुनाते सुनाते वह भावुक हो उठा था और अंतिम पंक्तियाँ उसने इतने कातर भाव से कही थीं कि मेरा कलेजा मुह को आने लगा I पूरे वार्तालाप के दौरान न ही मैंने और न ही थार्नडाइक ने उससे कुछ पूछा था न ही उसे टोका था I

“ मुझे नहीं लगता कि अभी उम्मीद का सितारा डूब गया है ” – थार्नडाइक ने जवाब दिया – “ हालांकि पुलिस जरूर अपनी कामयाबी पर इतरा रही होगी”

ट्रेन का समय हो चुका था – हम लोग वापस आकर अपनी जगहों पर बैठ गए थे I वकील के चेहरे पर निराशा की परछाइयाँ अब भी तैर रही थीं …..उसने थार्नडाइक को खिड़की से बाहर की ओर ताकता पाकर कहा – “ मैंने ‘कॉरोनर’ से इस बात की अनुमति ले ली है कि आप लाश का मुआइना कर सकें और पोस्टमोर्टेम के दौरान आपकी मौजूदगी पर किसी को कोई ऐतराज़ भी न हो”

“ क्या आपको मकतूला के जिस्म पर प्राणघातक वार से हुवे घाव की सही स्थिति की जानकारी है ?”

“ हाँ, यह बाएं कान के पीछे थोडा ऊपर की ओर हटके, लगभग एक गोल सुराख की तरह का है जो माथे की किनारे की तरफ जाकर एक कटे फटे लम्बे से चीरे की शक्ल में फ़ैल सा गया है ”

“ और लाश की स्थिति ?”

“ लाश फर्श के समानांतर लम्बाई में पडी हुई थी और पैर दाहिने ओर के दरवाजे से लगभग सटे हुवे थे”

“ क्या सर पर हुआ घाव ही जिस्म पर बना एकलौता घाव था ? ”

“ नहीं, मकतूला के दाहिने गाल पर एक लम्बा ‘कट’ या खरोंच जैसा गहरा निशान भी था जिसे पुलिस सर्जन नें ‘कॉनटियूज्ड वुंड’ जैसा कुछ कहा था और जिसकी बाबत उसका ख्याल कि वह खरोंच का निशान किसी भारी मगर भोथरे या किसी कुंद धारवाले हथियार के वार से बना था I इसके अतिरिक्त अन्य किसी चोट या निशान के बारे में नहीं सुना I”

“ क्या कल ‘शिंगलहर्स्ट’ से कोई और भी ट्रेन पर चढ़ा था ?” – थार्नडाइक के प्रश्न जारी थे

“ हैलबरी से चलने के बाद से कोई भी उस ट्रेन पर नहीं चढ़ा था ”

थार्नडाइक इन तथ्यों को सुनकर गहन विचारों में डूब गया I वह मन ही मन किसी निष्कर्ष पर पहुचने की कोशिश में लगा था I उसकी ये विचारमग्नता तभी टूटी जब ट्रेन ‘शिंगलहर्स्ट’ स्टेशन से होकर गुज़र रही थी I

“ यही वह जगह रही होगी जहाँ क़त्ल हुआ होगा ” – स्टॉपफ़ोर्ड ने कहा – “ या फिर यहाँ से ‘वोल्डहर्स्ट’ के बीच कहीं पर कातिल ने इस काम को अंजाम दिया होगा ”

थार्नडाइक ने अनमने भाव से केवल सर हिला दिया और खिड़की से बाहर तेज़ी से गुजरते जाते दृश्यों और वहां मौजूद चीज़ों को ध्यान से देखता रहा I

“ अच्छा, बाहर पटरियों के बीच और आसपास ढेर सारी चिप्पियाँ, और गिट्टियां बेतरतीबी से इधर उधर बिखरी पड़ी हैं, और पटरियों के जोड़ों के कुछ कीले भी नए दिखाई पड़ रहे हैं I क्या हाल ही में कुछ पटरियां बिछाने वाले मजदूरों ने यहाँ काम किया है ?” थार्नडाइक ने खिड़की से बगैर सर हटाये सवाल किया

“हाँ – स्टॉपफ़ोर्ड ने जवाब दिया – वो अभी आगे कहीं पटरियों पर काम कर रहे होंगे – क्यूंकि कल मैंने वोल्डहर्स्ट के निकट कुछ मजदूरों को काम करते हुवे देखा था ….उस वक़्त वे लोग किनारों पर बिखरे पुवाल के ढेरों में आग लगा रहे थे; कल वापसी के दौरान मैंने काफी धुवां भी देखा था I”

“ और यह बीच में पटरियों की जो लाइन बिछी दिख रही है, मेरे ख्याल से शायद वह एक ही ट्रैक पर दूसरी ट्रेन को पास देने के काम में लायी जाती होंगी जिन्हें शायद ‘साइडिंग’ कहते हैं ?

“ जी हाँ, रेलवे वाले अक्सर इन पटरियों पर कभी सामान से लदी हुई तो कभी खाली मालगाड़ियों को  ‘शंटिंग’ के जरिये दूसरे ट्रैक्स से गुजारने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं तो कभी अन्य गाड़ियों को पास देने में I जले हुवे पुवालों के अवशेष अभी भी सुलगते दिख रहे हैं ”- स्टॉपफ़ोर्ड ने भी खिड़की से बाहर देखते हुवे कहा

थार्नडाइक गहरी दिलचस्पी से जले हुवे उन काले ढेरों को एकटक घूरता रहा, और फिर एकाएक सारा दृश्य अलग अलग पटरियों पर खड़ी गाड़ियों की ओट में चला गया I बीच वाली पटरियों पर एक मवेशियों को ढोने वाली गाडी थी, उसके बाद की पटरी पर एक मालगाडी खड़ी थी और इन दोनों ही पटरियों से पहले पैसेंजर ट्रेन की पटरियां थीं जिस पर एक ट्रेन खड़ी थी जिसका एक ‘प्रथम श्रेणी कोच’ मजबूती से बंद था और उस पर सील भी लगी हुई थी I मैंने एक बात और भी नोट की कि ट्रैक्स के बीच की दूरियां कदरन कम थीं और अगर उन अलग अलग ट्रैक्स पर एक साथ ट्रेन्स गुजरतीं तो बीच में बहुत कम ही फासला रह जाता था I ट्रेन अब धीमी होने लगी थी और कुछ ही मिनटों में हम सब ‘वोल्डहर्स्ट’ स्टेशन पर खड़े थे I

थार्नडाइक के आगमन की खबर शायद वहां पहले ही पहुंची हुई थी क्यूंकि स्टेशन पर तकरीबन पूरा स्टाफ – दो खलासी, एक निरीक्षक, और स्टेशन मास्टर स्वयं हमारी अगवानी को मौजूद था I हमें देखकर स्टेशन मास्टर आगे आया और हडबडाहट के चलते अपने पद की गरिमा के ऐन उलट खुद ही हमारा सामान उठाने में मदद करने लगा I मगर किसी ने भी इस बात पर कोई ख़ास ध्यान न दिया I

“ क्या मैं वह डिब्बा देख सकता हूँ ?” – थार्नडाइक ने स्टॉपफ़ोर्ड से कहा I जाहिर है वहां पहुंचकर वह अब वक़्त नहीं बर्बाद करना चाहता था I

“ भीतर से तो देख पाना मुश्किल है ”- जवाब स्टेशन मास्टर ने दिया जब उससे कोच की बाबत दरयाफ्त किया गया – “ पुलिस नें उसे सील किया हुआ है, आपको इंस्पेक्टर से इस बाबत पूछना चाहिए ”

“ कोई नहीं, मैं इसे बाहर से ही देख लूँगा ” – थार्नडाइक ने कहा और स्टेशन मास्टर फ़ौरन ही इस बात पर राजी हो गया और हमारे साथ कोच की ओर बढ़ चला I

“ क्या अन्य प्रथम श्रेणी के यात्री भी उस दिन उस कोच में सवार थे ?” – रास्ते में थार्नडाइक ने पूछा

“ नहीं, कोई भी नहीं ….दरअसल ‘प्रथम श्रेणी’ का वह एकलौता कोच था और मृत महिला उस कोच की एकलौती यात्री थी I जो कुछ भी हुआ है, इस पूरे मामले ने हम सबकी रातों की नींद उड़ा दी है” – उसने एकाएक झुरझुरी सी ली फिर संयत होता हुवा बोला – “ जब ट्रेन स्टेशन पर पहुंची थी तो मैं वहीँ मौजूद था I हम सब रेलवे लाइन के किनारे जलते हुवे पुवाल के ढेरों को देख रहे थे जो वहां पर काफी तेज़ी से भड़कते हुवे जल रहे थे – इसलिए मैं पास की पटरियों पर खड़ी मवेशियों वाली गाडी को वहां से हटवाने को कह रहा था क्यूंकि ढेरों में से काफी धुवां पैदा हो रहा था और आग की तपिश भी ज्यादा थी जो काफी बड़े दाएरे में फैली हुई थी ……तो मैंने सोचा की इस तपिश और धुवें की वजह से गाडी में लदे मवेशी डरकर बिदक सकते हैं और इन मवेशियों के मालिक मि० फेल्टन खामखाह का टंटा खड़ा करेंगे क्यूंकि उनका कहना है की इन मवेशियों के डरने से उनके मांस की गुणवत्ता पर फर्क आ जाता है I”

“ उनका कहना बिलकुल सही है ”- थार्नडाइक ने कहा –“ लेकिन, आप एक बात बताइए कि क्या ऐसा होना मुमकिन है कि कोई शख्स बगैर किसी की निगाहों में आये गाडी के परले सिरे से चढ़ सके और उसी तरह उतर भी सके ? मान लो, एक अजनबी शख्स किसी स्टेशन पर दूसरी ओर से किसी डिब्बे में सवार हो जाता है और अगले स्टेशन पर ज्योंही ट्रेन कुछ धीमी होती है….बड़ी फुर्ती से बगैर किसी की निगाह में आये उसी तरह पिछली तरफ से उतर कर फुर्र हो जाता है …..क्या ऐसा होना मुमकिन है, सोच समझकर जवाब दीजिये ”

“ इस बात में संदेह है ” – स्टेशन मास्टर ने दबे स्वर में जवाब दिया –“ फिर भी मैं ऐन कील ठोंककर यह नहीं कह सकता की ऐसा होना नामुमकिन है ”

“ शुक्रिया, अब एक दूसरा सवाल – मैंने देखा की यहाँ पटरियों पर ढेर सारे मजदूर काम कर रहे हैं, क्या यह सभी मजदूर स्थानीय हैं ?”

“ न जी, सभी अजनबी हैं, और सूदूर राज्यों के भी हैं जो रोजी रोटी की तलाश में इधर आ गये हैं…मगर आपको अगर इस पूरे मामले में इनमे से किसी के शामिल होने का शक है तो मैं कहूँगा की यह शक बेबुनियाद है…..कुछ बेहद अक्खड़ स्वभाव के जरूर हैं, मगर इस हद तक जायेंगे मैं सोच भी नहीं सकता ”

“ नहीं, मैं इन पर शक नहीं कर रहा हूँ…लेकिन मैं इस केस के सिलसिले में उपलब्ध सभी तथ्यों पर शुरू से आखिर तक मनन कर रहा हूँ और तथ्यों को परखने की कोशिश कर रहा हूँ ”

“ हाँ हाँ क्यूँ नहीं…यह जरूर करिए ” – कुछ कुछ खिसियाने से भाव में स्टेशन मास्टर ने जवाब दिया I बाकी का सफ़र हम लोगों ने ख़ामोशी से तय किया और जब हम उस खाली कोच तक पहुंचे तो थार्नडाइक ने अगला सवाल किया – “ क्या आपको अच्छी तरह से याद है…..कि लाश की बरामदगी के वक़्त कोच के दाहिनी ओर का दरवाजा अच्छी तरह बंद और लॉक्ड था या खुला हुआ था ?”

“ दरवाजा बंद था मगर लॉक्ड नहीं था, मगर आप यह क्यूँ पूछ रहे हैं ?”

“ बस ऐसे ही, कोई ख़ास वजह नहीं है…..तो सील किया हुआ डिब्बा केवल एक ही है ?”

उत्तर की प्रतीक्षा किये बगैर उसने कोच का मुआइना करना आरम्भ कर दिया और मैंने साथ आये दोनों व्यक्तियों को बहाने से अपने साथ रोक लिया ताकि वो उसके मुआइने के दौरान उसका ध्यान न भटका सकें I वह हौले हौले अपनी खुर्दबीनी निगाहें हर कोने खुदरे में फिराते हुवे पीछे की ओर बढ़ता गया मानो उसे किसी ख़ास चीज़ की तलाश हो और यूँ ही बढ़ते बढ़ते वह घेरा काटकर कोच के पिछले सिरे पर स्थित पायदान के पास ठहर गया और उसने वहां से बहुत ही सावधानीपूर्वक अपनी नम उँगलियों की सहायता से कोई बहुत ही बारीक चीज़ उठाई और जेब से कागज़ का एक टुकड़ा लेकर वह चीज़ उसमे रखकर कागज़ को मोड़ा और अपनी जेब में पड़ी एक छोटी सी डायरी में रख लिया I फिर वह उस पायदान पर चढ़ गया और खिड़की से भीतर की ओर झाँकने लगा ….कुछ देर यूँ ही इधर उधर झांकते रहने के बाद उसने जेब से एक छोटा सा ‘इन्सफ्लेटर’ नाम का उपकरण निकाला जो एक ख़ास किस्म के पाउडर का छिडकाव करने के काम में आता है, और उसकी सहायता से उसने बीच की खिड़की के किनारों पर बड़ी नफासत से पाउडर की एक धुंधली सी बारीक पर्त फैलाई जिसने फैलते ही अपना काम बखूबी किया और अब खिड़की के किनारों पर धूसर और मटमैले रंग के ग़ैरसिलसिलेवार धब्बे से उभर आये थे जिनमे से कुछ धब्बों और खिड़की की चौखट से उनकी दूरी को उसने एक पॉकेट रूल की सहायता से माप लिया और अंतिम बार उसने पायदान पर निगाह फिराते हुवे बताया की उसका काम अब खत्म था I

जब हम वापस लौट रहे थे तो हमारी निगाह अचानक एक मजदूर जैसे दिखने वाले व्यक्ति पर पडी जो नजदीक के अन्य कोच के ‘चेयर्स’ और ‘स्लीपर्स’ का कुछ अतिरिक्त सावधानी से ही मुआइना कर रहा था I

“ क्या यह पटरियों की मरम्मत करने वाले मजदूरों में से कोई है? ” – थार्नडाइक ने स्टेशन मास्टर से पुछा

“ जी हाँ, यह उस गैंग का फोरमैन है”

“ तुम लोग धीरे धीरे आगे चलो मैं अभी आया ” – कहते हुवे थार्नडाइक तेजी से पीछे मुड़ा और जाकर उस व्यक्ति से कुछ पलों तक बात चीत करता रहा और वापस आकर बोला – “ शायद स्टेशन पर कोई पुलिस इंस्पेक्टर खड़ा है ”

“ हाँ, दिख तो रहा है ” – स्टेशन मास्टर ने उस ओर देखते हुवे जवाब दिया – “ शायद वह यह जानने आया है की आप किस फिराक में हैं ”

करीब आकर उसने हम लोगों को अपना परिचय दिया और आने का मकसद भी बताया और पूछा – “ क्या आप आलाए क़त्ल देखना चाहेंगे ?”

