अनुवाद – ‘ द ब्लू सेक्विन’ लेखक – आर ० आस्टिन फ्रीमैन

आर० आस्टिन फ्रीमैन एक ब्रिटिश रहस्य कथा लेखक थे जो अपने समय में उस वक़्त रहस्य कथाओं की परम्परागत लेखन शैली के ऐन उलट उलटे सिरे से कहानियां गढ़ने के लिए जाने जाते थे, अर्थात उनकी कहानियों में आपराधिक कृत्य और अपराधी दोनों ही कहानी के आरम्भ में पाठकों के सामने होते थे और फिर उनका नायक परत दर परत रहस्य को सुलझाते हुवे हो चुकी घटना या अपराध में छुपे रहस्य को खोजता था I

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आर० आस्टिन फ्रीमैन एक ब्रिटिश रहस्य कथा लेखक थे जो अपने समय में उस वक़्त रहस्य कथाओं की परम्परागत लेखन शैली के ऐन उलट उलटे सिरे से कहानियां गढ़ने के लिए जाने जाते थे, अर्थात उनकी कहानियों में आपराधिक कृत्य और अपराधी दोनों ही कहानी के आरम्भ में पाठकों के सामने होते थे और फिर उनका नायक परत दर परत रहस्य को सुलझाते हुवे हो चुकी घटना या अपराध में छुपे रहस्य को खोजता था I उनकी अधिकतर कथाओं का नायक डॉक्टर थार्नडाइक है जो एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट है और तथ्यों एवं सूत्रों के वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर रहस्य सुलझाता है I

प्रस्तुत कथा ‘थार्नडाइक सीरीज’ की एक प्रसिद्ध कहानी ‘द ब्लू सेक्विन‘ का अविकल अनुवाद है I

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मूल कथा – आर० आस्टिन फ्रीमैन

अनुवाद – सबा खान

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थार्नडाईक बेचैनी के आलम में प्लेटफार्म पर खड़ा बार बार इधर उधर ताके जा रहा था, और जैसे जैसे ट्रेन के चलने का समय निकट आ रहा था, उसी अनुपात में उसकी बेचैनी भी बढ़ती जा रही थी  I

“पता नहीं कहाँ रह गया ? काम का कुछ अता पता नहीं और पनौती पहले ही शुरू ?” – वह मन ही मन झुंझलाते हुवे बुदबुदाया और गार्ड के हरी झंडी दिखाते ही लपक कर एक खाली ‘स्मोकिंग कम्पार्टमेंट’ में घुस गया – “ अब तो आने से रहा वह ” – उसने ये कहते हुवे निराश भाव से दरवाजा बंद किया और ट्रेन के रेंगना शुरू करते ही उम्मीद भरी निगाहों से एक बार फिर खिड़की से बाहर की ओर झाँका I

“ अरे !! कहीं यह वही तो नहीं ? ”- उसका बडबडाना पूर्ववत जारी था – “ क्या आदमी है यार…भला कोई ऐसा करता है, खामखाह में जान दांव पर लगा दी, अगर यह वही है तो अगले किसी कम्पार्टमेंट में है ” – उसके स्वर में उत्तेजना के साथ साथ आश्चर्य का भी भाव था I शायद उसने पटरियों पर रेंगती ट्रेन पर अंतिम समय में किसी को सवार होते देख लिया था I

मैं चुपचाप खड़ा उसका ये बडबडाना सुन रहा था I दरअसल थार्नडाइक की इस पूरी बातचीत और बेचैनी का मरकज़ ‘पुर्तगाल स्ट्रीट’ स्थित सॉलिसिटर्स की फर्म ‘स्टॉपफ़ोर्ड एंड मायर्स’ के सदस्य ‘मि० एडवर्ड स्टॉपफ़ोर्ड थे’, जिनसे मौजूदा हालातों में हमारा त़ाअल्लुक महज़ एक टेलीग्राम की बुनियाद पर बन गया था जो कि पिछली शाम को हमारे कार्यालय तक पहुँची थी और जिसकी इबारत कुछ यूँ थी –

“ क्या आप एक महत्वपूर्ण केस के सिलसिले में कल यहाँ आ सकते हैं ? सभी जरूरी खर्चे हम वहन करेंगे – स्टॉपफ़ोर्ड एंड मायर्स ”

थार्नडाइक नें उक्त टेलीग्राम का जवाब हाँ में दिया था और आज अलस्सुबह एक और टेलीग्राम आन पहुची थी –

“ सुबह तकरीबन ८.२५ पर ‘चेरिंग क्रॉस’ से ‘वोल्डहर्स्ट’ के लिए निकलूंगा I अगर संभव हो सका तो फ़ोन करूंगा – एडवर्ड स्टॉपफ़ोर्ड ”

लेकिन उसका कोई फ़ोन नहीं आया था, मगर दूसरी टेलीग्राम के सन्देश के अनुसार हमने ये अंदाज़ा गलत भी नहीं लगाया था कि स्टेशन पर ही वह मिलना चाहता था और हमारे साथ ही ‘वोल्डहर्स्ट’ तक चलना चाहता था I वैसे भी अभी तक हमें यह तक मालूम नहीं था कि असल में केस था क्या ? तो हम दोनों की निगाहें भी उसे ही तलाश कर रही थीं I मगर ट्रेन चल भी चुकी थी और उसका कहीं कुछ अता पता तक ना था I चूंकि हम दोनों का पहले कभी उससे किसी भी सिलसिले में रु ब रू साबका न पड़ा था, तो हम दोनों के लिए ही उसकी प्लेटफार्म पर मौजूदगी या ग़ैरमौजूदगी के सिलसिले में ऐन कील ठोंककर कुछ कहना भी मुहाल था I

“ यार यह कोई अच्छी बात नहीं है ” – थार्नडाइक का मूड उखड़ा हुआ था, उसने फिर अपना राग अलापना शुरू कर दिया – “ अगर वह मिल जाता तो उस केस के सिलसिले में हमें पहले से ही मोटे तौर पर बहुत कुछ पता चल सकता था ” – उसने असहाय भाव से कंधे उचकाये और कुछ सोचते हुवे अपना पाइप सुलगाया और लम्बे लम्बे कश खींचकर ‘लंदन ब्रिज प्लेटफार्म’ की ओर ताकने लगा I मैंने अभी तक इस पूरे सिलसिले में अपनी ओर से कुछ भी टीका टिपण्णी न की थी I कुछ पलों तक वह यूँ ही अपनी सोचों में गुम, रफ़्तार के साथ पीछे छूटते प्लेटफार्म को निहारता रहा फिर उसकी तवज्जोह हाथ में थमे अखबार की ओर गयी और यूँ ही अनमने भाव से उसने अखबार में छपी खबरों पर बगैर किसी अतिरिक्त तवज्जोह के सरसरी तौर पर ऊपर से नीचे निगाहें फिरानी शुरू कर दी I

“ किसी भी केस पर काम शुरू करने का भला यह कोई तरीका है ” – उसने अखबार से सर उठाये बगैर फिर बडबडाना शुरू कर दिया – “ कि केस की किस्म का कुछ अता पता भी न हो और बगैर किसी पूर्व सूचना के सीधे इन्वेस्टीगेशन में कूद पड़ा जाए, उस पर अफ़सोस की बात यह कि जब केस की बाबत जानकारी प्राप्त करने का एक सुनहरा अवसर हो, और वह मौक़ा भी हाथ से जाता रहे I यह तो ऐसा हुआ कि ……………”

अपनी बात को पूरी किये बगैर वह अचानक चुप हो गया I जब उसमे अचानक आई इस तब्दीली को भांपने के लिए मैंने उसकी ओर देखा तो वह अखबार में छपी किसी खबर को बड़ी तल्लीनता से पढ़ रहा था I “ जार्विस, देखो तो शायद यह अपने ही केस के बारे में छपा है ” – उसने अखबार मेरी ओर सरकाया और पृष्ठ पर सबसे ऊपर मोटे अक्षरों में छपी एक खबर की ओर इशारा किया जिसका शीर्षक था –‘ केंट में एक खौफनाक क़त्ल’ I अखबार में छपी उस घटना का विवरण कुछ इस तरह से दिया गया था :-

“ ‘हैलबरी जंक्शन’ से सटे हुवे एक छोटे से क़स्बे ‘वोल्डहर्स्ट’ में कल सुबह एक हृदयविदारक घटना हुई I यह घटना सर्वप्रथम कल सुबह एक खलासी के संज्ञान में आई जब वह हमेशा की तरह यात्रियों से खाली हुई ट्रेन की साफ़ सफाई हेतु उसके डिब्बों का निरीक्षण कर रहा था I एक प्रथम श्रेणी के कम्पार्टमेंट का दरवाजा खोलने पर उसे फर्श पर एक आधुनिक वस्त्रों में सजी धजी, फैशनेबल महिला का शव मिला जिसकी सूचना उसने सम्बंधित अधिकारियों को दी जिन्होंने फौरी कार्यवाई के तहत मेडिकल टीम को बुलवा भेजा I उक्त टीम के डिवीज़नल सर्जन डा० मार्टन नें निरीक्षण के उपरान्त यह पाया कि उक्त महिला की मृत्यु कुछ ही मिनटों पहले हुई थी I लाश की हालत देखकर यह अंदाजा लगाना कतई  मुश्किल नहीं था कि उक्त महिला का बड़ी बेरहमी से क़त्ल किया गया था और मौत की वजह सर में किसी नुकीले और धारदार हथियार का भीषण वार था जिसके चलते खोपड़ी में छेद सा हो गया था I वार की भीषणता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि खोपड़ी में बड़ा सा झरोखा बन गया था और हथियार मष्तिष्क तक जा पहुंचा था I घटना स्थल पर मौजूद कीमती ड्रेसिंग बैग, मकतूला के शरीर पर मौजूद कीमती आभूषणों और हाथों में कई कीमती हीरों की अंगूठियों की मौजूदगी यह दर्शाने के लिए काफी थी कि क़त्ल का मकसद लूटपाट न होकर महज़ उक्त महिला का क़त्ल ही था I ऐसी भी अफवाहें हैं कि स्थानीय पुलिस ने इस सिलसिले में एक गिरफ़्तारी भी की है मगर खबर लिखे जाने तक इस अफवाह की पुष्टि नहीं हो पायी थी ”