“ छाते की नोंकदार कील ”- थार्नडाइक ने संशोधन किया – “ हाँ जरूर देखूंगा…..अभी तो हम लोग ‘मोर्चुअरी’ जा रहे हैं ”

“ तब तो आप लोग रास्ते में पुलिस स्टेशन से ही होकर गुजरेंगे…..बेहतर होगा की आप मेरे साथ वहां तक चले चलें ”

हम लोगों ने उसका यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और पुलिस स्टेशन की ओर चल पड़े I स्टेशन मास्टर भी साथ में चिपक लिया था और उसके चेहरे से लग रहा था की वह उत्तेजना से मरा जा रहा है I पुलिस स्टेशन पहुंचकर इंस्पेक्टर ने लगभग फ़ौरन ही मुलजिम से बरामद साजोसामान हमें दिखाया और ड्रामेबाज़ी के अंदाज़ में कहने लगा – “ हम ये इलज़ाम नहीं सुनना चाहते कि हमने पक्षपात किया और बचाव पक्ष को पूरा मौका नहीं दिया…..यहाँ पर मुलजिम से बरामद सारा साजो सामान मौजूद है और ये रहा आलाए क़त्ल ” – कहते हुवे उसने पास की मेज़ से एक लम्बा सा डंडा जैसा उठा लिया I

थार्नडाइक ने मुस्कुराते हुवे उसके हाथों से मजबूत ‘ऐशवुड’ के बने उस कथित ‘आलाए क़त्ल’ को लेकर    एक लेंस की सहायता से बारीक मुआइना किया …..कुछ देर हर कोण से देखने के बाद उसने जेब से एक स्टील का ‘कैलिपर – गेज़’ निकाला और उस ‘नोंकदार कीले’ के व्यास के साथ साथ उस लम्बे डंडे का भी व्यास नोट किया जिसके सिरे पर वह ‘नोंकदार कीला’ लगा हुआ था I इन कामो से फारिग होकर उसने इंस्पेक्टर से कहा – “ हो सके तो अब ‘कलर बॉक्स’ और ‘स्केचबुक’ के भी दर्शन करवा दीजिये ”

इंस्पेक्टर ने चिर परिचित मुस्कुराहट के साथ ‘माँगी गयी चीज़’ के भी दर्शन करवाए I

“ वाह !!!! क्या बात है !!!! बहुत खूब !!!! – मि० स्टॉपफ़ोर्ड ! आपका भाई तो बहुत ही नफासत पसंद है – थार्नडाइक के मुह से तारीफ निकले बगैर न रह सकी…हम सभी उसके रख रखाव से प्रभावित हुवे थे – “ हर चीज़ सिलसिलेवार पूरी तरतीब के साथ रखी हुई….सारी टियूब्स अपनी निर्धारित जगहों पर, रंगों को मिलाने वाली सभी ‘पैलेट नाइव्स’ साफ़ चमकती हुईं, पैलेट्स भी बखूबी धुली हुईं, ब्रश भी पूरी सफाई से साफ़ किये हुवे – कहीं भी रंगों की वजह से चिपचिपाहट नहीं – वाह, ये सब तारीफ के काबिल है ”- थार्नडाइक ने तारीफ में कोई कसर न छोड़ी थी I

उसने स्केच उठाया और कुर्सी पर खड़ा कर दिया जहाँ भरपूर प्रकाश पड़ रहा था और पीछे हटकर उसे निहारने लगा – “ आप बता रहे थे की उसने सिर्फ तीन घंटों तक स्केच बनाया था ?” – उसके स्वर में आश्चर्य था – “ अगर आप सही कह रहे हैं, तो आपका भाई जीनियस है, भला तीन घंटों में कोई इतनी खूबसूरत और दिलकश पेंटिंग बना सकता है !!!!, भई, कमाल हो गया ”- उसने मुक्तकंठ से प्रशंसा की थी I हम सभी तारीफी निगाहों से उस कलाकार का काम देख रहे थे जो फिलहाल अभी एक मुलजिम की हैसियत से गिरफ्तार था I यह सब देखकर मेरा मन बतौर एक ‘बेरहम कातिल’ उसका तसव्वुर कर पाने में खुद को नाकामयाब पा रहा था I

“ मेरा भाई हर काम को पूरी नफासत और रफ़्तार से करने में माहिर है ” – स्टॉपफ़ोर्ड ने दुःख भरे लहजे में जवाब दिया

“ हाँ, लेकिन यह काम न केवल अपने बनाये जाने की रफ़्तार की वजह से काबिले तारीफ है, बल्कि उसकी प्रफुल्लित ह्रदय के साथ लगायी हुई लगन, गहरे जज्बातों में डूब कर की गयी मेहनत और जुनून की हद तक अपनी कला के प्रति समर्पण भाव की वजह से भी तारीफी निगाहों के काबिल है I लेकिन हम लोग यहाँ बैठकर केवल उसकी शान में कसीदे पढ़ते ही नहीं बैठ सकते, अभी बहुत काम बाकी हैं ”- कहते हुवे थार्नडाइक ने स्केच को पूर्ववत लपेटा और दराज़ में पड़े उस ‘तकरार की जड़’ लॉकेट और अन्य चीज़ों का सरसरी तौर पर जाएजा लेकर इंस्पेक्टर को शुक्रिया कहा और वहां से विदा ली I स्टेशन मास्टर भी हम लोगों से अलग होकर वापस स्टेशन की ओर चला गया था I

“ वह खामोश मगर जिंदगी से भरा हुआ ‘स्केच’ और वह ‘कलर बॉक्स’, ऐसा लग रहा था मानों वे अपने भीतर छुपे कुछ जज्बातों को मेरे सामने अल्फाज़ देने की कोशिश कर कर रहे हों ” – रास्ते में थार्नडाइक ने गंभीर होते हुआ कहा

“ मैं भी ऐसा ही कुछ सोच रहा हूँ ” – स्टॉपफ़ोर्ड ने टूटी आवाज़ में कहा – “ शायद ‘वे’ यह जताना चाह रहे हों कि जिस तरह ‘वे’ इस पुलिस स्टेशन की एक धूल खायी मेज़ के दराज़ में बगैर किसी खता के ‘ताले चाभी’ से क़ैद हैं, उसी तरह उनका ‘वह मालिक’, जिसके हाथों में आकर वे तरह तरह के रंग बिरंगे जज्बातों की दिलकश तामीर किया करते थे, आज ‘उन्ही’ की ही तरह बगैर किसी खता और कसूर के जेल की सलाखों के पीछे ‘ताले चाभी’ की क़ैद में है ”

उसने एक ठंडी सांस भरी I हम लोग ख़ामोशी से रास्ता तय करते गए I

‘मुर्दाघर’ के गार्ड को हमारे पहुँचने की शायद पहले से ही खबर थी, तभी वह दरवाज़े पर चाभी लिए हमारी ही प्रतीक्षा में खड़ा था और जब उसे ‘कॉरोनर’ का ‘आज्ञा पत्र’ दिखाया गया तो उसने फ़ौरन ही दरवाज़ा खोल दिया और हम सभी एक साथ अन्दर आ गए I मगर अन्दर घुसते ही बीचो बीच एक मेज़ पर सफ़ेद कफ़न जैसी चादर में लिपटी लेटी हुई लाश, कमरे में व्याप्त अजीब सा भुतहा सन्नाटा, और वहां की हवा में रची बसी एक अलग सी बास ने मिलकर लगभग फ़ौरन ही स्टॉपफ़ोर्ड पर एक अलग सा  असर किया जिससे वह एकदम पीला पड़ गया और लगभग कांपती टांगों के साथ यह कहते हुवे बाहर चला गया कि वह बाहर गार्ड के साथ हमारा इंतेज़ार करेगा I

जैसे ही मैंने दरवाज़े को अन्दर से बंद किया, थार्नडाइक ने उत्सुकता से उस सफ़ेद चूना पुती, खाली सी ईमारत में चारों ओर निगाह दौड़ाई I एक झरोखे से सूरज की किरणें सीधे मेज़ पर सफ़ेद कपडे में लिपटी उस आकृति पर पड़ रही थी जो अब कैसी भी प्रतिक्रिया देने के लिए हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थी I झरोखे से ही आती हुई एक किरण भटककर दरवाजे के पास के उस कोने की तरफ बिछल गयी थी जहाँ एक कतार में कई खूँटियाँ लगी हुई थीं और एक मेज़ रखी हुई थी जिस पर मृतका के कपड़े वगैरह  रखे हुवे थे I

“ जर्विस, इस मेज़ और पास में इन खूंटियों पर टंगी इन बेज़ान सी चीज़ों में भी जिंदगी साँसे लेती दिखाई पड़ रही है, वे सभी मुझसे मुखातिब होकर कुछ कह रहे हैं, जिसकी धमक मैं अपने भीतर महसूस कर रहा हूँ, मगर लफ़्ज़ों में बयान नहीं कर पा रहा हूँ ” – थार्नडाइक ने कहा, जब हम उस कोने में खड़े थे जहाँ मृतका के शरीर से उतारे हुए कुछ कपड़े कतार में लगी हुई खूंटियों पर टंगे थे और कुछ वहीँ पास की एक मेज़ पर रखे हुए थे I

“ उस मेज़ पर पडी हुई वह बेहिस और खामोश लाश जितना कुछ बयाँ कर रही है, तो कहीं उतनी ही शिद्दत से ये सारी चीज़ें भी अपने भीतर के गहरे दुःख को मेरे सीने के भीतर छुपे जज्बातों के साथ मथ रही हैं I उस भड़कीले और फैशनेबल हैट की ओर देखो, उस कीमती स्कर्ट को तो देखो जो वहां टंगी है – कितनी दुःख में डूबी, सूनी सूनी, खाली खाली और उजाड़ सी पड़ी है; इन सजीले और सुरुचिपूर्ण अधोवस्त्रों की ओर देखो, जिन्हें इस वक़्त इस मुर्दाघर के गार्ड की बीबी ने बड़ी नफासत से सहेज कर रख दिया है, और मुझे उम्मीद है की इनके साथ वो खुली खुली सी सजीली मखमली जुर्राबें भी होंगी – इस वक़्त कितनी ग़मगीन और मुरझाई सी नज़र आ रही हैं कि कभी इनके भीतर एक भरा भरा और मखमल सा नाज़ुक, एक साँसे लेता हुआ वजूद,  हँसता मुस्कुराता अपनी पूरी हरारत के साथ लहकता था I देखो कितने दयनीय और भावपूर्ण तरह से ये सब एक उस वजूद की याद दिला रहे हैं – कभी जिसके स्त्रीत्व के अभिमान के ये भी एक अहम् हिस्से हुआ करते थे – एक मासूम, खुशमिजाज़ और अल्हड़ सी नदी की तरह बल खाती सी जिन्दगी के हिस्से – और देखो कितनी बेरहमी से सिर्फ पलक झपकते ही वह जिन्दगी छीन ली गयी – अभी थी…अब नहीं है I लेकिन जार्विस, हमें जज्बाती तो बिलकुल भी नहीं होना चाहिए क्यूंकि एक और जिन्दगी दांव पर लगी है, और हम उसके मुहाफ़िज़ हैं ” – वह जज्बाती हो उठा था, मगर संभल गया था…. और मैं ?…..मैं—- भौंचक्का सा खड़ा उसका मुँह देख रहा था I

उसने हैट को खूँटी पर से उतारा और हाथों में उलट पुलट कर देखा I यह महीन रेशमी कपडे पर फीतों और पंख की सहायता से बनाया गया एक बड़ा और चपटे किनारों वाली किस्म का ‘पिक्चर हैट’ था जिसके ऊपर गहरे नीले रंग के ‘झिलमिल सितारों’ से चमकीली सजावट का सघन काम किया गया था I हैट के किनारे के एक हिस्से में एक ‘दांतेदार और उधडा सा’ छिद्र हुआ पड़ा था जिसमे से हैट के हिलने डुलने से चमकीले सितारे भरभरा कर झड़ी की तरह बिखर रहे थे I

“ यह कुछ बायीं तरफ झुकाते हुए पहना गया होगा ” – थार्नडाइक ने कहा –“ क्यूंकि इसके सामान्य आकार और इसमें हुए इस छेद की मौजूदा स्थिति से यही जाहिर होता है ”

“ हाँ, लग तो यही रहा है ”- मैंने भी उसके अंदाज़े की तस्दीक की  – “ शायद बिलकुल उस तरह से पहना गया था जैसे ‘गैन्सबरो’ के पोर्ट्रेट में ‘डचेज़ आफ डेवोनशायर’ ने पहना हुआ है I”

“ एग्जैक्टली ”

उसने हैट को हिलाकर कुछ ‘सितारे’ अपनी हथेली पर गिराए और हैट को खूँटी पर वापस टांग दिया I हथेली पर गिरे उन सितारों को उसने एक लिफ़ाफ़े में डालकर उस पर ‘हैट से मिले’ लिखकर जेब में रख लिया I फिर आहिस्ता से वह उस मेज़ की ओर बढ़ा जिस पर मकतूला की लाश सफ़ेद चादर से ढंकी रखी थी I उसने निहायत ही मुलायमियत और पूरे सम्मान के साथ लाश के चेहरे पर से चादर सरकाई और उसकी ओर देखते ही उसके चेहरे पर गहन पीड़ा के भाव उत्पन्न हुवे I वह किसी की भी आँखों में देखते ही बस जाने वाला संगमरमर की तरह सफ़ेद एक सुन्दर चेहरा था जो अपनी अधखुली आँखों से और ख़ामोशी के लगभग जम चुके भावों के साथ उसकी ओर झाँक रहा था I उसके बालों की रंगत ताम्बे की तरह पीली थी I मगर इस पूरी सुन्दरता को एक लम्बे से जख्म के निशान ने हर सा लिया था जो दाहिने गाल पर आँख के नीचे से ठुड्डी की तरफ आधी खरोंच और आधे चीरे जैसी शक्ल में लम्बाई में फैला हुआ था I

“ खूबसूरत लडकी थी ” – थार्नडाइक ने अफ़सोस जताते हुवे कहा –“ एक काले बालों वाली खूबसूरत लडकी…..पता नहीं क्यूँ इसने अपने खूबसूरत बालों को इस तरह रंग कर ख़राब कर लिया था ” – वह उसके माथे पर बिखरे बालों में अपनी अंगुलियाँ फिराते हुवे बोला – “ उसने तकरीबन १० दिनों पहले ही अपने बालों की रंगत बदली थी क्यूंकि जड़ों के पास इस वक़्त लगभग चौथाई इंच बालों की रंगत काली नज़र आ रही है I इसके गाल पर बने इस निशान के बारे में तुम्हारे क्या ख्यालात हैं ?”

“ निशान देखकर तो यही लगता है कि गिरते समय वह कोच में किसी सीट के तेज़ और तीखे किनारे से टकरा गयी हो, मगर प्रथम श्रेणी की सभी सीट्स गद्देदार ही होती हैं, तो फिर पास में भला और ऐसा क्या हो सकता है ?” – मैंने कुछ कुछ उलझते हुए जवाब दिया – “ इसलिए यह अंदाज़ा लगाना मेरे लिए मुमकिन नहीं है कि असल में यह निशान आया कैसे ?”

उसने इस बात का कोई जवाब न दिया और मुझे अपनी नोटबुक देकर बोला – “ मैं जिस्म पर मौजूद चोटों और जख्मों को देखता हूँ और तुम वह सब कुछ नोट कर लो जो मैं बताऊँ”

मैंने उसके बताये हुवे विवरणों को नोट करना शुरू किया – “ खोपड़ी में बाएं कान के पिछली तरफ ऊपरी किनारे की ओर एक स्पष्ट झरोखेनुमा गोल छेद – व्यास १.४३८ इंच, सिर की पार्श्विका हड्डी (परायटल बोन) में ‘फ्रैक्चर’, सिर के अन्दर की सुरक्षात्मक झिल्ली में छेद, और मष्तिस्क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त, बायीं आँख के कोटर (ऑर्बिट) के किनारे से सिर की खाल उधड़ी हुई, घाव के किनारों पर महीन रेशम के कपड़े के रेशों और सितारों की मौजूदगी I

“ मेरे ख्याल से इतना काफी है…..और फिर बाकी की जानकारियों के लिए डा० मार्टन भी तो हैं….हम उनसे भी पूछताछ कर सकते हैं ” – मैंने सुझाया

उसने कैलिपर और स्केल को जेब में रखा और लाश के सिर में से दो तीन बाल उखाड़कर सितारों वाले लिफ़ाफ़े में डाल लिए I अगले कुछ क्षणों तक उसने लाश पर अन्य चोटों की मौजूदगी की तलाश करने की कोशिश की, मगर कहीं भी कोई अन्य चोट, खरोंच या जख्म का निशान न पाकर उसने लाश को फिर उसी सफ़ेद चादर से ढँक दिया और हम दोनों बाहर निकल गए I

जब हम मुर्दाघर से चले तो थार्नडाइक अभी तक खामोश था और गहरी सोचों में डूबा हुआ था मानो वह मन ही मन अब तक प्राप्त सभी जानकारियों को अपने दिमाग के भीतर सिलसिलेवार तरतीब दे रहा हो और इस ‘जिग्सा पजल’ जैसी घटना के बिखरे हुवे अन्य टुकड़ों को उनके सही खांचों में बिठाने की मशक्कत कर रहा हो I काफी देर तक उसे यूँ ही खामोश और गुम सा देखकर स्टॉपफ़ोर्ड से न रहा गया, वैसे भी वह कई बार उसके चेहरे की ओर कुछ बोले जाने की उम्मीद में ताक चुका था, लेकिन थार्नडाइक को कुछ भी बोलता न पाकर उसकी ये ख़ामोशी उसे अखर सी गयी थी – “ पोस्टमार्टम ३.०० बजे होगा, और अभी सिर्फ ११.३० ही बजे हैं, आप तब तक क्या करेंगे ?”

थार्नडाइक उसकी आवाज़ सुनकर अपनी अवस्था से बाहर आया और एकाएक बोला -“ अरे पोस्टमार्टम के ज़िक्र से मुझे याद आया कि मैं अपनी किट में ‘ओक्स – गाल’ तो लाना भूल ही गया हूँ I” [ ओक्स – गाल (ox – gall) – भूरे हरे रंग का एक तरल जो बैल या गाय के पित्त रस में अल्कोहल मिलाकर बनाया जाता है, और जिसका प्रयोग ‘वाटर कलर पेंटिंग’, ‘लिथोग्राफी’ वगैरह में गीलेपन को बरक़रार रखने के लिए किया जाता है – अनुवादिका ]

“ ओक्स- गाल !!!!! ” – मैंने लगभग चीखते हुए पूछा और मन ही मन इस चीज़ का ताअल्लुक किसी ख़ास ‘पैथोलॉजिकल टेस्ट’ से जोड़ने की नाकाम सी कोशिश की – “ अब भला ये क्या चीज़ है यार ? और इसकी जरूरत कहाँ पड़ गयी तुम्हे ? ” – लेकिन फ़ौरन ही मैंने अपने होंट काटे, क्यूंकि मुझे लगभग फ़ौरन ही याद आया की उसे मेरा इस तरह उसके तौर तरीकों के बारे में किसी के सामने मुँह फाड़ना कभी भी रास नहीं आता था I

उसने मेरी बातों पर ध्यान नहीं दिया था और स्टॉपफ़ोर्ड से पूछ रहा था – “ क्या यहाँ आसपास कोई पेंटर या ऐसी कोई दुकान वगैरह है जहाँ रंग और पेंटिंग वगैरह का सामान मिलता हो?”

“ इस छोटी सी जगह पर तो ऐसा कोई नहीं है, न ही ऐसी कोई दुकान ही है ” – स्टॉपफ़ोर्ड ने जवाब दिया – “ लेकिन अगर आपको ‘पित्त रस’ ही चाहिए तो यह तो आपको किसी ‘कसाई’ के पास भी मिल सकता है I वो देखिये सामने सड़क के उस पर कसाई की दुकान भी है”- उसने सड़क के पार एक दुकान की ओर इशारा किया जिसके ऊपर चमकदार सुनहरे अक्षरों में ‘ फेल्टन’ लिखा हुआ था I

“अगर उस कसाई के पास यह मिल भी गया, तो भी उसे इस्तेमाल के लायक बनाने के लिए मगजमारी करनी पड़ेगी I लेकिन देखो पहले यह मिले तो सही, क्यूंकि इसके बगैर मेरी गाड़ी अटक ही गयी समझो” – थार्नडाइक ने तेज़ी से सड़क पार करते हुए कहा

दुकान के पास एक व्यक्ति खड़ा था जिसने पूछने पर बताया की वही प्रोप्रराइटर था I थार्नडाइक ने उससे अपनी जरूरत बताई जिसे सुनकर वह बोला – “ पित्त रस ? नहीं जनाब, अभी तो इसका इंतेज़ाम करना मुमकिन नहीं है, लेकिन अगर आप दोपहर बाद तक इंतज़ार कर सकें तो मैं कुछ कर सकता हूँ”- फिर कुछ सोचकर वह बोला – “ लेकिन अगर आपको फ़ौरन ही इसकी जरूरत है तो आप कहें तो मैं अभी कुछ करता हूँ ”

वह आदतन एक खुशमिजाज शख्स था, थार्नडाइक चहक उठा – “ओह ! बहुत बहुत शुक्रिया आपका, लेकिन अगर आपको ज़हमत न हो तो क्या मैं एक निगाह उन जानवरों पर डाल सकता हूँ ? दरअसल मुझे जो चाहिए उसके लिए जानवर का बेहद तंदरुस्त होना जरूरी है ”

“ हाँ बिलकुल, मेरे पास मौजूद सभी जानवर बेहद तंदुरुस्त हैं, और मैं खुद ही उनकी देख रेख भी करता हूँ, फिर भी आइये आप भी देख लीजिये, इसमें ज़हमत की कोई बात नहीं ”

“ ओह ! एक बार फिर से आपका शुक्रिया, आपने मेरा काम एकदम आसान कर दिया है ” – थार्नडाइक ने गर्मजोशी से कहा – “ आप बस एक मिनट ठहरें, मैं बाजू की केमिस्ट शॉप से एक शीशी लेकर आता हूँ फिर आपके साथ चलता हूँ ” – कहकर वह तेजी से पास की एक केमिस्ट शॉप की ओर गया और लगभग फ़ौरन ही उलटे पांव एक सफ़ेद कागज़ के पार्सल के साथ वापस आया I कसाई अपनी दुकान के बगल से लगी हुई एक संकरी गली में ले गया जो आगे एक अहाते तक गयी थी I उस अहाते में एक छोटा सा बाड़ा बना हुआ था जिसकी छोटी सी जगह पर लगभग एक जैसे काले चमकदार बालों और लम्बे भूरे तकरीबन सीधे सींगों वाले तीन हृष्ट पुष्ट बछड़े बंधे हुए थे I

“ इसमें कोई दोराय नहीं कि यह सभी काफी तंदरुस्त दिखाई पड़ रहे है, मि० फेल्टन, आपने वाकई काफी अच्छे से देखभाल की है ”- थार्नडाइक ने बाड़े के नजदीक पहुंचकर किनारे से अन्दर की ओर लगभग झुकते हुए कहा I उसकी निगाहें खासतौर से बाड़े में मौजूद बछड़ों की आँखों और सींगों पर जमी हुई थी I बाड़े के सबसे नजदीक वाले जानवर पर ध्यान केन्द्रित करते हुए उसने पास में पड़ी एक छड़ी उठाकर उसके दाहिने सींग के निचले हिस्से पर हलके से थपकी देते हुए मारी और यही प्रक्रिया उसने बाएं सींग के साथ भी दोहराई – बछड़ा यूँ ही बगैर हिले डुले हतप्रभ सा खड़ा रहा I

“ सींगो का जाएजा लेकर काफी हद तक किसी जानवर की सेहत का अच्छी तरह अंदाज़ा लगाया जा सकता है ” – उसने अपनी इस अजीबोगरीब हरकत की वज़ह पेश की और दूसरे बछड़े की ओर अपना ध्यान आकर्षित किया

“ आप क्या मज़ाक कर रहे हैं, सर ” – फेल्टन ने आश्चर्य से कहा – “ जहाँ तक मुझे पता है जानवरों के सींग में ‘सेंस्टिविटी’ (संवेदनशीलता) होती ही नहीं है, भला सींग से किस तरह यह पता लगाया जा सकता है ? वो भी इस तरह छड़ी से ?

उसका कहना बिलकुल सही ही था क्यूंकि दूसरे बछड़े ने भी पहले वाले से कोई अलग हटकर अपनी प्रतिक्रिया न दी थी – जब थार्नडाइक ने अपनी छड़ी से उसी तरह दोनों सींगों पर चोट की थी – दूसरा बछड़ा भी बगैर हिले डुले चुपचाप खड़ा रहा  था I जाहिर था की सींगों पर हुई उस चोट का उसे कोई एहसास तक न हुआ था I

थार्नडाइक अब तीसरे बछड़े की ओर मुड़ गया और हम सब उत्सुकता के चलते बाड़े के बिलकुल नजदीक आ गये थे और तभी हमने देखा कि जैसे ही थार्नडाइक ने अपनी छड़ी से उसके दायें सींग पर हल्की सी चोट की तो वह बछडा फ़ौरन ही चिहुंककर पीछे की ओर हट गया, और जब उसके सींग पर दोबारा छड़ी से प्रहार हुआ तो साफ़ तौर पर स्पष्ट हो गया कि वह अब बुरी तरह से असहज हो उठा था I

“ अरे !!! ये भला कैसे हो सकता है ?” – फेल्टन की हैरत का ठिकाना न था, वह मुँह बाए उसी ओर ताक रहा था – “ ये बिलकुल नयी बात देख रहा हूँ, ये ऐसा क्यूँ कर रहा है ?”

थार्नडाइक ने अब बाएं सींग पर प्रहार करने हेतु छड़ी उठायी…बछड़ा फ़ौरन ही चौंककर पीछे की ओर हटा…उसकी पुतलियाँ भय से फ़ैल गयीं थीं, और वह हौले हौले ऐसे रंभा रहा था, मानो दर्द की अधिकता से कराह रहा हो I चेहरे पर खौफ़ और दर्द के भाव लिए वह अपना सर जोर जोर से इधर उधर हिला रहा था ….पीछे हटने के लिए अब उस बाड़े में जगह भी नहीं थी….थार्नडाइक अब बाड़े के किनारे पर लगभग भीतर की तरफ झूल सा गया था, और अब उस सींग का नजदीकी मुआइना कर रहा था, जिसकी इस अतिरिक्त संवेदनशीलता ने हम सबको हैरत में डाल रखा था I

“ यह ठीक तो है ?”- कसाई फेल्टन ने व्याकुल भाव से पूछा I शायद वह मन ही मन बछड़े को बीमार समझकर उसे अपने ‘पेशे’ में हुए ‘नुकसान’ के तौर पर ले रहा था I

“ अभी कुछ कहा नहीं जा सकता…हो सकता है कि अभी केवल सींग में ही दिक्कत हो…आगे कुछ कहने के लिए मुझे और भी जांचे करनी पड़ेंगी ”- थार्नडाइक ने जवाब दिया – “ अगर आप इस सींग को जड़ से काटकर मेरे पास होटल तक भिजवा दें तो मैं जांच करके कुछ बता सकता हूँ I तब तक मैं इसे पूरी तरह ढँक देता हूँ जिससे इस सींग पर दूसरी कोई नयी चोट चपेट न लग जाए …क्यूंकि सींग की जांच ऐसी ही हालत में करना बेहतर रहेगा जैसा यह इस वक़्त है ” – कहकर उसने केमिस्ट शॉप से साथ लाये पार्सल में से एक चौड़े मुँह वाली शीशी जिसपर ‘ओक्स – गाल’ लिखा एक स्टीकर चिपका हुआ था, ‘गटा पारचा पेपर’ की शीट, एक पट्टियों का रोल और सील करने के लिए ‘लाख़ की एक स्टिक’ निकाली और तकरीबन आधे से ज्यादा सींग को ‘गटा पारचा पेपर’ और ‘पट्टियों’ की मदद से मजबूती के साथ लपेटकर लाख़ स्टिक से सील कर दिया I

“ मैं इस सींग को आपके कहे मुताबिक़ निकालकर और इस शीशी में आपकी जरूरत का ‘सामान’ भरकर आधे घंटे के भीतर आपके होटल पहुँचता हूँ ”

वह अपने वादे का पक्का निकला I आधे घंटे बाद ही हम सब अपने होटल ‘ब्लैक बुल’ के ‘प्राइवेट रूम’ में थे और थार्नडाइक खिड़की से लगी एक छोटी मेज़ के पास बैठा था जिस पर एक अखबार बिछा हुआ था और उस पर फेल्टन का लाया सींग और थार्नडाइक का ‘ट्रेवलिंग केस’ रखा हुआ था जिसमे हमेशा तफ्तीश के काम आने वाले उपकरणों की एक किट मौजूद रहा करती थी I उस वक़्त मेज़ के बीचों बीच एक छोटा ‘माइक्रोस्कोप’ रखा हुआ था I फेल्टन करीब ही एक आर्मचेयर पर चेहरे पर गहन उत्कंठा के भाव लिए थार्नडाइक की रिपोर्ट के इंतज़ार में बैठा था I और मैं मि० स्टॉपफ़ोर्ड के साथ हंसी मजाक करते हुए उनके मन को बहलाने की कोशिशों में लगा था क्यूंकि वह चेहरे से काफी टूटे हुए और उदास से नज़र आ रहे थे I पता नहीं क्यूँ उन्हें हमारी इतनी कोशिशों के वाबजूद भी अपने भाई को बेगुनाह साबित कर पाने में संदेह सा हो रहा था I मैं बातचीत करते हुए नज़र उठाकर बार बार थार्नडाइक की ओर भी देखे जा रहा था I

उसने सींग पर से लपेटी हुई सारी पट्टियां और पेपर हटाये और सींग को कान के पास लाकर हौले हौले हिलाकर कुछ सुनने की कोशिश करने लगा, फिर एक लेंस की मदद से उसने पूरे सींग के हर कोने खुदरे का मुआइना किया I मैंने देखा कि उसने सींग के अगले नोकदार सिरे से कुछ खुरच कर एक शीशे की स्लाइड पर डाला, और उस पर कुछ बूंदे किसी तरल रसायन की डालकर ‘विशेष सुइयों’ की सहायता से उसे हिलाया डुलाया और स्लाइड को सावधानीपूर्वक माइक्रोस्क्रोप के नीचे रखकर उसका निरीक्षण करने लगा I एक दो मिनट वह ख़ामोशी से ऐसे ही स्लाइड को देखता रहा फिर एकाएक मेरी ओर गर्दन घुमाकर आश्चर्यमिश्रित आवाज़ में बोला – “ जल्दी आओ जार्विस, और देखो इसे ”

मैंने उत्सुकता से भरकर लगभग फ़ौरन ही माइक्रोस्कोप की ‘आई पीस’ में नज़रें गड़ा दीं I

“बताओ …क्या दिखाई पड़ रहा है ?” उसने पूछा

“ एक मल्टीपोलर नर्व कार्पसल ( बहुध्रुवीय तंत्रिका कण )…. काफी सूखे और अस्पष्ट से हैं मगर इसमें कोई शक नहीं कि मैंने पहचानने में कोई गलती की है ”

“ अब ये देखो ” – उसने स्लाइड को दूसरी जगह स्थिर किया

“ दो पिरामिडल नर्व कार्पसल (पिरामिडीय तंत्रिका कण) और किसी चीज़ के कुछ रेशे” – मैंने जवाब दिया I हालांकि स्लाइड में यह सब देखकर मुझे हैरत हो रही थी

“ अब ये भी बता दो प्यारे जार्विस, की ये कण जिस्म के किस अंग के ऊतकों के हिस्से हैं ?”

“ निःसंदेह …कार्टीकल ब्रेन सब्सटांस ” [ दिमाग के एक अहम् हिस्से में मौजूद नसों के जाल का एक हिस्सा ( कार्टिकल  – दिमाग का वह हिस्सा जो हमारी याददाश्त, विवेक, विचार, ध्यान, एकाग्रता, अनुभव शक्ति इत्यादि के सिलसिले में कार्य करता है I मोटे तौर पर सेरेब्रल कोर्टेक्स के किसी भी हिस्से को कार्टीकल रीजन कहा जा सकता है ) –अनुवादिका ]

“ मैं पूरी तरह सहमत हूँ मेरे दोस्त ” – उसने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा और मि० स्टॉपफ़ोर्ड की ओर मुड़ा –“ अब मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूँ कि यह केस अपने अंजाम तलक पहुँच चुका है और बचाव पक्ष पूरी मजबूती के साथ अपनी बात रख सकता है ”

“ भगवान् के लिए पहेलियाँ मत बुझाइए, क्या कहना चाहते हैं आप ? – स्टॉपफ़ोर्ड ने खड़े होते हुवे कहा

“ मेरे कहने का मतलब यह है कि अब हम यह साबित कर सकते हैं कि कहाँ और कैसे मिस ग्रांट की मृत्यु हुई I आप पहले बैठ जाइए मैं आपको पूरी बात समझाता हूँ ”- उसने स्टॉपफ़ोर्ड से कहा और फेल्टन की ओर देखते हुए कहने लगा – “ मि० फेल्टन आप भी बैठिये, शायद आपकी भी गवाही हेतु सम्मन जारी करना पड़े – तो बेहतर यही रहेगा कि हम पहले सभी उपलब्ध तथ्यों पर तबसरा कर लें और किसी नतीजे पर पहुंचे ”- उसने ठहरकर सबकी ओर देखा फिर सबका ध्यान अपनी ही ओर लगा पाकर कहना शुरू किया –

“ सबसे पहले मकतूला के जिस्म की बरामदगी के वक़्त उसकी स्थिति – वह फर्श पर गिरी पड़ी थी और उसके पैर दाहिने ओर के दरवाज़े के साथ लगभग सटे हुए थे – इस से यह पता चलता है कि जब वह गिरी थी तो वह उस दरवाज़े के पास या तो बैठी थी या फिर ज्यादा संभावना इस बात की है कि वह खड़ी थी I अगली चीज़ यह है ” – उसने जेब से मुड़ा हुआ कागज़ निकाला और उसमे से एक नन्हा सा ‘झिलमिल सितारा’ निकालकर दिखाया – “ यह उन्ही ‘सितारों’ में से एक सितारा है जिनका काम बतौर सजावट उस हैट पर किया गया था, और लिफाफे में ऐसे और भी हैं जो मैंने उस हैट से निकाले थे I यह जो ‘सितारा’ आप लोग देख रहे हैं, उसे मैंने कोच के निरीक्षण के दौरान पिछले सिरे पर मौजूद दाहिने पायदान से उठाया था, और वहां पर इसकी मौजूदगी यह साबित करती है कि किसी वक़्त मिस ग्रांट ने उस तरफ की खिड़की से सिर को बाहर निकाला था I