मैंने अखबार उसे वापस सौंपते हुवे कहा –“ सचमुच बड़ा ही अजीब केस है, मगर इस खबर के ज़रिये हमें कोई बहुत काम की जानकारी तो नहीं मिली I हाँ, अगर यही अपना केस है तो कम से कम एक शिकायत जरूर दूर हो गयी कि केस की किस्म क्या है ”

“ किसी हद तक तुम सही कह रहे हो ” – थार्नडाइक ने सहमति जताते हुवे अपनी बात भी जोड़ी  – “ मगर फिर भी इस खबर के ज़रिये हमें इतना कुछ तो पता चल ही गया है जिस पर हम तबसरा कर सकते हैं I मसलन, खोपड़ी में हुआ वह झरोखे जैसा घाव जो इस खबर के मुताबिक किसी नुकीले और धारदार हथियार के चलते हुआ है, जाहिर है कि वह गोली का घाव तो हो नहीं सकता क्यूंकि गोली से हुआ घाव इस तरह से नहीं होता और फिर एक काबिल डॉक्टर नें भी इस बात की पुष्टि की है कि आलाए क़त्ल कोई नुकीली और धारदार चीज़ है I अब सोचने की बात यह है कि वह आखिर किस तरह का हथियार हो सकता है जिसकी मारक क्षमता भी इस कदर भीषण थी ? कातिल के लिए रेल के डिब्बे जैसी संकरी और कदरन सीमित जगह पर इतना भीषण और हिंसक वार कर पाना कैसे मुमकिन हुआ ? और सबसे बड़ी बात यह है कि कातिल किस तरह का शख्स है और इस तरह के हथियार तक उसकी पहुँच क्यूँकर थी ?” – अपनी कही बातों का मुझ पर प्रभाव देखने के लिए उसने ठहरकर मेरी ओर अपलक देखा और मुझे पूरी तवज्जोह से अपनी बातों की ओर मुखातिब पाकर उसने बात बढ़ाई – “ ये कुछ ऐसी बुनियादी बातें हैं जिनपर तबसरा किया जाना निहायत ही जरूरी है I इसके अलावा कुछ अन्य बिन्दुवों पर भी गौर किया जा सकता है – मसलन, लूटपाट के अलावा क़त्ल जैसे संगीन जुर्म के लिए अन्य संभावित मोटिव और क्या हो सकते हैं ? या क़त्ल के अलावा दूसरे ऐसे कौन से संभावित कारक हो सकते हैं जिनके चलते दुर्घटनावश इस तरह के प्राणघातक घाव और चोटें पैदा हो सकती हैं ?”

“ क़ातिल नें बतौर आलाए क़त्ल इस्तेमाल के लिए हथियार चुनते समय जरा भी दूरंदेशी और दानिशमंदी नहीं दिखाई है ” – मैंने अपना ख्याल ज़ाहिर किया

उसने प्रशंसात्मक निगाहों से मेरी ओर देखते हुवे कहा – “ हाँ, चोटों और घावों की प्रकृति को देखते हुवे अगर किसी हथियार की कल्पना की जाए तो यह जरूर किसी विशेष प्रकार का ‘हैंडीटूल’ जैसा ही उपकरण होगा जिनकी उपलब्धता का दाएरा भी सीमित होता है I जैसे किसी राजमिस्त्री के पास ‘कन्नी’ या बढ़ई के पास ‘हथौड़ी’ या किसी लुहार के पास कदरन वजन में भारी हथौड़े की उपलब्धता सहज है, क्यूंकि ये ऐसे विशेष उपकरण हैं जो कुछ विशेष काम धंधों से जुड़े लोगों के पास ही सुलभ होते हैं I क्या तुम्हारे पास कोई सादा कागज़ या कोई कापी है ?”

मैंने बगैर कोई सवाल किये अपने बैग में हाथ डाला और उसे एक नोटबुक थमा दी और ख़ामोशी से उसे देखने लगा I काफी देर तक हम दोनों के बीच कोई दूसरी बात नहीं हुई और वह उसी मुद्रा में – घुटने पर नोटबुक रखे खिड़की से बाहर झांकते हुवे, बीच बीच में नोटबुक पर कुछ लिखता रहा I उसकी ये तन्द्रा तभी भंग हुई जब ट्रेन की रफ़्तार ‘हैलबरी जंक्शन’ के पास आकर कम हो गयी I अब हमें यहाँ से ‘ब्रांचलाइन’ की ट्रेन पकडनी थी I

जब हम प्लेटफार्म पर उतरे तो मैंने देखा कि गाडी के अगले सिरे की ओर से एक संजीदा सूरत और पहनावे से संभ्रांत लगने वाला एक व्यक्ति गाडी से उतरने वाले हर यात्री पर खोजपूर्ण दृष्टि डालता हुआ हमारी ही ओर आ रहा था I जल्द ही उसने हमें परख लिया और तेज़ी से आगे बढ़कर थार्नडाइक से मुखातिब हुआ – “ डा० थार्नडाइक ?”

उसने सहमति में सर हिलाया और आगंतुक से बोला – “ जहाँ तक मेरा ख्याल है आप ही शायद मि० एडवर्ड स्टॉपफ़ोर्ड हैं ?”

आगंतुक ने सहमति जताते हुवे अपने सर को हल्का सा ख़म देकर हमारा अभिवादन किया और फिर उत्तेजित भाव से बोला – “ आपको यक़ीन नहीं होगा की आपको यहाँ देखकर मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है I मेरी ट्रेन तो लगभग छूट ही गयी थी और साथ ही मुझे ये भी लगा था की अब आपसे मुलाकात शायद न हो सके ” – बात करते करते उसकी निगाह थार्नडाइक के हाथ में थमें अखबार पर गयी – “ शायद आप घटना के बारे में जान गये हैं, सच में यह घटना इस छोटी सी जगह पर दिल को दहलाने वाली है और यहाँ के हिसाब से तो बिलकुल अनोखी है I”

“इसमें लिखा है की इस सिलसिले में कोई गिरफ्तारी भी हुई है?” थार्नडाइक ने पूछा

“ हाँ –हुई तो है I दरअसल वह मेरा भाई है I उसके साथ बहुत ही बुरी बीती” – उसने कुछ हिचकिचाते हुवे बताया – “ अब सूरतेहाल यह है कि भाई की हालत देखकर मैं भी उलझन में पड़ गया हूँ, लेकिन………… ठहरिये……. मैं शुरू से सारे तथ्य आपके सामने रखता हूँ, आप ही बेहतर तरीके से परिस्थितियों का आंकलन कर सकते हैं,……….. लेकिन……….. पहले आइये प्लेटफार्म की ओर चलते हैं, ट्रेन अभी तकरीबन १५ मिनट तक यहाँ ठहरी रहेगी ”- उसने कई टुकड़ों में अपनी बात खत्म की, दरअसल वो अपनी बात शुरू करने से पहले कुछ वक़्त चाहता था ताकि बातों का कोई सिरा तलाश सके I

हमने अपने बैग एक खाली ‘फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट’ में रखे और प्लेटफार्म के कदरन कम शोरगुल वाले सिरे की ओर बढ़ गए I वह हम दोनों के बीच में चल रहा था जिससे उसकी कही बातें हम दोनों ही समान रूप से सुन रहे थे – “ दरअसल जिस महिला का इस बेरहमी से क़त्ल हुआ है उसका नाम मिस एडिथ ग्रांट था I वह पहले एक चित्रकार की मॉडल हुआ करती थी I चूंकि मेरा भाई – हेरोल्ड स्टॉपफ़ोर्ड भी एक पेंटर है तो एडिथ भी मेरे भाई के लिए मॉडलिंग किया करती थी I शायद आपने भाई का नाम सुना हो ?”

“ हाँ, सुना है और उसकी पेंटिंग्स भी काफी देखी हैं, काफी सिद्धहस्त पेंटर है आपका भाई ”

“ हाँ मुझे भी लगता है कि बतौर पेंटर उसका भविष्य बहुत उज्जवल है…तो उन दिनों वह नौजवान था –तकरीबन २० के आसपास की उम्र रही होगी उसकी  –  मॉडलिंग और पेंटिंग बनाने के दरमियान उसके और मिस ग्रांट के बीच की नजदीकियां बढ़ती गयीं और वह दोनों एक दुसरे के काफी करीब आ गये थे —एक तरह से यह एक निर्दोष सा खूबसूरत रिश्ता था जिसमे अश्लीलता और वासना की कहीं कोई गुंजाइश नहीं थी क्यूंकि हर इंग्लिश मॉडल की तरह ही मिस एडिथ भी एक इज्ज़तदार और शरीफ लड़की थी……जैसा की आप भी जानते होंगे की यहाँ इस तरह की मॉडलिंग को गिरी हुई निगाह से नहीं देखा जाता है और अच्छे घरानों की लड़कियां भी यह पेशा अपनाने से गुरेज़ नहीं करती हैं I” – उसने ठहरकर अपनी कही बातों का जायजा लिया और फिर आगे बोला –“ बहरहाल उनका यह सम्बन्ध खूब परवान चढ़ा और उस सिलसिले में दोनों ही तरफ से काफी खतोकिताबत भी हुई, और कुछ छोटे बड़े तोहफों का भी लेन देन हुआ जिसमे एक मोतियों के मनकों वाली चेन भी थी जिसमे एक लॉकेट पड़ा हुआ था I मेरे  भाई ने जब बतौर तोहफा वह चेन एडिथ को दी थी तो उस वक़्त उसने लॉकेट में न केवल अपना पोर्ट्रेट रखने की, बल्कि उसपर ‘ टू एडिथ, फ्रॉम हेरोल्ड’ खुदवाने की निहायत ही बचकानी और अव्वल दर्जे की अहमकाना हरकत भी की थी I”

मिस ग्रांट की आवाज़ भी बड़ी सुरीली थी जिसके चलते उसने बाद में मॉडलिंग छोड़ दी और ‘ओपेरा शोज’ से जुड़ गयी और साथ ही मंचीय प्रस्तुतियां भी देने लगी I इस दिशा में उसने ख़ासा नाम भी कमाया था जिसके चलते न केवल उसकी रुचियों में बदलाव आया बल्कि उसके सहयोगी और संगी साथी भी बदल गए जिनके बीच विचरना उसे अच्छा लगने लगा था I जाहिर था इन नाइत्तेफाकियों का असर उनके रिश्तों पर भी पड़ना था, तो बगैर किसी शोर शराबे के दोनों ही अपनी राह लग लिए थे I इसी बीच हेरोल्ड की भी सगाई हो गयी और उसने मिस ग्रांट से अपने सारे ख़त वापस मांगने शुरू कर दिए, विशेषकर वह लॉकेट जिसमे उसने पोर्ट्रेट के साथ साथ ‘टू एडिथ, फ्रॉम हेरोल्ड’ की इबारत भी खुदवाई थी I मगर मिस ग्रांट ने किसी भी कीमत पर वह लॉकेट लौटाने से इनकार कर दिया I हालांकि हेरोल्ड ने बदले में उससे भी कीमती कोई दूसरा तोहफा देने की भी पेशकश की थी, मगर उसने अनसुनी कर दी I हाँ उसने वह सारे ख़त जरूर हेरोल्ड को वापस कर दिए थे I

“ अभी पिछले महीने से हेरोल्ड यहाँ हैलबरी में रह रहा था और आसपास के इलाकों में भ्रमण करते हुवे यहाँ चारों ओर बिखरे प्राकृतिक सौंदर्य को अपनी कला के माध्यम से उकेरने की कोशिश कर रहा था I इसी सिलसिले में कल सुबह वह ‘शिंगलहर्स्ट’ के लिए ट्रेन पकड़ने इधर आया था ……..‘शिंगलहर्स्ट’ यहाँ से तीसरा और ‘वोल्डहर्स्ट’ से एक स्टेशन पहले एक कदरन शांत और खूबसूरत सी जगह है जहाँ वो कुछ ‘स्केच’ बनाने के लिए जाना चाहता था I

प्लेटफार्म पर उसकी मुलाक़ात अचानक मिस ग्रांट से हो गयी जो लंदन से आई थी और जहाँ आगे उसका मुकाम ‘वोर्थिंग’ था I दोनों ने ही ‘ब्रांचलाइन’ ट्रेन के एक ‘फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट’ में एक साथ अपनी सीट ली थी I उस वक़्त भी उसने गले में वही लॉकेट पहना हुआ था, जिसे देखकर हेरोल्ड नें अपनी मांग दोबारा दोहराई और हमेशा की तरह उसने फिर इनकार कर दिया  I और यही मुद्दा बढ़ते बढ़ते तीखी झड़प में बदल गया था क्यूंकि ‘मंस्डेन’ स्टेशन के गार्ड और एक खलासी के दिए गए बयानों के मुताबिक़ वो दोनों एक दूसरे से लड़ झगड़ रहे थे और चीख चिल्ला रहे थे I मगर इस पूरे घटनाक्रम का सबसे हैरतंगेज़ पहलू ये है कि झगड़े के दौरान उस औरत ने लॉकेट को चेन समेत अपने गले से गुस्से में नोचकर चीखते हुवे मेरे भाई की ओर उछाल दिया था जिससे उन दोनों के बीच शुरू हुई गहमागहमी थम सी गयी थी और आगे ‘शिंगलहर्स्ट’ पर दोनों ख़ामोशी से एक दूसरे से अलग हो गए थे जहाँ मेरा भाई ट्रेन से उतर गया था I उस वक़्त उसके पास उसकी पूरी ‘स्केचिंग किट’ के साजो सामान के अलावा एक बड़ा सा ‘छाता’ था जिसका निचला सिरा ‘ऐशवुड’ के बने एक लम्बे डंडे से जुड़ा हुआ था जिसके अगले सिरे पर एक मजबूत स्टील का असाधारण रूप से ‘लम्बा कीला’ सा लगा हुआ था जो जमीन पर चलते समय पकड़ बनाने के काम आता था I

“१०.३० बजे के आसपास वह शिंगलहर्स्ट पर उतरा था और ११.०० बजे तक वह पास के एक खूबसूरत स्थान पर पहुँच गया था जहाँ तकरीबन अगले तीन घंटों तक वह मुसलसल पूरी तन्मयता के साथ पेंट करता रहा था I अपना काम समाप्त करके और साजोसामान समेटकर जब वह स्टेशन की वापसी के सफ़र पर था, तभी उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था I

“अब उसके खिलाफ उपलब्ध परिस्थितिजन्य सबूतों पर यदि गौर किया जाए तो बहुत कुछ ऐसा है जो कहीं से भी उसे बेगुनाह साबित नहीं कर सकता I वह अंतिम शख्स था जो मकतूला के साथ देखा गया था, क्यूंकि ऐसा कोई दूसरा शख्स अभी तक सामने नहीं आया है जिसने ‘मंस्डेन’ के बाद मकतूला को देखा हो I जब मकतूला जीवित थी तो वही वह अंतिम शख्स था जिसे उसके साथ झगड़ते देखा गया था और जिसके गवाह भी मौजूद हैं I उसके पास मकतूला को जान से मारने की पर्याप्त वजह भी थीं I और सबसे बड़ी बात आलाए क़त्ल उसके छाते में लगे ‘लम्बे कीले’ की सूरत में फौरी तौर पर मुहैय्या था जो अपनी बनावट और उपलब्धता के आधार पर मकतूला के जिस्म पर उस तरह की चोटें पहुंचाने और वार करने में पूरी तरह सक्षम था जिससे मकतूला की जान चली जाती I और फिर गिरफ़्तारी के बाद जब उसकी जामातलाशी हुई तो कोढ़ में खाज की तरह उसके पास से टूटी हुई चेन और वह लॉकेट भी बरामद हो गया जिसे लेकर फ़ौरन ही यह सोच लिया गया कि क़त्ल करने के बाद उसी नें उस चेन को  मकतूला की गर्दन से झटके के साथ नोच लिया था जिससे चेन टूट गयी थी I

“इतना कुछ उसके खिलाफ होने के वाबजूद सिर्फ एक ही चीज़ है जिसके चलते मेरा मन उसे किसी भी सूरत में अपराधी मानने को तैयार नहीं है …….और वह एक चीज़ है – उसका अब तक का चाल चलन, उसका चरित्र – जो न केवल आला दर्जे का है, बल्कि उसकी यही कुछ विशेषताएं उसे औरों से अलग भी करती हैं – वह एक सम्मानित पेशे में है और पेशेगत सम्मान से इतर भी वह लोगों के बीच अपने किरदार के चलते सम्मानित है I एक पल के लिए अगर हाल में मिस ग्रांट से हुई झड़प को हाल फिलहाल उसके मिजाज में आई ऐसी तब्दीली मान भी लिया जाए जिसे वक़्त रहते मैं न जान सका होऊँ ,तो भी मैं यह मानने को कतई तैयार नहीं कि वह इस दर्जे की मूर्खता करेगा और क़त्ल जैसा जघन्य अपराध कर बैठेगा I उपलब्ध परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर उसे अपराधी करार देना अव्वल दर्जे की बेवकूफी के सिवा कुछ भी नहीं I भाई होने के नाते और उसके अब तक के चाल चलन के आधार पर मुझे उसकी कही हर एक बात पर यक़ीन है, लेकिन एक वकील होने के नाते अगर मैं उस नुक्ते निगाह से सारे हालात का जाएजा लूं तो यह कबूल करते हुवे मेरा कलेजा फटता है कि हालात उतने हौसलाअफजाह नहीं हैं I उसके बचने के चांसेस न के बराबर हैं और मेरी सारी उम्मीदें टूटती नज़र आ रही हैं ”- अपनी रामकहानी के अंतिम अंश सुनाते सुनाते वह भावुक हो उठा था और अंतिम पंक्तियाँ उसने इतने कातर भाव से कही थीं कि मेरा कलेजा मुह को आने लगा I पूरे वार्तालाप के दौरान न ही मैंने और न ही थार्नडाइक ने उससे कुछ पूछा था न ही उसे टोका था I

“ मुझे नहीं लगता कि अभी उम्मीद का सितारा डूब गया है ” – थार्नडाइक ने जवाब दिया – “ हालांकि पुलिस जरूर अपनी कामयाबी पर इतरा रही होगी”

ट्रेन का समय हो चुका था – हम लोग वापस आकर अपनी जगहों पर बैठ गए थे I वकील के चेहरे पर निराशा की परछाइयाँ अब भी तैर रही थीं …..उसने थार्नडाइक को खिड़की से बाहर की ओर ताकता पाकर कहा – “ मैंने ‘कॉरोनर’ से इस बात की अनुमति ले ली है कि आप लाश का मुआइना कर सकें और पोस्टमोर्टेम के दौरान आपकी मौजूदगी पर किसी को कोई ऐतराज़ भी न हो”

“ क्या आपको मकतूला के जिस्म पर प्राणघातक वार से हुवे घाव की सही स्थिति की जानकारी है ?”

“ हाँ, यह बाएं कान के पीछे थोडा ऊपर की ओर हटके, लगभग एक गोल सुराख की तरह का है जो माथे की किनारे की तरफ जाकर एक कटे फटे लम्बे से चीरे की शक्ल में फ़ैल सा गया है ”

“ और लाश की स्थिति ?”