“ उपलब्ध तथ्यों और सुरागों में से अगला सुराग मैंने कोच के निरीक्षण के दौरान दाहिनी ओर की खिड़की के किनारे से पाया था जो उस हलके से पाउडर की महीन पर्त के छिडकाव के कारण खिड़की के किनारों पर उभर आये थे और खिड़की की चौखट से सवा तीन इंच की दूरी पर थे I

“ अब कुछ सुराग मकतूला के जिस्म से – खोपड़ी में हुआ घाव बाएं कान के पीछे की तरफ थोडा ऊपर हटके है जो मोटे तौर पर लगभग गोलाकार है और जिसका व्यास १.४३८ इंच है और एक सिर की खाल को उधेड़ते हुवे कट का निशान यहाँ से होकर बायीं आँख के पास तक गया है I दाहिने गाल पर एक लम्बाई में फैला हुआ और सवा तीन इंच लंबा एक खरोंचनुमा ‘कनटियूज्ड वुंड’ है I इसके अलावा पूरे जिस्म पर कहीं कोई चोट या खरोंच तक नहीं है I ”

“ मेरा अगला और सबसे अहम् सुराग यह है ” – उसने सींग को उठाकर उँगलियों से ठकठकाते हुवे कहा I वकील और फेल्टन दोनों ही मुँह बाए उसे देख रहे थे और दोनों के ही मुँह से कोई लफ्ज़ नहीं निकल रहा था I वे मंत्रमुग्ध से थार्नडाइक को सुने जा रहे थे जो अब कह रहा था – “ आप लोगों ने ध्यान दिया होगा कि यह बाँयां सींग है और आपको याद भी होगा कि उस बछड़े का यही सींग कुछ ज्यादा ही  संवेदनशील था I अगर इस सींग को जरा सी हरकत दी जाए तो इसके अंदरूनी हिस्से से फ्रैक्चर की आवाज़ को बड़ी आसानी से कान लगाकर साफ़ सुना जा सकता है I अब इसके नुकीले सिरे की ओर देखो जहाँ इसकी लम्बाई में ढेर सारी गहरी खरोंचे नज़र आ रही हैं, और जहाँ यह खरोंचे समाप्त हुई हैं, उस जगह का व्यास कैलीपर गेज़ के मुताबिक़ १.४३८ इंच है I इन खरोंचों के ऊपर कुछ सूखे खून के धब्बे भी दिखाई पड़ रहे हैं, और इसकी नोक के बिलकुल आखिरी सिरे पर अल्प मात्रा में सूखा हुआ एक अलग किस्म का तत्व जमा हुआ है जिसका परीक्षण आप लोगों के सामने ही मैंने और मेरे सहयोगी डा० जार्विस ने किया है और इस नतीजे पर पहुंचे थे की यह तत्व कुछ और न होकर ‘मस्तिष्कीय ऊतक’ के हिस्से हैं ”

“ हे भगवान् ! ” – स्टॉपफ़ोर्ड की हैरत में डूबी आवाज़ आई – “ कहीं आपका मतलब यह तो………..”

“ पहले मुझे अपनी बात खत्म करने दीजिये, मि० स्टॉपफ़ोर्ड,” – थार्नडाइक ने उसकी बात काटी

“ अब अगर आप सभी इस सूखे खून के धब्बे को ध्यान से देखेंगे तो पायेंगे की सींग के इस हिस्से में एक बाल भी चिपका हुआ है, जिसे लेंस से देखने पर उसकी जड़ के गाँठ जैसे फूले हुवे किनारे को भी देखा जा सकता है I यह एक सुनहरी रंगत का बाल है, लेकिन जड़ के पास यह काला है और कैलीपर गेज़ के मुताबिक बालों का यह काला हिस्सा महज़ ०.२१८ इंच ही लम्बा है I मेरे पास इस लिफ़ाफ़े में कुछ ऐसे ही बाल हैं जो मैंने मुर्दाघर में मकतूला के सिर से उखाड़ लिए थे – यह बाल भी सुनहरी रंगत लिए हुए हैं, जड़ों के पास काले हैं और जब मैंने इन बालों के काले हिस्से की माप ली तो यह भी ०.२१८ इंच ही लम्बे थे I और अब ये अंतिम सुराग ”-  कहते हुवे उसने हाथ में थमें उस सींग को पलट कर उल्टा कर दिया और वहां पर एक सूखे हुए खून के छोटे से धब्बे की ओर इशारा किया जिसमे एक नन्हा सा ‘झिलमिल सितारा’ चिपका हुआ था I

मि० स्टॉपफ़ोर्ड और वह ‘कसाई’ फेल्टन सकते की सी हालत में उस सींग को एकटक निहारे जा रहे थे I थार्नडाइक को खामोश होता देख स्टॉपफ़ोर्ड अपनी उस हालत से बाहर आया और एक ठंडी सांस भरते हुवे बोला – “ बिलाशक, यह सब सुनकर बहुत अच्छा लग रहा है और यह गुत्थी भी सुलझती दिखाई पड़ रही है और मुझे कुछ उम्मीद भी नज़र आ रही है, मगर मैं अभी तक हक्का बक्का हूँ और उलझन में हूँ…क्यूंकि अभी तक पूरा किस्सा मुझे समझ ही नहीं आया है ”

“ तो अब बचा ही क्या है ? पूरा मामला शीशे की तरह साफ़ है ” – थार्नडाइक ने जवाब दिया – “ भले ही हमारे पास यही कुछ थोड़े से सुराग हैं, मगर इन सुरागों के आधार पर जो मेरी थ्योरी है वो ऐन चौकस है, और उसमे गलती की सम्भावना न के बराबर ही है, मैंने अपनी ओर से यह केस हल कर लिया है I मैं आपको अपनी थ्योरी बताता हूँ, बेहतर है आप लोग खुद ही आकलन करें ”- कहते हुवे उसने एक सादे कागज़ पर एक कामचलाऊ स्केच सा बनाया और उस पर जगह जगह अपनी अंगुली रखते हुए बोला – “ जब ट्रेन ‘वोल्डहर्स्ट’ स्टेशन के पास पहुँचने ही वाली थी, तो उस वक़्त वहां के हालात कुछ इस तरह से थे – यहाँ पर ‘प्रथम श्रेणी’ का वह यात्री कोच था, यहाँ पर जलते हुवे पुवालों के ढेर थे, यहाँ पर ‘साइडिंग’ ( मालगाड़ी से सामान उतारने या ‘शंटिंग’ के काम में आने वाली पटरियां ) पर  ‘मवेशियों से भरी मालगाडी’ का वह डिब्बा था जिसमे इस सींग वाला बछड़ा था I अब मेरी थ्योरी यह कहती है कि उस वक़्त मिस ग्रांट दाहिनी तरफ वाली खिड़की से अपना सिर बाहर निकाले खड़ी हुई थीं और बाहर पटरियों पर जलते हुए पुवालों के ढेरों को देख रही थीं I उन्होंने चौड़े किनारों वाला अपना वह हैट पहना हुआ था जो उनके माथे पर बायीं तरफ झुका हुआ था और यही वजह थी कि जब उनका कोच ‘मवेशी वाले डिब्बे’ के नजदीक आया तो वह कुछ भी न देख पायी और यूँ ही सिर निकाले खड़ी रही I और फिर वह हो गया जिसके होने के इमकान भी न थे -” उसने एक दूसरा कागज़ लिया और उस पर  बड़ा सा एक नया स्केच बनाकर बोला – “ जैसे ही मिस ग्रांट मवेशी वाले डिब्बे के सामने आई, उसी वक़्त इस बछड़े ने अपने लम्बे सींगों को एक तेज़ झटके के साथ सलाखों से बाहर की ओर झटका I उस सींग की तीखी नोक ने खिड़की से बाहर सिर निकाले मिस ग्रांट के सिर में बाएं कान के पास जोरदार टक्कर मारी जिसके प्रभाव से उसका चेहरा पूरे वेग से खिड़की के किनारे जाकर टकराया और बछड़े के सींग छुड़ाने की कोशिश ने किसी ‘हल के धारदार फल’ की ही तरह सिर की खाल को उधेड़ डाला और इस झटके नें स्वयं बछड़े के इस सींग के अंदरूनी हिस्से में भी फ्रैक्चर कर दिया I पूरे वेग से खिड़की के किनारे से टकराने और बछड़े के सींग छुड़ाने से पैदा हुए झटके के ही चलते दाहिना गाल खिड़की के तीखे किनारों पर रगड़ गया जो मृतका के चेहरे पर दाहिने गाल पर ‘कांटियूज्ड वुंड’ की सूरत में नुमायाँ हुआ है I ये थ्योरी उपलब्ध तथ्यों और सुरागों के आधार पर सहज रूप से संभावित है क्यूंकि इसी थ्योरी में ही, उपलब्ध सभी सुराग अपने खानों में सही फिट बैठ रहे हैं I

वकील कुछ देर यूँ ही स्तब्ध बैठा रहा; फिर एकाएक उठा और भावातिरेक में थार्नडाइक का हाथ थामकर चूमने लगा “ मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि आपसे क्या कहूं –“ उसकी आवाज़ रूंध गयी और गला भर आया – “ बस इतना ही कहूँगा की आपने मेरे बेगुनाह भाई को क़त्ल की सजा पाने से बचाया, भगवान् उसका बेहतरीन सिला देगा आपको”

फेल्टन भी मुस्कुराते हुए उठ खड़ा हुआ – “ अब तो मुझे लग रहा है कि आपका ये ‘ओक्स –ग़ाल’ वाला चक्कर महज़ एक कोरा ब्लफ था, है न ?”

थार्नडाइक ने अपने होंटो पर एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ उसकी ओर देखा….फेल्टन ने भी खीसें निपोर दीं I

अगले दिन जब हम वापस लौट रहे थे तो हम चार थे – मेरी, थार्नडाइक और स्टॉपफ़ोर्ड की तिकड़ी में नया जुड़ा सदस्य हेरोल्ड स्टॉपफ़ोर्ड था I ‘कॉरोनर’ की ज्यूरी नें इस घटना को ‘दुर्घटनावश हुई मृत्यु’ का केस करार देते हुए तत्काल उसकी रिहाई के आदेश दिए थे और अब वह हमारे साथ बैठा पूरी एकाग्रता से थार्नडाइक का इस केस के बारे में विश्लेषण सुन रहा था I

“ तो आपने देखा,” – थार्नडाइक कह रहा था – “ हैलबरी पहुँचने से पहले ही ‘मृत्यु के कारण’ के सम्बन्ध में मेरे दिमाग में ६ संभावित थ्योरीज थीं बस यहाँ पहुंचकर मुझे इतना ही करना था कि तथ्य और सुराग के आधार पर अपनी ६ थ्योरीज में से कोई एक थ्योरी को चुनना था जिस पर उपलब्ध तथ्य और सुराग खरे उतरते I और फिर जब मैंने ‘साइडिंग’ पर खड़ी ‘मवेशियों वाली मालगाड़ी’ देखी जिसमे मि० फेल्टन के मवेशी थे, कोच के पास से वह ‘सितारा’ उठाया, हैट और उस पर हुए सजावट के काम को देखा, मकतूला के जिस्म पर हुए जख्मों को देखा और सबसे आखिर में जब उस बछड़े के अजीब से व्यवहार को देखा, तो सब कुछ दो जमा दो नतीजा चार निकालने जैसा काम था I

“ और क्या मेरी बेगुनाही की दुहाई पर कभी शक नहीं हुआ ?” – हेरोल्ड ने पूछा

थार्नडाइक ने अपने पूर्व क्लाइंट की ओर मुस्कुराकर देखा

“ तुम्हारे बनाये उस ‘स्केच’ और तुम्हारे पेंटिंग के साजो सामान को देखने के बाद से उस छाते में लगे लम्बे से नोंकदार कीले के बारे में कुछ भी कहने और सोचने को नहीं बचा था – थार्नडाइक ने जवाब दिया –“ और बतौर आलाए क़त्ल उसका तसव्वुर तो मैंने शुरू से ही नहीं किया था I”

मैंने खिड़की से बाहर देखा …मजदूरों का एक झुण्ड पटरियों के किनारे बिखरे पुवाल के ढेरों में आग लगा चुका था और बाहर अब धुवां फैलने लगा था I

© Saba Khan

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‘The House of Three Candles’ – By Erle Stanley Gardner, Hindi Translation – By Saba Khan

मूल कथा – एर्ल स्टैनले गार्डनर
हिंदी अनुवाद – सबा खान
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वह ‘लव आफ लॉयल्टी’ नाम की एक चौड़ी सी सड़क थी जिसे उस केंटन शहर को आधुनिक बनाने के चलते शहर के भीड़ भाड़ वाले इलाके से गुज़ार दिया गया था I उस चौड़ी सी सड़क के अगल बगल की गलियाँ बस कभी कभार ही उस सड़क पर ऑटोमोबाइल्स और रिक्शों का रेला सा उड़ेलती थीं, लेकिन हकीक़त तो ये थी कि इन गलियों के पिछली तरफ घुसने पर टिनकैन में ठसाठस भरी सारडाइन मछलियों की तरह इंसानों के झुण्ड के झुण्ड भरे पड़े थे I