“ लाश फर्श के समानांतर लम्बाई में पडी हुई थी और पैर दाहिने ओर के दरवाजे से लगभग सटे हुवे थे”

“ क्या सर पर हुआ घाव ही जिस्म पर बना एकलौता घाव था ? ”

“ नहीं, मकतूला के दाहिने गाल पर एक लम्बा ‘कट’ या खरोंच जैसा गहरा निशान भी था जिसे पुलिस सर्जन नें ‘कॉनटियूज्ड वुंड’ जैसा कुछ कहा था और जिसकी बाबत उसका ख्याल कि वह खरोंच का निशान किसी भारी मगर भोथरे या किसी कुंद धारवाले हथियार के वार से बना था I इसके अतिरिक्त अन्य किसी चोट या निशान के बारे में नहीं सुना I”

“ क्या कल ‘शिंगलहर्स्ट’ से कोई और भी ट्रेन पर चढ़ा था ?” – थार्नडाइक के प्रश्न जारी थे

“ हैलबरी से चलने के बाद से कोई भी उस ट्रेन पर नहीं चढ़ा था ”

थार्नडाइक इन तथ्यों को सुनकर गहन विचारों में डूब गया I वह मन ही मन किसी निष्कर्ष पर पहुचने की कोशिश में लगा था I उसकी ये विचारमग्नता तभी टूटी जब ट्रेन ‘शिंगलहर्स्ट’ स्टेशन से होकर गुज़र रही थी I

“ यही वह जगह रही होगी जहाँ क़त्ल हुआ होगा ” – स्टॉपफ़ोर्ड ने कहा – “ या फिर यहाँ से ‘वोल्डहर्स्ट’ के बीच कहीं पर कातिल ने इस काम को अंजाम दिया होगा ”

थार्नडाइक ने अनमने भाव से केवल सर हिला दिया और खिड़की से बाहर तेज़ी से गुजरते जाते दृश्यों और वहां मौजूद चीज़ों को ध्यान से देखता रहा I

“ अच्छा, बाहर पटरियों के बीच और आसपास ढेर सारी चिप्पियाँ, और गिट्टियां बेतरतीबी से इधर उधर बिखरी पड़ी हैं, और पटरियों के जोड़ों के कुछ कीले भी नए दिखाई पड़ रहे हैं I क्या हाल ही में कुछ पटरियां बिछाने वाले मजदूरों ने यहाँ काम किया है ?” थार्नडाइक ने खिड़की से बगैर सर हटाये सवाल किया

“हाँ – स्टॉपफ़ोर्ड ने जवाब दिया – वो अभी आगे कहीं पटरियों पर काम कर रहे होंगे – क्यूंकि कल मैंने वोल्डहर्स्ट के निकट कुछ मजदूरों को काम करते हुवे देखा था ….उस वक़्त वे लोग किनारों पर बिखरे पुवाल के ढेरों में आग लगा रहे थे; कल वापसी के दौरान मैंने काफी धुवां भी देखा था I”

“ और यह बीच में पटरियों की जो लाइन बिछी दिख रही है, मेरे ख्याल से शायद वह एक ही ट्रैक पर दूसरी ट्रेन को पास देने के काम में लायी जाती होंगी जिन्हें शायद ‘साइडिंग’ कहते हैं ?

“ जी हाँ, रेलवे वाले अक्सर इन पटरियों पर कभी सामान से लदी हुई तो कभी खाली मालगाड़ियों को  ‘शंटिंग’ के जरिये दूसरे ट्रैक्स से गुजारने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं तो कभी अन्य गाड़ियों को पास देने में I जले हुवे पुवालों के अवशेष अभी भी सुलगते दिख रहे हैं ”- स्टॉपफ़ोर्ड ने भी खिड़की से बाहर देखते हुवे कहा

थार्नडाइक गहरी दिलचस्पी से जले हुवे उन काले ढेरों को एकटक घूरता रहा, और फिर एकाएक सारा दृश्य अलग अलग पटरियों पर खड़ी गाड़ियों की ओट में चला गया I बीच वाली पटरियों पर एक मवेशियों को ढोने वाली गाडी थी, उसके बाद की पटरी पर एक मालगाडी खड़ी थी और इन दोनों ही पटरियों से पहले पैसेंजर ट्रेन की पटरियां थीं जिस पर एक ट्रेन खड़ी थी जिसका एक ‘प्रथम श्रेणी कोच’ मजबूती से बंद था और उस पर सील भी लगी हुई थी I मैंने एक बात और भी नोट की कि ट्रैक्स के बीच की दूरियां कदरन कम थीं और अगर उन अलग अलग ट्रैक्स पर एक साथ ट्रेन्स गुजरतीं तो बीच में बहुत कम ही फासला रह जाता था I ट्रेन अब धीमी होने लगी थी और कुछ ही मिनटों में हम सब ‘वोल्डहर्स्ट’ स्टेशन पर खड़े थे I

थार्नडाइक के आगमन की खबर शायद वहां पहले ही पहुंची हुई थी क्यूंकि स्टेशन पर तकरीबन पूरा स्टाफ – दो खलासी, एक निरीक्षक, और स्टेशन मास्टर स्वयं हमारी अगवानी को मौजूद था I हमें देखकर स्टेशन मास्टर आगे आया और हडबडाहट के चलते अपने पद की गरिमा के ऐन उलट खुद ही हमारा सामान उठाने में मदद करने लगा I मगर किसी ने भी इस बात पर कोई ख़ास ध्यान न दिया I

“ क्या मैं वह डिब्बा देख सकता हूँ ?” – थार्नडाइक ने स्टॉपफ़ोर्ड से कहा I जाहिर है वहां पहुंचकर वह अब वक़्त नहीं बर्बाद करना चाहता था I

“ भीतर से तो देख पाना मुश्किल है ”- जवाब स्टेशन मास्टर ने दिया जब उससे कोच की बाबत दरयाफ्त किया गया – “ पुलिस नें उसे सील किया हुआ है, आपको इंस्पेक्टर से इस बाबत पूछना चाहिए ”

“ कोई नहीं, मैं इसे बाहर से ही देख लूँगा ” – थार्नडाइक ने कहा और स्टेशन मास्टर फ़ौरन ही इस बात पर राजी हो गया और हमारे साथ कोच की ओर बढ़ चला I

“ क्या अन्य प्रथम श्रेणी के यात्री भी उस दिन उस कोच में सवार थे ?” – रास्ते में थार्नडाइक ने पूछा

“ नहीं, कोई भी नहीं ….दरअसल ‘प्रथम श्रेणी’ का वह एकलौता कोच था और मृत महिला उस कोच की एकलौती यात्री थी I जो कुछ भी हुआ है, इस पूरे मामले ने हम सबकी रातों की नींद उड़ा दी है” – उसने एकाएक झुरझुरी सी ली फिर संयत होता हुवा बोला – “ जब ट्रेन स्टेशन पर पहुंची थी तो मैं वहीँ मौजूद था I हम सब रेलवे लाइन के किनारे जलते हुवे पुवाल के ढेरों को देख रहे थे जो वहां पर काफी तेज़ी से भड़कते हुवे जल रहे थे – इसलिए मैं पास की पटरियों पर खड़ी मवेशियों वाली गाडी को वहां से हटवाने को कह रहा था क्यूंकि ढेरों में से काफी धुवां पैदा हो रहा था और आग की तपिश भी ज्यादा थी जो काफी बड़े दाएरे में फैली हुई थी ……तो मैंने सोचा की इस तपिश और धुवें की वजह से गाडी में लदे मवेशी डरकर बिदक सकते हैं और इन मवेशियों के मालिक मि० फेल्टन खामखाह का टंटा खड़ा करेंगे क्यूंकि उनका कहना है की इन मवेशियों के डरने से उनके मांस की गुणवत्ता पर फर्क आ जाता है I”

“ उनका कहना बिलकुल सही है ”- थार्नडाइक ने कहा –“ लेकिन, आप एक बात बताइए कि क्या ऐसा होना मुमकिन है कि कोई शख्स बगैर किसी की निगाहों में आये गाडी के परले सिरे से चढ़ सके और उसी तरह उतर भी सके ? मान लो, एक अजनबी शख्स किसी स्टेशन पर दूसरी ओर से किसी डिब्बे में सवार हो जाता है और अगले स्टेशन पर ज्योंही ट्रेन कुछ धीमी होती है….बड़ी फुर्ती से बगैर किसी की निगाह में आये उसी तरह पिछली तरफ से उतर कर फुर्र हो जाता है …..क्या ऐसा होना मुमकिन है, सोच समझकर जवाब दीजिये ”

“ इस बात में संदेह है ” – स्टेशन मास्टर ने दबे स्वर में जवाब दिया –“ फिर भी मैं ऐन कील ठोंककर यह नहीं कह सकता की ऐसा होना नामुमकिन है ”

“ शुक्रिया, अब एक दूसरा सवाल – मैंने देखा की यहाँ पटरियों पर ढेर सारे मजदूर काम कर रहे हैं, क्या यह सभी मजदूर स्थानीय हैं ?”

“ न जी, सभी अजनबी हैं, और सूदूर राज्यों के भी हैं जो रोजी रोटी की तलाश में इधर आ गये हैं…मगर आपको अगर इस पूरे मामले में इनमे से किसी के शामिल होने का शक है तो मैं कहूँगा की यह शक बेबुनियाद है…..कुछ बेहद अक्खड़ स्वभाव के जरूर हैं, मगर इस हद तक जायेंगे मैं सोच भी नहीं सकता ”

“ नहीं, मैं इन पर शक नहीं कर रहा हूँ…लेकिन मैं इस केस के सिलसिले में उपलब्ध सभी तथ्यों पर शुरू से आखिर तक मनन कर रहा हूँ और तथ्यों को परखने की कोशिश कर रहा हूँ ”

“ हाँ हाँ क्यूँ नहीं…यह जरूर करिए ” – कुछ कुछ खिसियाने से भाव में स्टेशन मास्टर ने जवाब दिया I बाकी का सफ़र हम लोगों ने ख़ामोशी से तय किया और जब हम उस खाली कोच तक पहुंचे तो थार्नडाइक ने अगला सवाल किया – “ क्या आपको अच्छी तरह से याद है…..कि लाश की बरामदगी के वक़्त कोच के दाहिनी ओर का दरवाजा अच्छी तरह बंद और लॉक्ड था या खुला हुआ था ?”

“ दरवाजा बंद था मगर लॉक्ड नहीं था, मगर आप यह क्यूँ पूछ रहे हैं ?”

“ बस ऐसे ही, कोई ख़ास वजह नहीं है…..तो सील किया हुआ डिब्बा केवल एक ही है ?”