मूल कथा – एर्ल स्टैनले गार्डनर
हिंदी अनुवाद – सबा खान
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वह ‘लव आफ लॉयल्टी’ नाम की एक चौड़ी सी सड़क थी जिसे उस केंटन शहर को आधुनिक बनाने के चलते शहर के भीड़ भाड़ वाले इलाके से गुज़ार दिया गया था I उस चौड़ी सी सड़क के अगल बगल की गलियाँ बस कभी कभार ही उस सड़क पर ऑटोमोबाइल्स और रिक्शों का रेला सा उड़ेलती थीं, लेकिन हकीक़त तो ये थी कि इन गलियों के पिछली तरफ घुसने पर टिनकैन में ठसाठस भरी सारडाइन मछलियों की तरह इंसानों के झुण्ड के झुण्ड भरे पड़े थे I
इसी तरह ‘स्ट्रीट आफ द वाइल्ड चिकन’ नाम की वह सड़क थी जिसकी चौड़ाई केवल इतनी थी कि उस पर से केवल एक रिक्शा ही गुजर सकता था I ये दोनों ही सड़कें आगे चलकर जिस जगह पर एक दुसरे को काटती थीं उसके १०० फीट के दायरे के भीतर ही ‘तिएन मह होंग’ नाम की एक गली जैसी कदरन संकरी सी सड़क थी जिसके नाम का अगर तर्जुमा किया जाए तो माएने है – ‘अभ्र अश्व वीथिका’ या ‘आसमानी घोड़े की गली’ I यह गली इतनी संकरी थी की इस पर से होकर न केवल रिक्शे का गुजरना असंभव था, बल्कि चौड़े किनारे वाले हैट पहने दो मुसाफिरों को भी एक साथ गुजरने पर अपने सरों को झुकाना पड़ जाता था ताकि हैट की किनारे एक दूसरे से रगड़ न खा जाएँ I
इस गली में स्थित तकरीबन सभी मकानों की बालकनियाँ और खिड़कियाँ सीधे इस ‘अभ्र अश्व वीथिका’ नाम की गलीनुमा सड़क की ओर ही खुलती थीं, जिसके कारण उन मकानों के निवासियों की जिंदगियां पूरे अन्तरंग ब्योरों के साथ उघडी पड़ी रहती थीं जो कि कदरन कम भीड़ भाड़ भरे वाले इलाके में या किसी सुसंस्कृत पाश्चात्य समाज में एकदम कल्पनातीत हैं I रात में उस गली से होकर बिसाती और फेरीवाले भेड़ियों के चिल्लाने जैसी ऊंची आवाजों में चिल्लाते हुवे या कभी कभार डुगडुगी बजाते हुवे गुजरा करते थे I
लियुंग फः उस गली से अपनी ‘कुली क्लास’ की शालीनता और स्वाभाविकता के अनुसार निगाहों को झुकाए गुजरी I हमेशा की तरह उसका चेहरा उस वक़्त भी मुकम्मल तौर पर भावहीन था जिसे देखकर कोई भी मानव स्वभाव का कुशलतम विद्वान् यह बता पाने में पूर्णतया असमर्थ होता की उस वक़्त उसके दिमाग के हर कोने खुदरे में किन विचारों का आवागमन हो रहा है I अभी एक महीने से भी कम समय पहले की बात थी जब उसने एक बच्चे को जन्म दिया था और उस फटे चीथड़े से गूद्ड़े में लिपटे, बगैर बाप के बच्चे को अपनी छाती से चिपटाए घूमा करती थी जो न केवल उसके संपूर्ण जीवन की ख़ुशी, स्नेह का प्रतिनिधित्व करता था बल्कि उसके मातृत्व भाव और ममता का केंद्र भी था I
लेकिन फिर वह एक काली रात आई जब चारों ओर चीखती चिल्लाती साईरन की आवाजें गूँज रहीं थीं, डरे सहमे, भयाक्रांत चीखते चिल्लाते नगरवासी हड़बड़ाये, बौखलाए से अपनी जान बचाने को इधर उधर भागते फिर रहे थे I वातावरण में एयरप्लेन इंजन की वो मनहूस आवाजें अपने पीछे तबाही और बर्बादी का एक मंज़र छोड़कर अब असंख्य मशीनी मधुमक्खियों की भिनभिनाहट में बदल गयीं थीं I
हालांकि इन हालातों में किसी सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर जाने का विकल्प चुनना आसान है, लेकिन कैंटन की वो गलियां इतनी संकरी थीं की जान बचाने को दौडती इस भीड़ का एक साथ उन गलियों से होकर किसी सुरक्षित स्थान की तलाश में निकल जाना नामुमकिन ही था और सबसे बड़ी और दुखदायी बात ये थी की कोई भागकर जाता भी तो कहाँ ? क्योंकि दरअसल वहां कोई सुरक्षित स्थान था भी नहीं और उस पर चीन के अतिआक्रामक रवैय्ये नें भी हवाई हमले के विरुद्ध किसी भी प्रकार के सुरक्षा उपायों को अपनाने की दिशा में मुश्किलातें खड़ा करने में कोई कसर भी न छोड़ी थी I मृत्यु अपने कई क्रूरतम रूपों से कोहनियों के बल उठंगी हो सबका उपहास उड़ा रही थी I जब सुरक्षा उपायों को लेकर इस कदर लोगों के हाथ पांव कटे हुवे हों तो भला कोई कैसे मृत्यु के किसी प्रतिष्ठित रूप को गले से लगाने की सोच भी सकता था ?
आसमान से गिरते ओलों की ही तरह शहर पर बम पर बम बरसते जा रहे थे I छिटपुट प्रतिरोध के तौर पर कहीं कहीं एंटी एयरक्राफ्ट गन्स गरज के साथ अपनी मौजूदगी जरूर दर्ज करा रही थीं और कभी कभार किसी कोने खुदरे से आती मशीन गन्स की तड़तड़ाहट भी फिजाओं में गूँज उठती थी I लेकिन एक ऐसा शहर जिसे ऐसे किसी भी हमले के बारे में दूर दूर तक कोई अंदेशा न हो, उसके द्वारा इस अकस्मात हुवे हमले के विरोध में उठाये गए कमज़ोर से प्रतिरोध को पूरी तरह रौंदते हुवे दुश्मन के जहाज़ पूरी बेरहमी से मौत का नंगा नाच किये जा रहे थे I
आसमान से लगातार बरसती इस मौत के नंगे नाच से बचकर भागती लियुंग ने एक मां की तीव्र मातृत्व वृत्ति के चलते उस नवजात मासूम को अपने दुर्बल शरीर की ढाल बनाते हुवे छाती से भींच रखा था, मानो अपने जिस्म के मांस और हड्डियों की इन परतों से इस तरह उस नर्म, नाजुक से वजूद को ढांप लेना मात्र ही इस “सभ्य” युद्ध विभीषिका के विरुद्ध सुरक्षा हेतु पर्याप्त उपाय हो I जमीन एक के बाद एक उठने वाले धमाकों के चलते डोल उठी थी, चारों ओर भयंकर अफरा तफरी का माहौल था I लोग इधर से उधर चीखते चिल्लाते अपने बच्चों, अपने परिजनों को लिए भाग रहे थे और तभी अचानक लियुंग के चारों ओर एक धमाके के साथ, उधडी लकड़ियों की किरचें और खपचियों के साथ साथ धूल तथा ईंट रोड़े के मलबे का बड़ा गुबार सा बिखर गया और उसे एक तीव्र झटका सा लगा I गुबार की वजह से उसे कुछ पलों के लिए कुछ भी सुझाई न पडा की क्या घटित हो गया था, मगर जब उसने अपनी आँखों को साफ़ करके छाती में सिमटे उस नन्हे, नाजुक से मासूम बच्चे को देखा, तो एक पल के लिए वह सवेंदनाशून्य सी हो गयी फिर एक गहरे दुःख और तीव्र वेदना से भर कर चीख उठी I
लियुंग के इस नवजात शिशु जो कि एक बेटी थी, के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी I पति न होने के कारण ही उसने उस बिन बाप की बच्ची को एक रहस्य की तरह ही सबकी निगाहों से पोशीदा रखा था; और शहर के सबसे निम्न और गरीब इलाके में वहाँ अस्थायी तौर पर असंख्य की तादाद में बसे खुद में डूबे लोगों के बीच रहा करती थी I एक वजह ये भी थी जो उसने पूरी कामयाबी से इस रहस्य पर पर्दा डाला हुआ था क्यूंकि इस इलाके के लोग साथ साथ रहने के वाबजूद खुद की परेशानियों में इस कदर डूबे हुवे रहते थे की किसी को किसी की कोई खबर ही न रहती थी I
इन्ही सब कारणों के चलते उसके बच्चे को लेकर उसके साथ हुई घटना, उसकी पीड़ा, उसकी तकलीफ, और उसके इस नुक्सान के बारे में किसी को भी कोई अंदाजा न हुआ I और तबसे वह रात दर रात अपने चेहरे पर एक भावहीन मुखौटा सा लगाये शहर की भीषण उमस, गर्मी और बदबू में लिथड़ी बेज़ार, बेहिस और बेजान हुई सी अपने काम के लिए इधर उधर डोलती फिरती थी I
साम सेउह एक ऐसा शख्स था जिसके दाहिने हाथ में केवल तीन अंगुलियाँ थीं, और आँखों में धूर्तता की सियाही रक्स किया करती थी जो किसी सांप की लिजलिजी जीभ की तरह अपनी कटोरियों में अबाध रूप से घूमती रहती थीं I अक्सर लियुंग जब अपने काम काज के सिलसिले में इधर उधर आया जाया करती थी तो हमेशा वह साम की धूर्त निगाहों के केंद्र में होती थी I मगर कभी लियुंग ने इस ओर ध्यान दिया था या नहीं, यह कभी उसने जाहिर ही न होने दिया था I हाल फिलहाल लियुंग में आई तब्दीली के चलते वो निहायत ही फिक्रमंद हो उठा था और तरह तरह के सवाल उसके दिमाग को मथते रहते थे – ‘आजकल वो कुछ सुस्त, उदास और अनमनी सी नज़र आती है, क्या वह बीमार है ? अब वो पहले की तरह हंसती भी नही है, न ही सुबह सबेरे तडके कहीं आते जाते में ठहरकर अन्य लड़कियों के साथ ऊंची आवाज़ में गपशप करती है, क्या उस पर रुपये पैसे को लेकर कोई माली दुश्वारी आन पड़ी है, या फिर उसकी रोजमर्रा की ज़रूरियातों और अखराज़ात के लिए उसकी कमाई काफी नहीं है ? ……तमाम तरह के इन सवालातों से जूझते साम की तीखी निगाहों ने अर्थपूर्ण ढंग से सामने से चली आ रही लियुंग का मुआइना किया I उसे लियुंग के चेहरे से कोई भी अंदाजा न हो सका I ‘मुमकिन है की वह बीमार है और उसे किसी तरह के इलाज़ की सख्त जरूरत हो’ – सोचते हुवे साम ने लियुंग को एक बार फिर गहरी निगाहों से देखा फिर उसकी ओर बढ़ गया I
चूंकि लियुंग फः ने उससे कभी किसी भी विषय पर कैसी भी कोई बातचीत न की थी, तो कुछ कहने सुनने का कोई सवाल ही नहीं था I अक्सर इधर उधर जाते हुवे लियुंग ने यूँ ही सरसरी तौर पर ही देखा था, तो उसने साम की बातों को भी चुपचाप अनदेखी के भाव से और सुनकर भी अनसुना कर देने सी लापरवाही जैसे रवैय्ये से तवज्जोह दी I दरअसल उसकी रूह भी कहीं भीतर गहरे में वेदना की अधिकता से इस कदर सुन्न सी पड़ गयी थी जिसके चलते वो अब रातों में उठ उठ कर किसी नींद में चलने वाले व्यक्ति की तरह ही बेहिसी और बेलौसी के आलम में एक रूह की मानिंद भटकने वाली शै बनकर रह गयी थी I उसे यूँ निश्चल और खामोश देखकर साम सेउह की हिम्मत थोड़ी बढ़ गयी और उसने बात आगे बढ़ाई – “क्या तुम्हे कुछ पैसों की जरूरत है ? ढेर सारा पैसा – सोने के रूप में ? चीन में चलने वाले ये कागज़ के रुपये नहीं, बल्कि सोना जो तुम्हे न केवल आत्मनिर्भर बना सकता है, बल्कि इस मशक्कत और मोहताजी भरी ज़िन्दगी से छुटकारा भी दिला सकता है I और फिर इसे पाना भी बहुत आसान है, फकत इक दियासलाई की तीली भर जलाना है ” – और साम सेउह ने अपनी कही बातों के मर्म को स्पष्ट करने की मंशा से अपनी कलाईयों को झटकते हुवे एक दियासलाई की तीली को जला दिया और होंठों पर एक रहस्यमयी मुस्कान ओढ़े दूसरी ओर बढ़ गया I और पीछे बैठी वह ठगी सी ये सोचती रह गयी थी की शायद ये मामला यहीं खत्म हो गया है I
उसी रात, जब वह शहर के एक संकरे रास्ते से होकर जा रही थी, तो उसका मस्तिष्क निरंतर चिंतित भाव से साम सेउह की बातों को मुसलसल संजीदगी से सोचे जा रहा था ………..
कैंटन एक अस्थिर और कभी न सोने वाला शोरगुल भरा शहर है I गर्मियों के महीनो में आधी रात के बाद, शुरुवाती कुछ घंटों में ऐसे भी क्षण आते हैं जब रोजमर्रा के जीवन की हलचल में एक हल्का ठहराव सा आ जाता है, मगर ये ठहराव पाश्चात्य सभ्यता के रंग में रचे बसे लोगों को नाममात्र के लिए ही महसूस होता है I चीन के बड़े शहरों में लोग शिफ्ट में सोते हैं क्यूंकि वहां इतने लोगों को एक साथ एक ही वक़्त में आराम करने एवं सोने हेतु घरों में पर्याप्त कमरे तक नहीं हैं I वे लोग जो ‘आफ शिफ्ट’ होते हैं, गलियों में इधर उधर घूमते रहते हैं और जैसा की कहा जाता है की ‘चीनी लोगों के कान’ शोर के प्रति अभेद्य होते हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह ‘चीनी नासापुट (नथुने)’ गंध के प्रति उदासीन से रहते हैं – तो बाहर गलियाँ भी शोरयुक्त होती हैं और बातचीत का गुलगपाड़ा भी बगैर किसी रोक टोक के जारी रहता है I
सुबह का झुटपुटा फ़ैल रहा था – एक धुंधला और आर्द्र झुटपुटा, जो उस शहर की अपनी दीवारों के भीतर पनपती , खुद की बजबजाती और ठहरी हुई सी उमस भरी जिंदगी से पनपे माहौल – मच्छर, उमसदार एवं तपती हुई गर्मी, चिपचिपाता पसीना, और वे कुछ विशेष गंध जो चीन के वातावरण में हर सू छितराई हुई सी हैं – को एक नयी उमस के साथ अतिरिक्त उष्णता प्रदान कर रहा था I
साम सेउह अकस्मात् उसके सामने आ खड़ा हुआ I
“तो फिर क्या सोचा तुमने ?” उसने लियुंग की ओर अपलक देखते हुवे सवाल किया – “क्या तुम्हे वह सोना चाहिए ?”
मन ही मन किसी फैसले पर पहुँचते हुवे लियुंग ने स्पष्ट आवाज़ में सिर्फ इतना कहा – “ हाँ मैं दियासलाई जलाने के लिए तैयार हूँ ”
“आज रात ही ७ से ९ बजे के दरमियान अभ्र अश्व वीथिका में स्थित उस मकान में आकर मिलो जो ‘तीन मोमबत्तियों’ वाले घर के नाम से मशहूर है I दरवाजा खोलकर सीधे सामने की सीढियां चढ़कर ऊपर आ जाना” – साम ने उसकी आँखों में झांकते हुवे आदेश सा दिया I
सकते की सी हालत में कुछ पशेमानी के साथ लियुंग अभ्र अश्व वीथिका की तरफ भारी क़दमों से मुड़ गयी I उसकी आँखें मुकम्मल तौर से भावहीन थीं जैसे किसी बेहिस से लकड़ी के पुतले में कील दी गयीं हों…………………………….
शाम जल्द अज जल्द गुजरने वाली थी और रात ने अपने सुरमई पंख पसारने शुरू कर दिए थे I लियुंग अभ्र अश्व वीथिका में दाखिल हो चुकी थी I बायीं तरफ के घर में एक लड़की मशीनी आवाज़ वाला ‘चीनी हार्प’ बजा रही थी I उस से १० कदम पीछे ही एक फेरीवाला ऊंचे सुर में आवाज़ लगाता फिर रहा था I जहाँ वह खड़ी थी उससे तकरीबन ५० फीट की दूरी पर सामने की ओर, एक परिवार बालकनी से जलते हुवे पटाखे फेंककर बुरी आत्माओं को तितर बितर करने की कोशिश में लगा हुआ था I
लियुंग ने कुछ पलों के लिए ठहरकर इधर उधर निगाहें फिराईं फिर थके क़दमों से आगे बढ़ी, उसने पास ही जल रहे उस अलाव का घेरा काटा जिसमे नकली कागज़ के रुपये, एक पालकी की मॉडलनुमा छोटी अनुकृति, तथा पुतले के रूप में गुलामों को जलाकर अग्नि के ज़रिये पूर्वजों की आत्माओं से मिलन हेतु भेजा जा रहा था I तीन मोमबत्तियां गर्म रात की उस भारी हवा में फुटपाथ की पटरी पर फडफडा रही थीं I लियुंग उस मकान तक पहुँची और दरवाजा खोलकर सामने नज़र आ रही सीढियां चढ़ गयी I आगे सिर्फ अँधेरा ही था, सिर्फ अँधेरा जिसके कालेपन में वहां मौजूद हर चीज़ ने अपना वजूद खो सा दिया था I उसने हाथों से टटोलकर एक और दरवाज़ा तलाश किया और उसमे प्रवेश कर गयी I कमरे में प्रवेश करते ही उसे फ़ौरन एहसास हुआ कि वहां कुछ दूसरे लोग भी मौजूद थे I वह उनकी साँसों की आवाजें सुन सकती थी, उनके जिस्मों की बेचैन जुम्बिशों को, उनके कपड़ों की सरसराहटो को और कभी कभार एक दबी सी खांसी की आवाज़ को महसूस कर सकती थी I कमरे में कहीं एक घडी ने टनटनाकर याद दिलाया कि ‘ऑवर आफ द डॉग’ ( चीनी राशिचक्र मान्यतानुसार शाम ७ बजे से ९ बजे का समय ) समाप्त होने वाला था और ‘ऑवर आफ द बोर’ (चीनी राशिचक्र मान्यतानुसार रात्रि ९ बजे से ११ बजे का समय ) शुरू ही होने वाला था I वह ठीक समय पर ठीक जगह आ पहुंची थी I साम ने उसे खासतौर से ताकीद की थी की ‘आवर आफ द डॉग’ के आखिरी क्षणों में उसे वहां होना था I वह आँखें फाड़ फाड़कर कमरे में देखने की कोशिश कर रही थे तभी साम सेउह की अँधेरे में गूंजती आवाज आई – “ आओ सभी लोग अपनी आँखें बंद करें और अंधे हो जाएँ I जो कोई भी अपनी आँखें खोलेगा उसे झूठा और उसकी नीयत को सवालिया अंदाज़ में देखा और समझा जाएगा I केवल एक ही व्यक्ति को उन लोगों पर नज़र रखने का कार्य सौंपा गया है जो यहाँ इस कमरे में इकट्ठे हैं I तांक झाँक करने शख्स को गर्म लोहे से दागा जायेगा, ताकि जो कुछ भी उन्होंने देखा है और नाफ़रमानी के तौर पर जो सजा उन्हें मिली है वो उनके दिमागों में पैवस्त होकर रह जाए” I
लियुंग, अपने घुटनों को भीतर की तरफ मोड़े अपनी आँखों को भरपूर कोशिशों से पूरी तरह बंद किये फर्श पर बैठी थी और उसे पूरी शिद्दत से एहसास हो रहा था कि लोग कमरे में चारों ओर फिर रहे हैं और एक फ़्लैशलाइट की तीखी रौशनी जो कि हर चेहरे पर चुभ सी रही थी, की सहायता से वहां मौजूद लोगों के चेहरों का मुआइना भी किया जा रहा है I उसे अपने गालों के पास तीखी गर्माहट सी महसूस हो रही थी जिससे उसने ये अंदाज़ा लगाया की हाथों में गर्म लोहा लिए वो व्यक्ति उसके नजदीक ही खड़ा था जो उन लोगो से उस गर्म लोहे को छुवा देने को तैयार बैठा था जो अतिउत्सुकता के चलते कोई भी हिमाकत करने की जुर्रत कर बैठते I
“ओह, यह तो बिलकुल मेरे ख्वाबों की ताबीर जैसी है,” – कमरे में अचानक एक फुफकारता सा गूंजा I
“नहीं, वह मेरी है” साम सेउह की आवाज़ ने उत्तर दिया, इसी के साथ उसकी बंद पलकों पर पड़ने वाला प्रकाश भी हट गया और गर्म लोहे की तपिश भी अब उससे दूर हो चुकी थी I
तभी अचानक उसने एक तीखी चीख के साथ, तपते हुवे लोहे की सनसनाहट, और किसी इंसान की दर्द में डूबी कराह के साथ साथ फर्श पर धप्प की आवाज़ के साथ कुछ गिरने का स्वर सुना I लेकिन उसने अपनी आँखें फिर भी नहीं खोली I चीन में, जीवन की कोई कीमत नहीं थी I
काफी देर बाद वहां उस ख़ामोशी की मौजूदगी का अंत हुआ जो किसी के चीखकर गिरने के तुरंत बाद वहां फ़ैल सी गयी थी, जब कमरे में साम की प्रभावशाली आवाज़ गूंजी – “अब आप अपनी आँखें खोल सकते हैं ”
लियुंग ने अपनी आँखें खोली I कमरा अब भी अन्धकार की अधिकता से काला ही था I उसने कई बार अपनी पलकें फड़फड़ाई और आँखों को मलते हुवे अन्धकार में दीदे फाड़कर देखने की नाकाम कोशिश की I
“पौ फटने से कुछ ही पलों पहले” – कमरे में साम की आवाज़ फिर गूंजने लगी – “आसमान में बहुत सारी मोटरों के गरजने की आवाज़ सुनाई पड़ेगी I आप में से प्रत्येक को एक लाल ‘फ्लेयर’ ( तेज रौशनी के साथ धमाका उत्पन्न करने वाली एक प्रकार की आसमानी फुलझड़ी ) और माचिस दी जाएगी I आप में से प्रत्येक को धीमे स्वर में उस स्थान का नाम बताया जायेगा जहाँ उस लाल फ्लेयर को रखना है I जब आप मोटर के गरजने की आवाज़ सुने तो आप लोग उस फ्लेयर के ऊपर इस तरह दुबक के बैठ जायेंगे मानो डर से घुटनों के बल जमीन पर बैठ गए हों I जब मोटर शहर के पूर्वी किनारे की तरफ पहुँच जाए, तब आप लोग हाथों में माचिस थाम लोगे I वहां आपकी इन हरकतों को देखने वाला कोई भी नहीं होगा I क्यूंकि वहां पर मौजूद आसपास के सभी लोग सिर्फ अपनी और अपने परिवार की हिफाज़त को लेकर ही फिक्रमंद और पशेमान होंगे I जब वे जहाज़ सर के ऊपर आ जाएँ, ठीक उसी वक़्त आप लोग फ्लेयर्स में आग लगा दोगे, और लगभग फ़ौरन ही वहां से निकलकर इस स्थान पर वापस लौटोगे I आप सबको ढेर सारा सोना मिल जायेगा I ताकीद रहे की यहाँ जल्द अज जल्द वापस लौटना निहायत ही जरूरी है I बमबारी दिन निकलने से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी I अतः आप सबको बमबारी समाप्त होने से पूर्व ही यहाँ हाज़िर होना है I आपको आपका सोना इंतेज़ार करता मिलेगा I किसी भी तरह की हड़बड़ी और दिमागी तवाज़न के सही तौर पर काम न करने की स्थिति में आप सभी नदी की ओर भागेंगे I वहां एक नाव इंतज़ार कर रही होगी और फिर उन हालातों में ये निहायत ही पुख्ता और जरूरी एहतियाती कदम होगा कि आप कुछ समय के लिए छुप जाएँ, क्यूंकि बहुत बड़े पैमाने पर सरगर्मी से खोजबीन की जायेगी I बाहर जासूस हैं जो हम पर नज़र रखते हैं, और आप में से कोई भी अपने पास से इतना सारा सोना बरामद होने की सूरत में सही मायनों में कोई भी जायज़ वजह न सुझा सकेगा I इसलिए ऐसी सूरतेहाल में यही सही होगा कि आप तब तक छुपे रहें जब तक कि आपको हमारी तरफ से कोई पक्की खबर न मिले या कोई दूसरा काम न सौंपा जाए” – इतनी देर तक बोलते रहने के बाद साम की आवाज़ कुछ देर के लिए ठहर सी गयी और कमरे के भीतर एक बार फिर ख़ामोशी का दौर आ गया, जो केवल लोगों के इधर उधर हिलने डुलने से पैदा हुई आवाजों एवं दबे स्वर में दिए जा रहे आदेशों से भंग हो रहा था I लियुंग ने अपने हाथों में एक गोल लकड़ी जैसी वस्तु का सरकाया जाना महसूस किया I कुछ ही क्षणों बाद, माचिस का एक बॉक्स भी उसकी अँगुलियों के दरमियान फंसा दिया गया I एक आदमी उसकी तरफ झुका, इतना करीब की उसकी आवाज़ महज़ साँसों की सरसराहट के ज़रिये उसके कानों में कुछ कह रही थी – “ सार्वजनिक सुरक्षा आयुक्त का घर” I
लोगों की चहलकदमी अब पूरी तरह थम गयी थी और उस कमरे में एक बार फिर साम की आवाज़ गूंजने लगी थी – “जाइए और जाकर अपने निर्धारित स्थान पर प्रतीक्षा कीजिये और सौंपे गए काम को कामयाबी से अंजाम देकर जल्द यहाँ आइये और बदले में ढेर सारा सोना ले जाइए I अतिरिक्त सुरक्षा के चलते आप लोग यहाँ से पांच पांच मिनट के अंतराल पर एक एक करके निकलेंगे I निकास द्वार पर एक व्यक्ति आप सबकी निकासी सुनिश्चित करेगा I कमरे में किसी भी तरह का कोई उजाला न होगा और न ही आप लोगों के दरमियान एक दुसरे से कोई बातचीत होगी” I
लियुंग उस घुप्प अँधेरे में उन अजनबियों के बीच एक ओर खड़ी, माहौल में अब तक पूरी तरह रच बस गयी पसीने की तीखी बदबू से परेशान बार बार पहलू बदल रही थी I कमरे में रह रहकर उसे फुसफुसाहट भरे स्वर में आदेश सुनाई पड़ते थे और हर फुसफुसाहट के फ़ौरन बाद सामने का दरवाज़ा खुलता था और उस संकरी सीढ़ियों से होकर कोई एक व्यक्ति इस दमघोंटू माहौल से निकलकर नीचे गली की कदरन खुली हवा और ताजगी भरे माहौल में निकल जाता था I
काफी देर बाद उसकी बारी आई I नीचे गली में आकर वह कुछ देर तक लम्बी लम्बी साँसे लेती रही फिर अपने चेहरे पर हमेशा मौजूद रहने वाली भावहीनता के साथ आगे बढ़ी, लेकिन उसने उस गली को पार करने की कोई कोशिश नही की और केवल उस स्थान तक गयी जहाँ मृत आत्माओं हेतु भेंट चढ़ाई जा रही थी I अलाव की राख अब भी उस संकरी गली में सुलग रही थी जो आवारा हवाओं के झोंकों से इधर उधर चिंगारियों की शक्ल में उड़ती फिर रही थीं I सामने के मकान में कुछ हलचल सी थी, लियुंग जानती थी कि इस घर में शोकाकुल लोग होंगे जिन्होंने इस यक़ीन के साथ आज सारी रस्में की थीं की उनके ऐसा करने से ही उनके पूर्वजों की आत्माओं को उस लोक में शान्ति मिली होगी I वो उस मकान के सामने कुछ देर ठिठकी खड़ी रही फिर कुछ सोचकर सीढियां चढ़कर ऊपर पहुँची जहाँ उसे मन्त्रों की आवाज़ सुनाई पड़ी I एक मेज़ के चारों तरफ सात ‘नन’ इकट्ठे बैठी थीं जिन्होंने सर घुटाये हुवे थे I दूसरी मेज़ पर, एक तेल से जलने वाला लैंप फडफडा रहा था जिसके प्रकाश में शायद उनके किसी पूर्वज की पेंटिंग जगमगा रही थी, जो अब अपने पूर्वजों की कतार में शामिल हो गया था I मेज़ पूरी तरह भेंट में चढ़ाई जाने वाली वस्तुवों से भरी हुई थी I कमरे में उन ननों के अलावा तकरीबन २० अन्य लोग भी थे जो रुक रुक कर प्रार्थना में अपने सुर लगा रहे थे I लियुंग बगैर कोई आवाज़ किये दबे पाँव प्रार्थना में शामिल हो गयी I जब उसे इस बात का यक़ीन हो गया की वहां मौजूद लोगों में से किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया था तो वो चुपचाप उन सीढ़ियों की तरफ बढ़ गयी जो सीधे छत की ओर जाती थीं I छत खुली खुली सी थी, और आधे घंटे की मशक्कत के बाद वह तीन मोमबत्तियों वाले उसी मकान की छत पर वापस पहुँच चुकी थी जहाँ अभी कुछ ही देर पहले वो अँधेरे में अन्य कई लोगों के साथ मौजूद थी I उसने छत पर एक छुपने जैसी जगह तलाश की जो एक अँधेरा कोना था और वहां छुप कर बैठ गयी I उसके दिमाग में कई विचार एक साथ उथल पुथल कर रहे थे जिसकी शिद्दत उसके चेहरे पर लगातार आ जा रहे भाव से ही ज्ञात हो रही थी I लेकिन उसने फ़ौरन ही उन पर काबू पा लिया था और अब उस छत के अँधेरे कोने में वही लियुंग बैठी थी जिसका चेहरा हमेशा पत्थर की तरह बेहिस और आँखें भावहीन सी रहा करती थीं I रात लगभग बीत चुकी थी और झुटपुटा अपने पैर पसारने लगा था I लियुंग ने पूर्व दिशा की ओर कान लगाकर कुछ सुनने का प्रयत्न किया I कुछ पलों तक उसे रात की ख़ामोशी और हवा की सायं सायं के सिवा कुछ भी न सुनाई पड़ा, फिर अचानक एक विचित्र सी ध्वनि भी उस सायं सायं में शामिल हो गयी जो बिलकुल ऐसी थी मानो कहीं सुदूर पहाड़ों पर बिजली की कड़कड़ाहट हुई हो, एक ऐसी कड़कड़ाहट जो किसी अपशकुन के आगमन के संकेत की तरह थी I और देखते ही देखते पूर्व दिशा से उठने वाली कड़कड़ाहट अब लगातार एक तरह की गरज में बदल गयी थी जो पल पल तीखी और तीव्र होती जा रही थी I उसे नीचे गली में लोगों के चीखने चिल्लाने की आवाजें सुनाई पड़ने लगीं, उन छोटे बच्चों, दुधमुवों का चिढ़चिढ़ाहट भरा क्रन्दन सुनाई पड़ने लगा जो उनके अभिभावकों द्वारा घबराहट और भय के कारण सोते से उठा दिए गए थे I लियुंग अब भी छत पर अविचल सी बैठी थी I जहाज़ अब सरों के ऊपर आ गए थे और शहर में जहाँ तहां चमकीले लाल फ्लेयर्स रक्तिम आभा लिए सुर्ख लहू के तालाब में खिल से उठे थे I और जहाँ जहाँ यह फ्लेयर चमक उठते थे वहीँ पर एक शत्रु जहाज़ किसी परकटे पंक्षी की तरह हवा में गोते लगाता नीचे की ओर तेजी से बढ़ता था और कुछ ही क्षणों बाद रात्रिकालीन आकाश में किसी विशालकाय मशरूम की शक्ल में लपटों का एक गुबार सा उग आता था जो बाद में एक ऐसी प्रतिध्वनी उत्पन्न करता था जिससे शहर की बुनियादें तक हिल जाती थीं I लियुंग छत के किनारे की तरफ रेंग गयी जहाँ से वो नीचे गली में झाँक सकती थी I नीचे अफरा तफरी का माहौल था और तभी उसने एक रहस्यमयी आकृति को गुप्त रूप से तीन मोमबत्तियों वाले मकान के द्वार से होकर जाते देखा I उसके कुछ ही देर बाद एक भारी भरकम जिस्म वाली एक आकृति, लगभग दौड़ते हुवे गली को पार करके तीन मोमबत्तियों वाले मकान के द्वार पर आकर लुप्त हो गयी I उसने सर उठाकर आसमान की ओर निहारा, जहाज़ अब बिलकुल सरों के ऊपर आ गये थे I लियुंग ने अपने लाल फ्लेयर वाले बॉक्स को छत पर रखा और कागज़ को फाड़ दिया I उसने पूरी शान्ति और पूरी कुशलता के साथ माचिस जलाई और फ्लेयर को आग दिखा दी I रक्तिम आभा युक्त लाल रौशनी के तालाब में आसपास के सभी घरों की छत रोशन हो उठी और लगभग उसी के साथ लियुंग भी एक छत से दूसरी छत पर होते हुवे भाग खड़ी हुई I अभी उसे दौड़ते हुवे कुछ ही सेकंड हुवे थे, तभी एक विशालकाय जहाज़ सर के ऊपर प्रकट हुआ और आसमान से दहाड़ते हुवे नीचे की ओर आ गिरा I पूरी गली इस विस्मयकारी विस्फोट के प्रभाव से थरथरा उठी I लियुंग भी झटके से अपने घुटनों के बल आ पडी, उसे अपने कानो के परदे फटते प्रतीत हुवे, उसकी आँखें इस भयंकर विस्फोट के फलस्वरूप उत्पन्न हुवे दबाव की अधिकता के चलते अपनी कटोरियों से फट पड़ने को प्रतीत हुईं I और फिर सब कुछ खामोश सा हो गया, चीखो पुकार की आवाजें, जहाजों की गड़गड़ाहट, सभी कुछ धीरे धीरे अपनी आवाजें खोने लगीं और फिर उसे कुछ भी न सुनाई पड़ा I
जब उसे होश आया तो उसे अपने शरीर में दर्द की तीखी लहरें सी उठती महसूस हुईं, उसने उठने की कोशिश की मगर फ़ौरन ही उसे दर्द से लेट जाना पड़ा I उसकी एक टांग जख्मी हो गयी थी I दिन निकल आया था और माहौल में अब कोई गड़गड़ाहट न थी I उसने अपने जिस्म की बची खुची ताकत को इकठ्ठा किया और उठकर लंगडाते हुवे गली से बाहर आई और दर्द से कांखती, कराहती उस स्थान की ओर बढ़ी जहाँ तीन मोमबत्तियों वाला मकान स्थित था I पूरी गली खत्म हो चुकी थी और उसके स्थान अब एक बहुत बड़ा खड्डा था जो की मलबे और जलकर काले पड़ चुके इंसानी शरीरों से पटा पड़ा था I एक ऐसा ही काला धड़ लगभग उसके क़दमों के पास ही पड़ा था I उसने उसकी तरफ देखा तो फ़ौरन ही उसे एहसास हो गया की साम सेउह का बस यही एक हिस्सा बचा था I वह अभ्र अश्व वीथिका के परली तरफ लंगडाते हुवे मुडी, उसकी नज़रें झुकी हुईं थीं और चेहरा भावहीन था मानो किसी कलाकार ने लकड़ी के बुत के चेहरे को पूरी नफासत और कामयाबी से तराशा हो, मगर चेहरे पर जरूरी भाव तराश पाने में नाकामयाब रहा हो I
सूरज पूर्व दिशा में अब पूरी तरह से उग आया था और पूरा कैंटन दिन के उजाले में रोशन हो उठा था और इसी के साथ कैंटन के निवासी जो कि लम्बे समय से अपने बनाने वाले के द्वारा अपने हिस्से में दी गयी सिर्फ और सिर्फ मृत्यु की बेरहम मौजूदगी के चलते अभ्यस्त हो चुके थे, वो मृत शरीरों और मलबे की साफ़ सफाई हेतु तैयार थे ताकि उनकी दिनचर्या का कभी न टूटने वाला अनवरत सिलसिला फिर से शुरू हो सके I जिंदगी की वो रोजमर्रा की उधेड़बुन फिर से साँसे ले सके I कुछ लम्हों या फिर कुछ दिनों या फिर कुछ महीनो के लिए ही सही, ये जिंदगी कुछ देर मुस्कुरा तो सके I
लियुंग ने भी अपने दर्द से दुखते कन्धों पर बांस का जुवा उठा लिया I एक तीखी दर्द की लहर उसके कन्धों से लेकर कूल्हे तक दौड़ गयी, लेकिन उसने अपने दांत भींचे रखे I मुख़्तसर ही सही, अभी बहुत जिन्दगी बाकी थी, और जब जिन्दगी बाकी थी तो बहुत से अधूरे काम भी बाकी थे और उन अधूरे कामों को उसे ही सरअंजाम देना था I भूख थी जिसके लिए काम भी करना था I उसने एक बार फिर सर उठाकर आसमान की ओर निहारा, सूरज चढ़ आया था I आसमान पर पंक्षियों का दिखना शुरू हो गया था जो कतार बांधे एक दिशा में उड़े जा रहे थे I लियुंग ने कंधे पर रखे बांस को मजबूती से थामा फिर लंगडाते हुवे क़दमों मगर मजबूत हौसलों के साथ आगे बढ़ गयी I उसका चेहरा एक बार फिर भावहीन था I
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पुस्तक समीक्षा #2 : सिंह मर्डर केस – रमाकांत मिश्र