उत्तर की प्रतीक्षा किये बगैर उसने कोच का मुआइना करना आरम्भ कर दिया और मैंने साथ आये दोनों व्यक्तियों को बहाने से अपने साथ रोक लिया ताकि वो उसके मुआइने के दौरान उसका ध्यान न भटका सकें I वह हौले हौले अपनी खुर्दबीनी निगाहें हर कोने खुदरे में फिराते हुवे पीछे की ओर बढ़ता गया मानो उसे किसी ख़ास चीज़ की तलाश हो और यूँ ही बढ़ते बढ़ते वह घेरा काटकर कोच के पिछले सिरे पर स्थित पायदान के पास ठहर गया और उसने वहां से बहुत ही सावधानीपूर्वक अपनी नम उँगलियों की सहायता से कोई बहुत ही बारीक चीज़ उठाई और जेब से कागज़ का एक टुकड़ा लेकर वह चीज़ उसमे रखकर कागज़ को मोड़ा और अपनी जेब में पड़ी एक छोटी सी डायरी में रख लिया I फिर वह उस पायदान पर चढ़ गया और खिड़की से भीतर की ओर झाँकने लगा ….कुछ देर यूँ ही इधर उधर झांकते रहने के बाद उसने जेब से एक छोटा सा ‘इन्सफ्लेटर’ नाम का उपकरण निकाला जो एक ख़ास किस्म के पाउडर का छिडकाव करने के काम में आता है, और उसकी सहायता से उसने बीच की खिड़की के किनारों पर बड़ी नफासत से पाउडर की एक धुंधली सी बारीक पर्त फैलाई जिसने फैलते ही अपना काम बखूबी किया और अब खिड़की के किनारों पर धूसर और मटमैले रंग के ग़ैरसिलसिलेवार धब्बे से उभर आये थे जिनमे से कुछ धब्बों और खिड़की की चौखट से उनकी दूरी को उसने एक पॉकेट रूल की सहायता से माप लिया और अंतिम बार उसने पायदान पर निगाह फिराते हुवे बताया की उसका काम अब खत्म था I

जब हम वापस लौट रहे थे तो हमारी निगाह अचानक एक मजदूर जैसे दिखने वाले व्यक्ति पर पडी जो नजदीक के अन्य कोच के ‘चेयर्स’ और ‘स्लीपर्स’ का कुछ अतिरिक्त सावधानी से ही मुआइना कर रहा था I

“ क्या यह पटरियों की मरम्मत करने वाले मजदूरों में से कोई है? ” – थार्नडाइक ने स्टेशन मास्टर से पुछा

“ जी हाँ, यह उस गैंग का फोरमैन है”

“ तुम लोग धीरे धीरे आगे चलो मैं अभी आया ” – कहते हुवे थार्नडाइक तेजी से पीछे मुड़ा और जाकर उस व्यक्ति से कुछ पलों तक बात चीत करता रहा और वापस आकर बोला – “ शायद स्टेशन पर कोई पुलिस इंस्पेक्टर खड़ा है ”

“ हाँ, दिख तो रहा है ” – स्टेशन मास्टर ने उस ओर देखते हुवे जवाब दिया – “ शायद वह यह जानने आया है की आप किस फिराक में हैं ”

करीब आकर उसने हम लोगों को अपना परिचय दिया और आने का मकसद भी बताया और पूछा – “ क्या आप आलाए क़त्ल देखना चाहेंगे ?”

“ छाते की नोंकदार कील ”- थार्नडाइक ने संशोधन किया – “ हाँ जरूर देखूंगा…..अभी तो हम लोग ‘मोर्चुअरी’ जा रहे हैं ”

“ तब तो आप लोग रास्ते में पुलिस स्टेशन से ही होकर गुजरेंगे…..बेहतर होगा की आप मेरे साथ वहां तक चले चलें ”

हम लोगों ने उसका यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और पुलिस स्टेशन की ओर चल पड़े I स्टेशन मास्टर भी साथ में चिपक लिया था और उसके चेहरे से लग रहा था की वह उत्तेजना से मरा जा रहा है I पुलिस स्टेशन पहुंचकर इंस्पेक्टर ने लगभग फ़ौरन ही मुलजिम से बरामद साजोसामान हमें दिखाया और ड्रामेबाज़ी के अंदाज़ में कहने लगा – “ हम ये इलज़ाम नहीं सुनना चाहते कि हमने पक्षपात किया और बचाव पक्ष को पूरा मौका नहीं दिया…..यहाँ पर मुलजिम से बरामद सारा साजो सामान मौजूद है और ये रहा आलाए क़त्ल ” – कहते हुवे उसने पास की मेज़ से एक लम्बा सा डंडा जैसा उठा लिया I

थार्नडाइक ने मुस्कुराते हुवे उसके हाथों से मजबूत ‘ऐशवुड’ के बने उस कथित ‘आलाए क़त्ल’ को लेकर    एक लेंस की सहायता से बारीक मुआइना किया …..कुछ देर हर कोण से देखने के बाद उसने जेब से एक स्टील का ‘कैलिपर – गेज़’ निकाला और उस ‘नोंकदार कीले’ के व्यास के साथ साथ उस लम्बे डंडे का भी व्यास नोट किया जिसके सिरे पर वह ‘नोंकदार कीला’ लगा हुआ था I इन कामो से फारिग होकर उसने इंस्पेक्टर से कहा – “ हो सके तो अब ‘कलर बॉक्स’ और ‘स्केचबुक’ के भी दर्शन करवा दीजिये ”

इंस्पेक्टर ने चिर परिचित मुस्कुराहट के साथ ‘माँगी गयी चीज़’ के भी दर्शन करवाए I

“ वाह !!!! क्या बात है !!!! बहुत खूब !!!! – मि० स्टॉपफ़ोर्ड ! आपका भाई तो बहुत ही नफासत पसंद है – थार्नडाइक के मुह से तारीफ निकले बगैर न रह सकी…हम सभी उसके रख रखाव से प्रभावित हुवे थे – “ हर चीज़ सिलसिलेवार पूरी तरतीब के साथ रखी हुई….सारी टियूब्स अपनी निर्धारित जगहों पर, रंगों को मिलाने वाली सभी ‘पैलेट नाइव्स’ साफ़ चमकती हुईं, पैलेट्स भी बखूबी धुली हुईं, ब्रश भी पूरी सफाई से साफ़ किये हुवे – कहीं भी रंगों की वजह से चिपचिपाहट नहीं – वाह, ये सब तारीफ के काबिल है ”- थार्नडाइक ने तारीफ में कोई कसर न छोड़ी थी I

उसने स्केच उठाया और कुर्सी पर खड़ा कर दिया जहाँ भरपूर प्रकाश पड़ रहा था और पीछे हटकर उसे निहारने लगा – “ आप बता रहे थे की उसने सिर्फ तीन घंटों तक स्केच बनाया था ?” – उसके स्वर में आश्चर्य था – “ अगर आप सही कह रहे हैं, तो आपका भाई जीनियस है, भला तीन घंटों में कोई इतनी खूबसूरत और दिलकश पेंटिंग बना सकता है !!!!, भई, कमाल हो गया ”- उसने मुक्तकंठ से प्रशंसा की थी I हम सभी तारीफी निगाहों से उस कलाकार का काम देख रहे थे जो फिलहाल अभी एक मुलजिम की हैसियत से गिरफ्तार था I यह सब देखकर मेरा मन बतौर एक ‘बेरहम कातिल’ उसका तसव्वुर कर पाने में खुद को नाकामयाब पा रहा था I

“ मेरा भाई हर काम को पूरी नफासत और रफ़्तार से करने में माहिर है ” – स्टॉपफ़ोर्ड ने दुःख भरे लहजे में जवाब दिया

“ हाँ, लेकिन यह काम न केवल अपने बनाये जाने की रफ़्तार की वजह से काबिले तारीफ है, बल्कि उसकी प्रफुल्लित ह्रदय के साथ लगायी हुई लगन, गहरे जज्बातों में डूब कर की गयी मेहनत और जुनून की हद तक अपनी कला के प्रति समर्पण भाव की वजह से भी तारीफी निगाहों के काबिल है I लेकिन हम लोग यहाँ बैठकर केवल उसकी शान में कसीदे पढ़ते ही नहीं बैठ सकते, अभी बहुत काम बाकी हैं ”- कहते हुवे थार्नडाइक ने स्केच को पूर्ववत लपेटा और दराज़ में पड़े उस ‘तकरार की जड़’ लॉकेट और अन्य चीज़ों का सरसरी तौर पर जाएजा लेकर इंस्पेक्टर को शुक्रिया कहा और वहां से विदा ली I स्टेशन मास्टर भी हम लोगों से अलग होकर वापस स्टेशन की ओर चला गया था I

“ वह खामोश मगर जिंदगी से भरा हुआ ‘स्केच’ और वह ‘कलर बॉक्स’, ऐसा लग रहा था मानों वे अपने भीतर छुपे कुछ जज्बातों को मेरे सामने अल्फाज़ देने की कोशिश कर कर रहे हों ” – रास्ते में थार्नडाइक ने गंभीर होते हुआ कहा

“ मैं भी ऐसा ही कुछ सोच रहा हूँ ” – स्टॉपफ़ोर्ड ने टूटी आवाज़ में कहा – “ शायद ‘वे’ यह जताना चाह रहे हों कि जिस तरह ‘वे’ इस पुलिस स्टेशन की एक धूल खायी मेज़ के दराज़ में बगैर किसी खता के ‘ताले चाभी’ से क़ैद हैं, उसी तरह उनका ‘वह मालिक’, जिसके हाथों में आकर वे तरह तरह के रंग बिरंगे जज्बातों की दिलकश तामीर किया करते थे, आज ‘उन्ही’ की ही तरह बगैर किसी खता और कसूर के जेल की सलाखों के पीछे ‘ताले चाभी’ की क़ैद में है ”

उसने एक ठंडी सांस भरी I हम लोग ख़ामोशी से रास्ता तय करते गए I

‘मुर्दाघर’ के गार्ड को हमारे पहुँचने की शायद पहले से ही खबर थी, तभी वह दरवाज़े पर चाभी लिए हमारी ही प्रतीक्षा में खड़ा था और जब उसे ‘कॉरोनर’ का ‘आज्ञा पत्र’ दिखाया गया तो उसने फ़ौरन ही दरवाज़ा खोल दिया और हम सभी एक साथ अन्दर आ गए I मगर अन्दर घुसते ही बीचो बीच एक मेज़ पर सफ़ेद कफ़न जैसी चादर में लिपटी लेटी हुई लाश, कमरे में व्याप्त अजीब सा भुतहा सन्नाटा, और वहां की हवा में रची बसी एक अलग सी बास ने मिलकर लगभग फ़ौरन ही स्टॉपफ़ोर्ड पर एक अलग सा  असर किया जिससे वह एकदम पीला पड़ गया और लगभग कांपती टांगों के साथ यह कहते हुवे बाहर चला गया कि वह बाहर गार्ड के साथ हमारा इंतेज़ार करेगा I

जैसे ही मैंने दरवाज़े को अन्दर से बंद किया, थार्नडाइक ने उत्सुकता से उस सफ़ेद चूना पुती, खाली सी ईमारत में चारों ओर निगाह दौड़ाई I एक झरोखे से सूरज की किरणें सीधे मेज़ पर सफ़ेद कपडे में लिपटी उस आकृति पर पड़ रही थी जो अब कैसी भी प्रतिक्रिया देने के लिए हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थी I झरोखे से ही आती हुई एक किरण भटककर दरवाजे के पास के उस कोने की तरफ बिछल गयी थी जहाँ एक कतार में कई खूँटियाँ लगी हुई थीं और एक मेज़ रखी हुई थी जिस पर मृतका के कपड़े वगैरह  रखे हुवे थे I

“ जर्विस, इस मेज़ और पास में इन खूंटियों पर टंगी इन बेज़ान सी चीज़ों में भी जिंदगी साँसे लेती दिखाई पड़ रही है, वे सभी मुझसे मुखातिब होकर कुछ कह रहे हैं, जिसकी धमक मैं अपने भीतर महसूस कर रहा हूँ, मगर लफ़्ज़ों में बयान नहीं कर पा रहा हूँ ” – थार्नडाइक ने कहा, जब हम उस कोने में खड़े थे जहाँ मृतका के शरीर से उतारे हुए कुछ कपड़े कतार में लगी हुई खूंटियों पर टंगे थे और कुछ वहीँ पास की एक मेज़ पर रखे हुए थे I

“ उस मेज़ पर पडी हुई वह बेहिस और खामोश लाश जितना कुछ बयाँ कर रही है, तो कहीं उतनी ही शिद्दत से ये सारी चीज़ें भी अपने भीतर के गहरे दुःख को मेरे सीने के भीतर छुपे जज्बातों के साथ मथ रही हैं I उस भड़कीले और फैशनेबल हैट की ओर देखो, उस कीमती स्कर्ट को तो देखो जो वहां टंगी है – कितनी दुःख में डूबी, सूनी सूनी, खाली खाली और उजाड़ सी पड़ी है; इन सजीले और सुरुचिपूर्ण अधोवस्त्रों की ओर देखो, जिन्हें इस वक़्त इस मुर्दाघर के गार्ड की बीबी ने बड़ी नफासत से सहेज कर रख दिया है, और मुझे उम्मीद है की इनके साथ वो खुली खुली सी सजीली मखमली जुर्राबें भी होंगी – इस वक़्त कितनी ग़मगीन और मुरझाई सी नज़र आ रही हैं कि कभी इनके भीतर एक भरा भरा और मखमल सा नाज़ुक, एक साँसे लेता हुआ वजूद,  हँसता मुस्कुराता अपनी पूरी हरारत के साथ लहकता था I देखो कितने दयनीय और भावपूर्ण तरह से ये सब एक उस वजूद की याद दिला रहे हैं – कभी जिसके स्त्रीत्व के अभिमान के ये भी एक अहम् हिस्से हुआ करते थे – एक मासूम, खुशमिजाज़ और अल्हड़ सी नदी की तरह बल खाती सी जिन्दगी के हिस्से – और देखो कितनी बेरहमी से सिर्फ पलक झपकते ही वह जिन्दगी छीन ली गयी – अभी थी…अब नहीं है I लेकिन जार्विस, हमें जज्बाती तो बिलकुल भी नहीं होना चाहिए क्यूंकि एक और जिन्दगी दांव पर लगी है, और हम उसके मुहाफ़िज़ हैं ” – वह जज्बाती हो उठा था, मगर संभल गया था…. और मैं ?…..मैं—- भौंचक्का सा खड़ा उसका मुँह देख रहा था I

उसने हैट को खूँटी पर से उतारा और हाथों में उलट पुलट कर देखा I यह महीन रेशमी कपडे पर फीतों और पंख की सहायता से बनाया गया एक बड़ा और चपटे किनारों वाली किस्म का ‘पिक्चर हैट’ था जिसके ऊपर गहरे नीले रंग के ‘झिलमिल सितारों’ से चमकीली सजावट का सघन काम किया गया था I हैट के किनारे के एक हिस्से में एक ‘दांतेदार और उधडा सा’ छिद्र हुआ पड़ा था जिसमे से हैट के हिलने डुलने से चमकीले सितारे भरभरा कर झड़ी की तरह बिखर रहे थे I

“ यह कुछ बायीं तरफ झुकाते हुए पहना गया होगा ” – थार्नडाइक ने कहा –“ क्यूंकि इसके सामान्य आकार और इसमें हुए इस छेद की मौजूदा स्थिति से यही जाहिर होता है ”

“ हाँ, लग तो यही रहा है ”- मैंने भी उसके अंदाज़े की तस्दीक की  – “ शायद बिलकुल उस तरह से पहना गया था जैसे ‘गैन्सबरो’ के पोर्ट्रेट में ‘डचेज़ आफ डेवोनशायर’ ने पहना हुआ है I”

“ एग्जैक्टली ”

उसने हैट को हिलाकर कुछ ‘सितारे’ अपनी हथेली पर गिराए और हैट को खूँटी पर वापस टांग दिया I हथेली पर गिरे उन सितारों को उसने एक लिफ़ाफ़े में डालकर उस पर ‘हैट से मिले’ लिखकर जेब में रख लिया I फिर आहिस्ता से वह उस मेज़ की ओर बढ़ा जिस पर मकतूला की लाश सफ़ेद चादर से ढंकी रखी थी I उसने निहायत ही मुलायमियत और पूरे सम्मान के साथ लाश के चेहरे पर से चादर सरकाई और उसकी ओर देखते ही उसके चेहरे पर गहन पीड़ा के भाव उत्पन्न हुवे I वह किसी की भी आँखों में देखते ही बस जाने वाला संगमरमर की तरह सफ़ेद एक सुन्दर चेहरा था जो अपनी अधखुली आँखों से और ख़ामोशी के लगभग जम चुके भावों के साथ उसकी ओर झाँक रहा था I उसके बालों की रंगत ताम्बे की तरह पीली थी I मगर इस पूरी सुन्दरता को एक लम्बे से जख्म के निशान ने हर सा लिया था जो दाहिने गाल पर आँख के नीचे से ठुड्डी की तरफ आधी खरोंच और आधे चीरे जैसी शक्ल में लम्बाई में फैला हुआ था I

“ खूबसूरत लडकी थी ” – थार्नडाइक ने अफ़सोस जताते हुवे कहा –“ एक काले बालों वाली खूबसूरत लडकी…..पता नहीं क्यूँ इसने अपने खूबसूरत बालों को इस तरह रंग कर ख़राब कर लिया था ” – वह उसके माथे पर बिखरे बालों में अपनी अंगुलियाँ फिराते हुवे बोला – “ उसने तकरीबन १० दिनों पहले ही अपने बालों की रंगत बदली थी क्यूंकि जड़ों के पास इस वक़्त लगभग चौथाई इंच बालों की रंगत काली नज़र आ रही है I इसके गाल पर बने इस निशान के बारे में तुम्हारे क्या ख्यालात हैं ?”

“ निशान देखकर तो यही लगता है कि गिरते समय वह कोच में किसी सीट के तेज़ और तीखे किनारे से टकरा गयी हो, मगर प्रथम श्रेणी की सभी सीट्स गद्देदार ही होती हैं, तो फिर पास में भला और ऐसा क्या हो सकता है ?” – मैंने कुछ कुछ उलझते हुए जवाब दिया – “ इसलिए यह अंदाज़ा लगाना मेरे लिए मुमकिन नहीं है कि असल में यह निशान आया कैसे ?”

उसने इस बात का कोई जवाब न दिया और मुझे अपनी नोटबुक देकर बोला – “ मैं जिस्म पर मौजूद चोटों और जख्मों को देखता हूँ और तुम वह सब कुछ नोट कर लो जो मैं बताऊँ”

मैंने उसके बताये हुवे विवरणों को नोट करना शुरू किया – “ खोपड़ी में बाएं कान के पिछली तरफ ऊपरी किनारे की ओर एक स्पष्ट झरोखेनुमा गोल छेद – व्यास १.४३८ इंच, सिर की पार्श्विका हड्डी (परायटल बोन) में ‘फ्रैक्चर’, सिर के अन्दर की सुरक्षात्मक झिल्ली में छेद, और मष्तिस्क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त, बायीं आँख के कोटर (ऑर्बिट) के किनारे से सिर की खाल उधड़ी हुई, घाव के किनारों पर महीन रेशम के कपड़े के रेशों और सितारों की मौजूदगी I

“ मेरे ख्याल से इतना काफी है…..और फिर बाकी की जानकारियों के लिए डा० मार्टन भी तो हैं….हम उनसे भी पूछताछ कर सकते हैं ” – मैंने सुझाया

उसने कैलिपर और स्केल को जेब में रखा और लाश के सिर में से दो तीन बाल उखाड़कर सितारों वाले लिफ़ाफ़े में डाल लिए I अगले कुछ क्षणों तक उसने लाश पर अन्य चोटों की मौजूदगी की तलाश करने की कोशिश की, मगर कहीं भी कोई अन्य चोट, खरोंच या जख्म का निशान न पाकर उसने लाश को फिर उसी सफ़ेद चादर से ढँक दिया और हम दोनों बाहर निकल गए I

जब हम मुर्दाघर से चले तो थार्नडाइक अभी तक खामोश था और गहरी सोचों में डूबा हुआ था मानो वह मन ही मन अब तक प्राप्त सभी जानकारियों को अपने दिमाग के भीतर सिलसिलेवार तरतीब दे रहा हो और इस ‘जिग्सा पजल’ जैसी घटना के बिखरे हुवे अन्य टुकड़ों को उनके सही खांचों में बिठाने की मशक्कत कर रहा हो I काफी देर तक उसे यूँ ही खामोश और गुम सा देखकर स्टॉपफ़ोर्ड से न रहा गया, वैसे भी वह कई बार उसके चेहरे की ओर कुछ बोले जाने की उम्मीद में ताक चुका था, लेकिन थार्नडाइक को कुछ भी बोलता न पाकर उसकी ये ख़ामोशी उसे अखर सी गयी थी – “ पोस्टमार्टम ३.०० बजे होगा, और अभी सिर्फ ११.३० ही बजे हैं, आप तब तक क्या करेंगे ?”