 

singh

Reviewed By : – SABA KHAN

कोई भी काम खासतौर पर लेखन कर्म जब अपनी पूरी तैयारी और ईमानदार कोशिशों से परवान चढ़ता है तो उसका मकसद भी पूरी शिद्दत से कामयाब होता है I लिखना एक जटिल प्रक्रिया है और इस लिखने के दौरान एक गंभीर लेखक को न केवल अपने पात्रों की मनःस्थिति से जूझना पड़ता है बल्कि निरंतर खुद के भीतर उमड़ घुमड़ रहे अनगिनत विचारों की क्रमवार श्रृंखलाओं से भी दो चार होना पड़ता है I और इस होती निरंतर उथल पुथल का प्रभाव रचना पर पड़ना स्वाभाविक है I रहस्य, जासूसी तथा अपराध कथा लेखन ने समय के साथ साथ खुद के लेखन में नयी नयी शैलियाँ, नए नए Narrative Style भी विकसित किये हैं I और इस लेखन में भी न केवल भाषा बल्कि अन्य कई रचनात्मक स्तरों पर भी गंभीर प्रयास किये गए हैं I और लगातार हुवे इन प्रयोगों, कथन शैली तथा प्रस्तुतीकरण ने पाठकवर्ग को और भी ज्यादा सजग बना दिया है I जिसके चलते इस तरह के लेखन में कोई भी लेखक बड़े बड़े दावे करने के वाबजूद खुद को इस विधा के लेखक के रूप में इतनी आसानी से नहीं स्थापित कर सकता और अगर उसका लेखन सिर्फ सतही जानकारियों पर ही आधारित हो और औने पौने से ही काम चला लेने की मनःस्थिति से युक्त हो तो ये काम और भी ज्यादा मुश्किल है I एक अच्छी अपराध तथा रहस्य कथा की कामयाबी की बुनियाद इन्ही कुछ तथ्यों के इर्द गिर्द ही रहती है और एक काल्पनिक रचना होने का तमगा लिए हुवे भी वास्तविकता के पहलूवों से उसकी निकटता पाठकवर्ग से खुद को जोड़ने में उतनी ही कामयाब रहती है I

इस विधा का अंग्रेजी भाषा में लेखन का परिदृश्य न केवल आरंभिक समय से बल्कि वर्तमान में भी हर स्तर पर नितांत समृद्ध भी है और समर्थ भी I भारतीय सन्दर्भ में भी कमोबेश यही स्थिति है –जहाँ एक ओर इस विधा के लेखन में अंग्रेजी भाषा में लगभग हर दुसरे या तीसरे महीने में एक नया लेखक उभर रहा है और पाठकों के बीच अपनी जगह बना रहा है, तो दूसरी ओर हिंदी भाषा में एक दो बड़े लेखकों को छोड़कर ( वो भी जो कई दशकों से इस विधा के लेखन में रत हैं ) कोई नया चेहरा उभर कर नहीं आ रहा है I और ये स्थिति तब है जबकि अंग्रेजी भाषा में भारतीय लेखकों की इस विधा में लेखन की भागीदारी पिछले कई वर्षों के मुकाबले हाल ही में तीव्र गति से बढ़ी है I ऐसी स्थिति में जब कोई नया लेखक अपराध और रहस्य कथा के तमगे के साथ अपने पहले उपन्यास को लेकर हिंदी भाषा में ऐसा कोई प्रयास करते हुवे पाठकों के बीच आता है तो उस पर ध्यान आकर्षित होना लाजिमी है I

चंद दिनों पहले सोशल प्लेटफॉर्म्स के जरिये एक नवोदित लेखक रमाकांत मिश्र लिखित “ सिंह मर्डर केस “ नाम के अंग्रेजी टाइटल वाले हिंदी भाषा में आने वाले उपन्यास के विज्ञापन पर नजर पड़ी तो मन में उत्सुकता का भाव पैदा हुआ और पढ़ने की इच्छा भी बलवती हुई I

उपन्यास हस्तगत होते ही मन में बहुत ही अच्छा भाव पैदा हुआ I टाइटल कवर बहुत आकर्षक बन पड़ा है और निश्चित तौर पर इस कवर आर्ट के लिए ‘ हनुमेंद्र मिश्र ‘ बधाई के पात्र हैं ( शायद लेखक से किसी पूर्व परिचय या सम्बन्ध के कारण की गयी अतिरिक्त मेहनत का नतीजा हो ) I प्रकाशक सूरज पॉकेट बुक्स ने इस उपन्यास की प्रूफरीडिंग, पेपर क्वालिटी, पैकेजिंग और मुद्रण में मेरे द्वारा पूर्व में समीक्षित उपन्यास “ एक हसीन क़त्ल “ के मुकाबले पूरी व्यावसायिकता का परिचय देते हुवे आश्चर्यजनक तौर पर सुधार किया है I कुछ स्थानों पर प्रूफ संबंधी त्रुटियाँ अवश्य हैं लेकिन उनके द्वारा इस दिशा में निरंतर किये जा रहे प्रयास निकट भविष्य में किसी भी समीक्षा में स्वयं को इस आधार पर आँका जाना नहीं पसंद करेंगे, ऐसी आशा है I अभी तक किताबों पर बार कोड भी नहीं आ रहा है, इसका कारण भी समझ में नहीं आया I बहरहाल बधाई के पात्र हैं इस पुस्तक के साथ ‘सूरज पॉकेट बुक्स’ I

कुल १७६ पृष्ठों की इस किताब में कहानी का फैलाव १६६ पृष्ठों में है जो १६ अध्यायों में बंटी हुई है I  मूल्य १९९ रुपये जो की इस किताब की गुणवत्ता, इसके स्टैण्डर्ड साइज़ और औसतन ३० पंक्तियाँ प्रति पृष्ठ के मद्देनज़र बिलकुल वाजिब है I

प्रथम पृष्ठ पर आल्हा की पंक्तियाँ “ जाके बैरी सन्मुख जीवे I ताके जीवन को धिक्कार I I “ काफी कुछ इस उपन्यास के कथ्य का आभास दे जाती हैं I पुस्तक की भूमिका श्री जीतेन्द्र माथुर द्वारा देखकर अच्छी अनुभूति होती है वो न केवल एक सफल समीक्षक हैं बल्कि एक विद्वान् एवं सफल लेखक भी हैं और भूमिका में भी उन्होंने अपनी विद्वता और गुणग्राह्यता का परिचय दिया है I

कहानी की शुरुवात होती है एक नृशंशतापूर्ण क़त्ल से ( एक रहस्य कथा का आगाज़ इस से बेहतर क्या हो सकता है ! ) I लखनऊ में डी० एस० पी० प्रशांत सिंह के युवा पुत्र समर्थ सिंह के विवाह का अवसर है, हर्षोल्लास का वातावरण है I समर्थ सिंह अपने दोस्तों को विदा करने बाहर आता है और विदा करके ठिठक कर पोर्टिको में खड़ी मंगनी में प्राप्त पज़ेरो को देखने लगता है तभी अचानक पजेरो स्टार्ट होती है और उस पर चढ़ जाती है I इस से पहले लोग कुछ समझ पाते पजेरो तीन बार समर्थ सिंह को कुचलती है और ठहर जाती है I लोग अन्दर से जब तक बाहर पहुचते हैं तब तक हत्यारा फरार हो चुका होता है I

चूंकि मामला पुलिस मशीनरी के आला उच्चाधिकारी के बेटे के क़त्ल का था लिहाज़ा ऊंचे स्तर पर जांच पड़ताल होती है और नतीजा न निकलने पर केस सी० बी० आई० के होनहार चतुर अधिकारी मदन मिश्र के हवाले कर दिया जाता है I

उपरोक्त स्टोरीलाइन के इर्द गिर्द ही पूरा कथानक रचा गया है जिसे पढ़ते हुवे पाठक खुद को उन पात्रों और घटनाओं के मध्य उलझता और घटनाओं के प्रवाह में बहता चला जाता है I कथानक २०१४ से शुरू होता है और फिर पीछे जाता है I अंत में उस समय तक जाता है जहाँ इस कथानक की जड़ें हैं -१९९८ तक I फिर २०१५ में समाप्त हो जाता है I उपन्यास का संपूर्ण कथानक यू० पी के कई जिलों से लेकर मध्य प्रदेश, मुंबई, उत्तराखंड, दिल्ली, अहमदाबाद, तक फैला हुआ है I इस स्तर पर लेखक ने न केवल अपनी कुशल लेखन कला के बल्कि विषय तथा संपूर्ण भारतीय पुलिस तंत्र, उसका चरित्र, उसकी कार्यशैली, उसकी बारीकियों पर अपनी तीखी पकड़ का परिचय दिया है I इस तंत्र की हर बारीकी को लेखक ने भली भांति अपने अन्वेषण और अध्ययनोंपरांत अपने लेखन के मूलकथ्य का हिस्सा बनाया है जिसके कारण उपन्यास की न केवल रोचकता बढ़ी है बल्कि कथानक वास्तविकता के और भी निकट प्रतीत होता है I उपन्यास अपने अंतर में एक साहित्यिक स्पर्श का सुखद अनुभव सा प्रदान करता हुआ चलता है I कभी हिंदी साहित्य के जानेमाने  लेखक और रागदरबारी जैसी कालजयी रचना के लेखक श्रीलाल शुक्ल नें “ आदमी का ज़हर” नामक एक रहस्य कथा उपन्यास लिखा था I हालांकि उनका ये प्रयोग उस वक़्त बुरी तरह नकारा गया था लेकिन अपने लेखन और शैली में वो पूरी तरह सफल था I कुछ इसी तरह का एहसास ये उपन्यास पढ़ते हुवे होता है जिसका मुख्य कारण इसकी समृद्ध साहित्यिक हिंदी युक्त भाषा भी है I लेखक ने हिंदी के क्लिष्ट शब्दों के प्रयोग से दूरी रखी है फिर भी आम लेखकों के मुकाबले विशुद्ध हिंदी का प्रयोग किया है जिसमे सटीक शब्द चयन और जरूरत पड़ने पर प्रचलित कहावतों का प्रयोग उसे और समृद्ध बनाती है I

उपन्यास अपनी narrative form के चलते एक Hardboiled Mystery ना होकर मूल रूप से एक Softboiled Thriller ही बनकर रह गया है जिसमे रहस्य का पहलू Secondry है और भावनात्मक पहलू का चित्रण प्रभावी रूप से उभर कर आया है जिसे लेखक नें इस तरह से रचा है की पाठक पढ़ने के बाद कहीं से खुद को ठगा जाना महसूस नहीं करता है I बशर्ते इसे इस जिद के तहत न पढ़ा जाए की एक मर्डर मिस्ट्री ही पढ़कर उठना है I

लेखक ने कथा को कहने के लिए जिस Cut to Back तथा Cut to Forth और फ्लैशबैक तकनीक का प्रयोग किया है उसको साधकर कथा के प्रवाह में बगैर रुकावट आये और पाठक की एकाग्रता को भंग किये बगैर प्रयोग करना किसी भी नवोदित लेखक के लिए मुश्किल कार्य है, मगर रमाकांत मिश्र नें ये काम किसी हद तक सफलतापूर्वक किया है I ये बात दूसरी है की इस तकनीक के प्रयोग ने ही एक अच्छी और लाजवाब बन सकती ‘Police Procedural रहस्य कथा’ को एक बेहतरीन Thriller के दायरे तक ही सीमित कर दिया है I तकनीक ही है जिसकी वजह से पाठक को पढ़ते हुवे घटनाओं की तारतम्यता और timeline को लेकर अतिरिक्त सजगता की आवश्यकता पड़ती है और कहीं कहीं पीछे जाकर पन्ने पलटना पड़ सकता है और पढ़ते पढ़ते उलझना भी पड़ सकता है I

उपन्यास का सबसे कमज़ोर पहलू उसकी Timeline का बिलकुल सटीक ना होना है I लेखक नें क्यूँ इसके लिए सरलीकरण का सहारा लिया वो समझ से परे है I महीनो के नाम के स्थान पर ऋतुओं का प्रयोग कहीं से भी तर्कसंगत नहीं लगा I और इसी सरलीकरण के चलते एक घटना विसंगति सी होने का आभास देती है – अध्याय ८ में जिसकी timeline २०१३ शरद से –वर्ष २०१४ शरद तक यानी पूरे एक वर्ष की दी है और वहां पर जिस घटना का जिक्र है उसके अंतर्गत एक डायलाग “ मैं तो बस गुरुप्रताप के ही करंट लगा पाया “ है I ये करंट लगाने वाली घटना अध्याय 4, वर्ष २०१४ – बसंत- में घटित होती दर्शाई गयी है I अध्याय ८ की घटना से ये तुरंत स्पष्ट नहीं होता की उस वक़्त जो घटना घटित होती दिखाई जा रही है वो २०१३ में हो रही है अथवा २०१४ में ? हालांकि इस घटना के बाद पिछले साल घटित हुई घटनाओं का संक्षिप्त सार सा है मगर औसत बुद्धि पाठक के लिए ये स्पष्ट होना मुश्किल ही है I बसंत २०१४ की घटना ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से मार्च से मई के दरमियान कभी भी घटित हुई हो सकती है और २०१३ शरद से २०१४ शरद की घटनाएँ सितम्बर से नवम्बर २०१३ से लेकर सितम्बर –नवम्बर २०१४ के मध्य कभी भी घटित हुई हो सकती हैं I तार्किक आधार पर बसंत २०१४ में हुई घटना इस समयसीमा के अंतर्गत आ गयी I मगर जिस तरह वहां पर दर्शाया गया है उसके आधार पर समझना मुश्किल हो जाता है एक बार में I बेहतर होता की ऋतुओं के स्थान पर हिंदी महीनो के नाम होते या अंग्रेजी में I ये इस उपन्यास का सबसे बड़ा कमजोर पक्ष है I

Flashback और Cut to Back and Forth तकनीक का प्रयोग करने के स्थान पर लेखक नें अगर १९९८ की घटना को आरम्भ में बतौर पूर्वकथा के तौर पर प्रयोग करते हुवे Linear Sequence में मदन मिश्र का उपयोग करते हुवे कहानी को आगे बढ़ाया होता तो एक लाज़वाब Police Procedural सामने होता I उपयोग की गयी तकनीक के आधार पर एक सधा हुआ लेखन तो है उक्त उपन्यास में मगर कोई भी किरदार उभरकर सामने नहीं आया I उपन्यास समाप्त होने के बाद एक अलग ही अनुभूति और संतुष्टि का अनुभव होता है मगर पात्र विस्मृत हो जाते हैं और कथा ही स्मृति में कहीं जगह बना पाती है I उपन्यास समाप्त होकर एक भावुक मोड़ पर छोड़ जाता है जहाँ हर चीज़ सही ही प्रतीत होती है और आरम्भ में लिखी आल्हा की पंक्तियों को जस्टिफाई करती हैं I बेहतर होता की चरित्रों और पात्रों को थोडा और खुलकर सामने आने का अवसर मिलता I मदन मिश्र प्रभावित करते हैं मगर स्मृति का अंग बनकर रह जाएँ उतना भी नहीं I इन दोनों तकनीकों का बेहतरीन प्रयोग जिस प्रकार Sue Coletta के उपन्यासों में देखने को मिलता है उसकी छोटी सी झलक ‘ सिंह मर्डर केस ‘ में भी नजर आती है हालांकि इस उपन्यास का कैनवस Sue Coletta के उपन्यासों जैसा विस्तृत नहीं है I लेकिन एक हिंदी लेखक के लेखन में उक्त की एक झलक भी दिख जाना अपने आप में सुखद है I

कुल जमा “ सिंह मर्डर केस “ के लेखक के रूप में हिंदी अपराध लेखन को एक नया लेखक मिला है जिसकी कलम में दम है और खुद को पढ़वा ले जाने की काबिलियत भी I उन्होंने उमीदें जगाई हैं I आशा है निकट भविष्य में कुछ और भी बेहतर पढ़ने को मिले I फिलहाल एक पढ़ने योग्य किताब I मेरी तरफ से 4 स्टार रेटिंग I

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Singh murder caseSingh murder case by Ramakant Mishra
My rating: 4 of 5 stars

कोई भी काम खासतौर पर लेखन कर्म जब अपनी पूरी तैयारी और ईमानदार कोशिशों से परवान चढ़ता है तो उसका मकसद भी पूरी शिद्दत से कामयाब होता है I लिखना एक जटिल प्रक्रिया है और इस लिखने के दौरान एक गंभीर लेखक को न केवल अपने पात्रों की मनःस्थिति से जूझना पड़ता है बल्कि निरंतर खुद के भीतर उमड़ घुमड़ रहे अनगिनत विचारों की क्रमवार श्रृंखलाओं से भी दो चार होना पड़ता है I और इस होती निरंतर उथल पुथल का प्रभाव रचना पर पड़ना स्वाभाविक है I
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रहस्य कथा लेखिकाएं-Frances Crane

frances crane

जासूसी और रहस्य कथाओं के लेखन के सिलसिले में जब विश्व साहित्य पर गौर किया जाए तो ये देखकर ताज्जुब होता है की इस विधा के लेखन में न केवल वर्तमान समय में बल्कि अपने आरम्भ से ही महिलाओं की भागीदारी और कामयाब भागीदारी की एक लम्बी फेहरिस्त है I जहाँ एक ओर कुछ महिला लेखकों और उनके किरदार दोनों ने मकबूलियत हासिल की तो दूसरी ओर ऐसी महिला लेखकों की भी तादाद कम नहीं जहाँ वक़्त के धुंधलाते पन्नो ने उस लेखिका के वजूद को तो अपने दिनों दिन पीले पड़ते जाते पन्नो में समेटकर गुमनामी की अँधेरी खोह में धकेल दिया I लेकिन उनकी कलम ने अपनी तासीर से जिन किरदारों को पैदा किया था उनकी लेखन जगत में दमदार मौजूदगी नें बार बार अपने वजूद की नुमाइश के लिए आते वक़्त तक दस्तक जारी रखी और देर सबेर ये दस्तक किसी न किसी के कानों को सुनाई भी पड़ी और उन गुमशुदा किरदारों के वजूद को अपना खोया हुवा सुनहरा दौर भी मयस्सर हुवा ! कुछ भी लाफ़ानी नहीं इस जहाँ में, और जो फानी है वो भी वक़्त की किस चाल की साजिश के सदके कुछ ऐसा कर गुज़र सा गया जो इस फानी और लाफ़ानी के दरमियान के बारीक फर्क को तर्क करके अपने किरदार को पैदा कर खुद तो फानी दुनिया की हकीकत से दो चार होकर गुज़र गया और पीछे अपने पैदा किये किरदार की शक्लो सूरत में एक लाफ़ानी सा वजूद दे गया I जिस पर भले ही गफलतों के सिलसिले तारी रहे, आने वालों के हुजूम के चंद लोगों को छोड़कर भले ही पूरा हुजूम उन्हें न पहचाना लेकिन उनका लाफ़ानी होना ही एक दिन उन्हें उसी पूरी शिद्दत से चमका गया I

साल २००४, Rue Morgue Press के Tom और Enid Schantz को ऐसी ही एक दस्तक सुनाई दी थी उन किरदारों की जो अपने वक़्त के न केवल अजब अनोखे किरदार थे बल्कि अपनी पैदाइश के साथ ही इस विधा में छा गए थे I ये किरदार थे Jean Holly और Patt Abbott जो की उस दौर में सबसे कामयाब प्राइवेट इन्वेस्टीगेटर्स की शादीशुदा जोड़ी थी और १९४१ से १९६५ के दरमियान अपने कुलजमा २६ कारनामों और उपन्यासों से जासूसी संसार में दमदार तरीके से अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहे थे I गाहे बगाहे आज भी जब कभी उस दौर के कुछ मशहूर किरदारों का ज़िक्र विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में उठा है तो इन किरदारों के ज़िक्र के बगैर वो फेहरिस्त मुकम्मल ना हुई I और ऐसे किरदारों को अपनी कलम से पैदा करने वाली और महज़ अपनी किशोरवय पुत्री के कॉलेज और उसकी जरूरियातों को पूरा करने के लिए जरूरी खर्चों के इन्तेजामात के लिए इस विधा में आकर इन किरदारों के जरिये रहस्य कथा लिखने वाली लेखिका फ्रांसिस क्रेन (Frances Crane) को भुला दिया गया I यहाँ तक की जब खुद इस लेख की लेखिका ने इन्टरनेट पर उक्त लेखिका के बारे में खोजबीन की तो महज़ एक धुंधली सी तस्वीर के सिवा कोई तस्वीर न मिल सकी जिसे प्रामाणिक रूप से उक्त लेखिका की ही कही जा सकती I बहरहाल २००४ के बाद से वो किरदार अपने जलवे लेकर आज की इस मौजूदा पीढ़ी को खुद से ताअर्रुफ़ करवाने को अपने कारनामों को लेकर amazon पर मौजूद हैं I

Frances Crane का जन्म २७ अक्टूबर १८९० को Lawrenceville, Illinois में एक सुशिक्षित परिवार में हुआ था जिसमे अधिकतर पुरुष डॉक्टर थे I Frances के पति एक कामयाब और रईस विज्ञापन प्रतिनिधि थे और फ्रांसिस ने अपनी वैवाहिक जीवन के दौरान The New Yorker पत्रिका में मुसलसल अपने व्यंग्य और कटाक्षपूर्ण लेख लिखे और अपने सहज हास्य और व्यंग्य शैली के लिए मशहूर भी हुईं I अपने जर्मनी प्रवास के दौरान हिटलर की एक स्पीच पर टिप्पणी करने और नाज़ीवाद की तीखी आलोचना करने के चलते उनकी काफी मलामत भी हुई I मगर उनकी इस आज़ादख्याली, आज़ादाना सोच और उनके मुखर स्वभाव का पुरजोर विरोध हुआ और उन्हें जर्मनी से निकाल दिया गया I और यहीं से उनपर मुसीबतों का दौर शुरू हुआ I जर्मनी से निकाले जाते ही न केवल उनका उनके पति से तलाक के माध्यम से अलगाव हुआ बल्कि उनकी एकलौती पुत्री के कॉलेज खर्च और उसकी जरूरतों के लिए माली दुश्वारियों का सामना भी करना पड़ा I इस दौरान उन्हें इस बात का पूरी तरह एहसास हो चुका था की जिस अंग्रेजी संस्कृति को वो अपने व्यंग्यात्मक लेखों के जरिये निशाना बनाया करती थीं उसका आप आधुनिक अमरीकियों में कोई craze नहीं रह गया था और उन्हें कुछ नया करना होगा क्यूंकि एक यही लेखन ही उनका जरिया था I १९४१ में एक आभूषण विक्रेता की दूकान पर हुई एक घटना से प्रेरित होकर उन्होंने अपना पहला अपराध उपन्यास लिखा ‘The Turquoise Shop’ जिसमे उन्होंने दो किरदारों की रचना की –Jean Holly और Patt Abbott I ये उपन्यास आते ही सराहा गया और उनका इस विधा में लेखन का सफ़र चल पड़ा I हालांकि इस उपन्यास में उन्होंने इन दोनों किरदारों को विवाहित नहीं दिखाया था लेकिन उनकी कामयाबी और कुछ अलग हटकर रचने के चलते अपने तीसरे उपन्यास ‘The Yellow Violet’ में विवाह बंधन में बांधकर बतौर जासूस एक शादीशुदा जोड़े की कल्पना को अमलीजामा पहनाया और १९६५ तक मुसलसल इस सीरीज को लिखती रहीं जो Abbott Mysteries के तौर पर मकबूल और  बहुप्रशंसित हुईं I frances ने इस विधा के लेखन में दूसरी अन्य महिला लेखकों की बनिस्बत एक लम्बा और कामयाब दौर देखा भी और उसका पूरा लुत्फ़ भी लिया I उनका अंतिम रहस्य उपन्यास ७८ वर्ष की आयु में प्रकाशित हुआ था I और इस सीरीज की मकबूलियत ने ही इसे १९४५ से १९५५ के दौरान रेडियो पर Abbott Mysteries के नाम से अपनी मौजूदगी दर्ज करायी और कामयाब भी हुई I इस सीरीज के अलावा उन्होंने 4 अन्य रहस्य कथा उपन्यास लिखे थे जो खुद इस सीरीज की ही तरह कामयाब हुवे थे I

frances ने इस सीरीज के टाइटल में भी एक अजब प्रयोग किया था और उन्होंने सारे उपन्यासों के नाम रंगों के आधार पर रखे थे I ‘The Turquoise Shop, The Golden Box, The Pink Umbrella, Murder on the Purple Water, Murder in Blue Street, Murder in Bright Red, 13 White Tulips’ आदि उनके प्रसिद्द उपन्यास हैं I

उनकी बेटी Nancy के विषय में एक घटना दिलचस्पी से खाली भी नहीं और काफी हैरतंगेज़ घटना समझी जाती है I नैंसी का विवाह Pulp मैगज़ीन Black Mask लेखक Norbert Davis से हुआ था जिससे नैंसी की एक पुत्री थी I Davis को खुद के Cancer पीड़ित होने का जब इल्म हुआ तो उन्होंने अवसादग्रस्त होकर १९४९ में एक बंद गैरेज में खुद को क़ैद करके और कार का इंजन चालू रखकर आत्महत्या कर ली थी I कुछ वर्षों बाद नैंसी जो अब विधवा थी उसी कार को चलाते हुवे एक शराबी द्वारा दुर्घटना की शिकार हो गयी और घटनास्थल पर ही मृत्यु घोषित कर दी गयीं I लेकिन हैरतंगेज़ तरह से न केवल वो पुनर्जीवित हुई बल्कि इस दुर्घटना के कुछ ही महीनो बाद एक पुत्री को जन्म भी दिया जबकि दुर्घटना के बाद वो कई महीनो तक विकृत चेहरे के साथ थीं I

Frances Crane ने खुद को सक्रिय लेखन से १९६८ में अलग कर लिया था और अंतिम समय में वो Albuquerque, New Mexico में थीं जहाँ वो कुछ ही महीनो पहले बीमारी के दौरान आराम और इलाज़ के चलते आयीं थीं और ६ नवम्बर १९८१ को ९१ वर्ष की उम्र में वहीँ रहते उनका देहांत हो गया I

आज भले ही Frances Crane का नाम रहस्य कथा लेखन जगत में कई चमकते सितारों के बीच गुम गया हो लेकिन अपने किरदार Jean और Patt Abbott के माध्यम से वो आज भी लाफ़ानी हैं I

रहस्य कथा संसार के विस्मृत व्यक्तित्व

Joseph Jefferson FarjeonJoseph

दुर्भाग्य ! एक ऐसा लफ्ज़ जिसके साए तले कितना भी कामयाब इंसान या कोई भी रचना, सृष्टि, कब आकर अपना वजूद खो बैठे, कोई नहीं जानता I मानव मस्तिस्क भी बड़ा अस्थिर किस्म का अंग है, एक ओर जहाँ इसकी स्मरणशक्ति का कोई जवाब नहीं, तो दूसरी ओर घटनाओं, व्यक्तिओं, चेहरों को विस्मृति के गर्त में  धकेलने में देर भी नहीं करता I रहस्य कथाओं और अपराध लेखन का संसार विचित्रताओं भरा संसार है और अपने इस संसार की भीतरी दीवारों के बीच रचे गए अनगिनत कथानकों, उनके चरित्रों की नियति की ही तरह जहाँ एक ओर रोमांच की रचना करता हुआ उजला उजला सा पहलू अपने उजलेपन का तड़क भड़क भरा प्रदर्शन करता दिखता है, तो दूसरी ओर उन्ही कथानकों में बसी नियति और अपने कथानकों की ही तरह उतना ही क्रूर और रहस्यों भरा है I इस लेखन की विडंबना है की सिर्फ आज की कामयाबी का जश्न है और लतीफ़े हैं , कल किसी और की कामयाबी के कसीदे होंगे और परसों बीते हुवे कल की खूबसूरत और सुनहरी यादों के मर्सिये होंगे जो वक़्त के साथ साथ पहले अपनी गेयता, फिर लयात्मकता, फिर अपने बोलों का क्रम और अंत में लफ्ज़ तक खोकर समय के blackhole सदृश शून्य में खो जायेंगे I बहुत विरले ही इस दुर्भाग्य की ज़द से खुद को बचा सके हैं और पूरी कामयाबी और शिद्दत से दमकते रह गए हैं I कारण चाहे जो भी रहे हों, चाहे वक़्त उन पर मेहरबान था या उनकी कामयाबी इतनी बड़ी थी ? या फिर उन्होंने अपनी तारीख़ का पन्ना खुद ही लिखा था I

एक वक़्त में अपने उम्दा लेखन, अपने बेहतरीन चरित्र चित्रण और मनोरंजन करने की अतिरिक्त लेखन शैली, व्यंग्य की अच्छी पकड़ और साथ ही साथ उस दौर के विशुद्ध जासूसी और अपराध लेखन में पहली बार रोमांस और प्यार का तडका लेकर कथानकों के निर्माण से उपजे अफसानों को लिखने वाले और तकरीबन ८० से अधिक किताबें लिखने वाले लेखक की ये नियति हो तो इस लेख में मैंने अभी जो कुछ ऊपर लिखा है कहाँ से गलत है ?

जी हाँ, अपराध और जासूसी कथा लेखन में पहली बार रोमांस का पुट डालकर लिखने वाले लेखक Joseph Jefferson Farjeon (जोसेफ़ जेफर्सन फारयों) के जन्म की आज १३३ वीं वर्षगाँठ है I

जोसेफ जेफर्सन का जन्म 4 जून १८८३ को लन्दन में एक अत्यंत प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था जो कलाकारों और प्रतिभाशाली लोगों से भरा था I उनके नाना Joseph Jefferson अमरीकी एक्टर थे और पिता स्वयं एक विद्वान् और सफल लेखक थे I जेफरसन का नामकरण अपने नाना के नाम पर हुआ था I उनकी शिक्षा दीक्षा व्यक्तिगत तौर पर Peterborough Lodge में हुई और १९१० में उन्होंने Amalgamated प्रेस में सम्पादकीय कार्य करना शुरू किया जहाँ वे १९२० तक लगे रहे I

उन्होंने एक लंबा और कामयाब लेखकीय जीवन जिया था I १९२० में उन्होंने प्रेस में काम छोड़कर स्वतंत्र लेखन शुरू किया था I अपने लेखन के दम पर उन्होंने वो सब कुछ अर्जित किया जिसे याद करते हुवे The Times नें उन्हें श्रद्धांजलि देते हुवे कहा था की उन्होंने उस चीज़ का आनंद उठाया जो उन्होंने अपने शानदार, सरल तथा मनोरंजक कथानकों एवं अपने चरित्रों के आधार पर अर्जित किया है I इसी तरह The Newyork Times ने भी उनके एक उपन्यास Master Criminal की समीक्षा देते हुवे कहा था की फर्जेओं अपने लेखन में कहानी कहने के अपने अद्भुत ज्ञान का प्रदर्शन करते हैं और अपनी शुद्ध, सारगर्भित एवं संक्षिप्त कहानी कहने की शैली से कथानक में आनंद को द्विगुणित कर देते हैं I

फर्जेओं का सारा लेखन वाबजूद इतनी कामयाबी और इतनी प्रशंसा के गुजरते वक़्त के साथ साथ भुला दिया गया I उन्होंने उपन्यास के अतिरिक्त Play भी लिखे थे I उनका एक Play Number 17 बहुत ही प्रसिद्ध play है जिसपर कई फ़िल्में बनी लेकिन १९३२ में अल्फ्रेड हिचकॉक निर्देशित Number Seventeen ज्यादा मशहूर हुई I और उस Play में उनके द्वारा रचा गया किरदार Ben भी उतना ही मशहूर हुआ जिसे लेकर बाद में कई उपन्यास भी लिखे I

२०१४ में British Library नें Mystery In White: A Christmas Crime Story को पुनर्प्रकाशित किया और २०१५ में Thirteen Guests एवं The Z Murders का पुनर्प्रकाशन हुआ I

उनका लेखन अपने समय की जानी मानी रहस्य कथा लेखिका डोरोथी एल० सयेर्स द्वारा प्रशंसा प्राप्त था जो अक्सर उनके लेखन को लेकर कहती थीं “ रहस्यमयी रोमांच के मध्य भीतर गहरे तक उतर कर सिहरन पैदा कर देने के कौशल के नायाब लेखक” I

The Master Criminal, No. 17, The House of Disappearance, The 5:18 Mystery, The Mystery on the Moor, The Z Murders’ इत्यादि उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं I

६ जून १९५५ को ७२ वर्ष की उम्र में Sussex में उनका देहांत हो गया I उनकी बहन Eleanor जानी मानी बाल साहित्य की लेखिका थीं I

इतनी प्रशंसा, मकबूलियत और इतनी संख्या में उपन्यास लेखन के वाबजूद उनके महज़ तीन चार उपन्यासों के अलावा तकरीबन सारा लेखन हाशिये पर चला गया I एक लेखक के तौर पर उनके लिए इस से ज्यादा त्रासद और क्या हो सकता है ?