थार्नडाइक उसकी आवाज़ सुनकर अपनी अवस्था से बाहर आया और एकाएक बोला -“ अरे पोस्टमार्टम के ज़िक्र से मुझे याद आया कि मैं अपनी किट में ‘ओक्स – गाल’ तो लाना भूल ही गया हूँ I” [ ओक्स – गाल (ox – gall) – भूरे हरे रंग का एक तरल जो बैल या गाय के पित्त रस में अल्कोहल मिलाकर बनाया जाता है, और जिसका प्रयोग ‘वाटर कलर पेंटिंग’, ‘लिथोग्राफी’ वगैरह में गीलेपन को बरक़रार रखने के लिए किया जाता है – अनुवादिका ]

“ ओक्स- गाल !!!!! ” – मैंने लगभग चीखते हुए पूछा और मन ही मन इस चीज़ का ताअल्लुक किसी ख़ास ‘पैथोलॉजिकल टेस्ट’ से जोड़ने की नाकाम सी कोशिश की – “ अब भला ये क्या चीज़ है यार ? और इसकी जरूरत कहाँ पड़ गयी तुम्हे ? ” – लेकिन फ़ौरन ही मैंने अपने होंट काटे, क्यूंकि मुझे लगभग फ़ौरन ही याद आया की उसे मेरा इस तरह उसके तौर तरीकों के बारे में किसी के सामने मुँह फाड़ना कभी भी रास नहीं आता था I

उसने मेरी बातों पर ध्यान नहीं दिया था और स्टॉपफ़ोर्ड से पूछ रहा था – “ क्या यहाँ आसपास कोई पेंटर या ऐसी कोई दुकान वगैरह है जहाँ रंग और पेंटिंग वगैरह का सामान मिलता हो?”

“ इस छोटी सी जगह पर तो ऐसा कोई नहीं है, न ही ऐसी कोई दुकान ही है ” – स्टॉपफ़ोर्ड ने जवाब दिया – “ लेकिन अगर आपको ‘पित्त रस’ ही चाहिए तो यह तो आपको किसी ‘कसाई’ के पास भी मिल सकता है I वो देखिये सामने सड़क के उस पर कसाई की दुकान भी है”- उसने सड़क के पार एक दुकान की ओर इशारा किया जिसके ऊपर चमकदार सुनहरे अक्षरों में ‘ फेल्टन’ लिखा हुआ था I

“अगर उस कसाई के पास यह मिल भी गया, तो भी उसे इस्तेमाल के लायक बनाने के लिए मगजमारी करनी पड़ेगी I लेकिन देखो पहले यह मिले तो सही, क्यूंकि इसके बगैर मेरी गाड़ी अटक ही गयी समझो” – थार्नडाइक ने तेज़ी से सड़क पार करते हुए कहा

दुकान के पास एक व्यक्ति खड़ा था जिसने पूछने पर बताया की वही प्रोप्रराइटर था I थार्नडाइक ने उससे अपनी जरूरत बताई जिसे सुनकर वह बोला – “ पित्त रस ? नहीं जनाब, अभी तो इसका इंतेज़ाम करना मुमकिन नहीं है, लेकिन अगर आप दोपहर बाद तक इंतज़ार कर सकें तो मैं कुछ कर सकता हूँ”- फिर कुछ सोचकर वह बोला – “ लेकिन अगर आपको फ़ौरन ही इसकी जरूरत है तो आप कहें तो मैं अभी कुछ करता हूँ ”

वह आदतन एक खुशमिजाज शख्स था, थार्नडाइक चहक उठा – “ओह ! बहुत बहुत शुक्रिया आपका, लेकिन अगर आपको ज़हमत न हो तो क्या मैं एक निगाह उन जानवरों पर डाल सकता हूँ ? दरअसल मुझे जो चाहिए उसके लिए जानवर का बेहद तंदरुस्त होना जरूरी है ”

“ हाँ बिलकुल, मेरे पास मौजूद सभी जानवर बेहद तंदुरुस्त हैं, और मैं खुद ही उनकी देख रेख भी करता हूँ, फिर भी आइये आप भी देख लीजिये, इसमें ज़हमत की कोई बात नहीं ”

“ ओह ! एक बार फिर से आपका शुक्रिया, आपने मेरा काम एकदम आसान कर दिया है ” – थार्नडाइक ने गर्मजोशी से कहा – “ आप बस एक मिनट ठहरें, मैं बाजू की केमिस्ट शॉप से एक शीशी लेकर आता हूँ फिर आपके साथ चलता हूँ ” – कहकर वह तेजी से पास की एक केमिस्ट शॉप की ओर गया और लगभग फ़ौरन ही उलटे पांव एक सफ़ेद कागज़ के पार्सल के साथ वापस आया I कसाई अपनी दुकान के बगल से लगी हुई एक संकरी गली में ले गया जो आगे एक अहाते तक गयी थी I उस अहाते में एक छोटा सा बाड़ा बना हुआ था जिसकी छोटी सी जगह पर लगभग एक जैसे काले चमकदार बालों और लम्बे भूरे तकरीबन सीधे सींगों वाले तीन हृष्ट पुष्ट बछड़े बंधे हुए थे I

“ इसमें कोई दोराय नहीं कि यह सभी काफी तंदरुस्त दिखाई पड़ रहे है, मि० फेल्टन, आपने वाकई काफी अच्छे से देखभाल की है ”- थार्नडाइक ने बाड़े के नजदीक पहुंचकर किनारे से अन्दर की ओर लगभग झुकते हुए कहा I उसकी निगाहें खासतौर से बाड़े में मौजूद बछड़ों की आँखों और सींगों पर जमी हुई थी I बाड़े के सबसे नजदीक वाले जानवर पर ध्यान केन्द्रित करते हुए उसने पास में पड़ी एक छड़ी उठाकर उसके दाहिने सींग के निचले हिस्से पर हलके से थपकी देते हुए मारी और यही प्रक्रिया उसने बाएं सींग के साथ भी दोहराई – बछड़ा यूँ ही बगैर हिले डुले हतप्रभ सा खड़ा रहा I

“ सींगो का जाएजा लेकर काफी हद तक किसी जानवर की सेहत का अच्छी तरह अंदाज़ा लगाया जा सकता है ” – उसने अपनी इस अजीबोगरीब हरकत की वज़ह पेश की और दूसरे बछड़े की ओर अपना ध्यान आकर्षित किया

“ आप क्या मज़ाक कर रहे हैं, सर ” – फेल्टन ने आश्चर्य से कहा – “ जहाँ तक मुझे पता है जानवरों के सींग में ‘सेंस्टिविटी’ (संवेदनशीलता) होती ही नहीं है, भला सींग से किस तरह यह पता लगाया जा सकता है ? वो भी इस तरह छड़ी से ?

उसका कहना बिलकुल सही ही था क्यूंकि दूसरे बछड़े ने भी पहले वाले से कोई अलग हटकर अपनी प्रतिक्रिया न दी थी – जब थार्नडाइक ने अपनी छड़ी से उसी तरह दोनों सींगों पर चोट की थी – दूसरा बछड़ा भी बगैर हिले डुले चुपचाप खड़ा रहा  था I जाहिर था की सींगों पर हुई उस चोट का उसे कोई एहसास तक न हुआ था I

थार्नडाइक अब तीसरे बछड़े की ओर मुड़ गया और हम सब उत्सुकता के चलते बाड़े के बिलकुल नजदीक आ गये थे और तभी हमने देखा कि जैसे ही थार्नडाइक ने अपनी छड़ी से उसके दायें सींग पर हल्की सी चोट की तो वह बछडा फ़ौरन ही चिहुंककर पीछे की ओर हट गया, और जब उसके सींग पर दोबारा छड़ी से प्रहार हुआ तो साफ़ तौर पर स्पष्ट हो गया कि वह अब बुरी तरह से असहज हो उठा था I

“ अरे !!! ये भला कैसे हो सकता है ?” – फेल्टन की हैरत का ठिकाना न था, वह मुँह बाए उसी ओर ताक रहा था – “ ये बिलकुल नयी बात देख रहा हूँ, ये ऐसा क्यूँ कर रहा है ?”

थार्नडाइक ने अब बाएं सींग पर प्रहार करने हेतु छड़ी उठायी…बछड़ा फ़ौरन ही चौंककर पीछे की ओर हटा…उसकी पुतलियाँ भय से फ़ैल गयीं थीं, और वह हौले हौले ऐसे रंभा रहा था, मानो दर्द की अधिकता से कराह रहा हो I चेहरे पर खौफ़ और दर्द के भाव लिए वह अपना सर जोर जोर से इधर उधर हिला रहा था ….पीछे हटने के लिए अब उस बाड़े में जगह भी नहीं थी….थार्नडाइक अब बाड़े के किनारे पर लगभग भीतर की तरफ झूल सा गया था, और अब उस सींग का नजदीकी मुआइना कर रहा था, जिसकी इस अतिरिक्त संवेदनशीलता ने हम सबको हैरत में डाल रखा था I

“ यह ठीक तो है ?”- कसाई फेल्टन ने व्याकुल भाव से पूछा I शायद वह मन ही मन बछड़े को बीमार समझकर उसे अपने ‘पेशे’ में हुए ‘नुकसान’ के तौर पर ले रहा था I

“ अभी कुछ कहा नहीं जा सकता…हो सकता है कि अभी केवल सींग में ही दिक्कत हो…आगे कुछ कहने के लिए मुझे और भी जांचे करनी पड़ेंगी ”- थार्नडाइक ने जवाब दिया – “ अगर आप इस सींग को जड़ से काटकर मेरे पास होटल तक भिजवा दें तो मैं जांच करके कुछ बता सकता हूँ I तब तक मैं इसे पूरी तरह ढँक देता हूँ जिससे इस सींग पर दूसरी कोई नयी चोट चपेट न लग जाए …क्यूंकि सींग की जांच ऐसी ही हालत में करना बेहतर रहेगा जैसा यह इस वक़्त है ” – कहकर उसने केमिस्ट शॉप से साथ लाये पार्सल में से एक चौड़े मुँह वाली शीशी जिसपर ‘ओक्स – गाल’ लिखा एक स्टीकर चिपका हुआ था, ‘गटा पारचा पेपर’ की शीट, एक पट्टियों का रोल और सील करने के लिए ‘लाख़ की एक स्टिक’ निकाली और तकरीबन आधे से ज्यादा सींग को ‘गटा पारचा पेपर’ और ‘पट्टियों’ की मदद से मजबूती के साथ लपेटकर लाख़ स्टिक से सील कर दिया I

“ मैं इस सींग को आपके कहे मुताबिक़ निकालकर और इस शीशी में आपकी जरूरत का ‘सामान’ भरकर आधे घंटे के भीतर आपके होटल पहुँचता हूँ ”

वह अपने वादे का पक्का निकला I आधे घंटे बाद ही हम सब अपने होटल ‘ब्लैक बुल’ के ‘प्राइवेट रूम’ में थे और थार्नडाइक खिड़की से लगी एक छोटी मेज़ के पास बैठा था जिस पर एक अखबार बिछा हुआ था और उस पर फेल्टन का लाया सींग और थार्नडाइक का ‘ट्रेवलिंग केस’ रखा हुआ था जिसमे हमेशा तफ्तीश के काम आने वाले उपकरणों की एक किट मौजूद रहा करती थी I उस वक़्त मेज़ के बीचों बीच एक छोटा ‘माइक्रोस्कोप’ रखा हुआ था I फेल्टन करीब ही एक आर्मचेयर पर चेहरे पर गहन उत्कंठा के भाव लिए थार्नडाइक की रिपोर्ट के इंतज़ार में बैठा था I और मैं मि० स्टॉपफ़ोर्ड के साथ हंसी मजाक करते हुए उनके मन को बहलाने की कोशिशों में लगा था क्यूंकि वह चेहरे से काफी टूटे हुए और उदास से नज़र आ रहे थे I पता नहीं क्यूँ उन्हें हमारी इतनी कोशिशों के वाबजूद भी अपने भाई को बेगुनाह साबित कर पाने में संदेह सा हो रहा था I मैं बातचीत करते हुए नज़र उठाकर बार बार थार्नडाइक की ओर भी देखे जा रहा था I

उसने सींग पर से लपेटी हुई सारी पट्टियां और पेपर हटाये और सींग को कान के पास लाकर हौले हौले हिलाकर कुछ सुनने की कोशिश करने लगा, फिर एक लेंस की मदद से उसने पूरे सींग के हर कोने खुदरे का मुआइना किया I मैंने देखा कि उसने सींग के अगले नोकदार सिरे से कुछ खुरच कर एक शीशे की स्लाइड पर डाला, और उस पर कुछ बूंदे किसी तरल रसायन की डालकर ‘विशेष सुइयों’ की सहायता से उसे हिलाया डुलाया और स्लाइड को सावधानीपूर्वक माइक्रोस्क्रोप के नीचे रखकर उसका निरीक्षण करने लगा I एक दो मिनट वह ख़ामोशी से ऐसे ही स्लाइड को देखता रहा फिर एकाएक मेरी ओर गर्दन घुमाकर आश्चर्यमिश्रित आवाज़ में बोला – “ जल्दी आओ जार्विस, और देखो इसे ”

मैंने उत्सुकता से भरकर लगभग फ़ौरन ही माइक्रोस्कोप की ‘आई पीस’ में नज़रें गड़ा दीं I

“बताओ …क्या दिखाई पड़ रहा है ?” उसने पूछा

“ एक मल्टीपोलर नर्व कार्पसल ( बहुध्रुवीय तंत्रिका कण )…. काफी सूखे और अस्पष्ट से हैं मगर इसमें कोई शक नहीं कि मैंने पहचानने में कोई गलती की है ”

“ अब ये देखो ” – उसने स्लाइड को दूसरी जगह स्थिर किया

“ दो पिरामिडल नर्व कार्पसल (पिरामिडीय तंत्रिका कण) और किसी चीज़ के कुछ रेशे” – मैंने जवाब दिया I हालांकि स्लाइड में यह सब देखकर मुझे हैरत हो रही थी

“ अब ये भी बता दो प्यारे जार्विस, की ये कण जिस्म के किस अंग के ऊतकों के हिस्से हैं ?”

“ निःसंदेह …कार्टीकल ब्रेन सब्सटांस ” [ दिमाग के एक अहम् हिस्से में मौजूद नसों के जाल का एक हिस्सा ( कार्टिकल  – दिमाग का वह हिस्सा जो हमारी याददाश्त, विवेक, विचार, ध्यान, एकाग्रता, अनुभव शक्ति इत्यादि के सिलसिले में कार्य करता है I मोटे तौर पर सेरेब्रल कोर्टेक्स के किसी भी हिस्से को कार्टीकल रीजन कहा जा सकता है ) –अनुवादिका ]

“ मैं पूरी तरह सहमत हूँ मेरे दोस्त ” – उसने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा और मि० स्टॉपफ़ोर्ड की ओर मुड़ा –“ अब मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूँ कि यह केस अपने अंजाम तलक पहुँच चुका है और बचाव पक्ष पूरी मजबूती के साथ अपनी बात रख सकता है ”

“ भगवान् के लिए पहेलियाँ मत बुझाइए, क्या कहना चाहते हैं आप ? – स्टॉपफ़ोर्ड ने खड़े होते हुवे कहा

“ मेरे कहने का मतलब यह है कि अब हम यह साबित कर सकते हैं कि कहाँ और कैसे मिस ग्रांट की मृत्यु हुई I आप पहले बैठ जाइए मैं आपको पूरी बात समझाता हूँ ”- उसने स्टॉपफ़ोर्ड से कहा और फेल्टन की ओर देखते हुए कहने लगा – “ मि० फेल्टन आप भी बैठिये, शायद आपकी भी गवाही हेतु सम्मन जारी करना पड़े – तो बेहतर यही रहेगा कि हम पहले सभी उपलब्ध तथ्यों पर तबसरा कर लें और किसी नतीजे पर पहुंचे ”- उसने ठहरकर सबकी ओर देखा फिर सबका ध्यान अपनी ही ओर लगा पाकर कहना शुरू किया –

“ सबसे पहले मकतूला के जिस्म की बरामदगी के वक़्त उसकी स्थिति – वह फर्श पर गिरी पड़ी थी और उसके पैर दाहिने ओर के दरवाज़े के साथ लगभग सटे हुए थे – इस से यह पता चलता है कि जब वह गिरी थी तो वह उस दरवाज़े के पास या तो बैठी थी या फिर ज्यादा संभावना इस बात की है कि वह खड़ी थी I अगली चीज़ यह है ” – उसने जेब से मुड़ा हुआ कागज़ निकाला और उसमे से एक नन्हा सा ‘झिलमिल सितारा’ निकालकर दिखाया – “ यह उन्ही ‘सितारों’ में से एक सितारा है जिनका काम बतौर सजावट उस हैट पर किया गया था, और लिफाफे में ऐसे और भी हैं जो मैंने उस हैट से निकाले थे I यह जो ‘सितारा’ आप लोग देख रहे हैं, उसे मैंने कोच के निरीक्षण के दौरान पिछले सिरे पर मौजूद दाहिने पायदान से उठाया था, और वहां पर इसकी मौजूदगी यह साबित करती है कि किसी वक़्त मिस ग्रांट ने उस तरफ की खिड़की से सिर को बाहर निकाला था I

“ उपलब्ध तथ्यों और सुरागों में से अगला सुराग मैंने कोच के निरीक्षण के दौरान दाहिनी ओर की खिड़की के किनारे से पाया था जो उस हलके से पाउडर की महीन पर्त के छिडकाव के कारण खिड़की के किनारों पर उभर आये थे और खिड़की की चौखट से सवा तीन इंच की दूरी पर थे I

“ अब कुछ सुराग मकतूला के जिस्म से – खोपड़ी में हुआ घाव बाएं कान के पीछे की तरफ थोडा ऊपर हटके है जो मोटे तौर पर लगभग गोलाकार है और जिसका व्यास १.४३८ इंच है और एक सिर की खाल को उधेड़ते हुवे कट का निशान यहाँ से होकर बायीं आँख के पास तक गया है I दाहिने गाल पर एक लम्बाई में फैला हुआ और सवा तीन इंच लंबा एक खरोंचनुमा ‘कनटियूज्ड वुंड’ है I इसके अलावा पूरे जिस्म पर कहीं कोई चोट या खरोंच तक नहीं है I ”

“ मेरा अगला और सबसे अहम् सुराग यह है ” – उसने सींग को उठाकर उँगलियों से ठकठकाते हुवे कहा I वकील और फेल्टन दोनों ही मुँह बाए उसे देख रहे थे और दोनों के ही मुँह से कोई लफ्ज़ नहीं निकल रहा था I वे मंत्रमुग्ध से थार्नडाइक को सुने जा रहे थे जो अब कह रहा था – “ आप लोगों ने ध्यान दिया होगा कि यह बाँयां सींग है और आपको याद भी होगा कि उस बछड़े का यही सींग कुछ ज्यादा ही  संवेदनशील था I अगर इस सींग को जरा सी हरकत दी जाए तो इसके अंदरूनी हिस्से से फ्रैक्चर की आवाज़ को बड़ी आसानी से कान लगाकर साफ़ सुना जा सकता है I अब इसके नुकीले सिरे की ओर देखो जहाँ इसकी लम्बाई में ढेर सारी गहरी खरोंचे नज़र आ रही हैं, और जहाँ यह खरोंचे समाप्त हुई हैं, उस जगह का व्यास कैलीपर गेज़ के मुताबिक़ १.४३८ इंच है I इन खरोंचों के ऊपर कुछ सूखे खून के धब्बे भी दिखाई पड़ रहे हैं, और इसकी नोक के बिलकुल आखिरी सिरे पर अल्प मात्रा में सूखा हुआ एक अलग किस्म का तत्व जमा हुआ है जिसका परीक्षण आप लोगों के सामने ही मैंने और मेरे सहयोगी डा० जार्विस ने किया है और इस नतीजे पर पहुंचे थे की यह तत्व कुछ और न होकर ‘मस्तिष्कीय ऊतक’ के हिस्से हैं ”

“ हे भगवान् ! ” – स्टॉपफ़ोर्ड की हैरत में डूबी आवाज़ आई – “ कहीं आपका मतलब यह तो………..”

“ पहले मुझे अपनी बात खत्म करने दीजिये, मि० स्टॉपफ़ोर्ड,” – थार्नडाइक ने उसकी बात काटी

“ अब अगर आप सभी इस सूखे खून के धब्बे को ध्यान से देखेंगे तो पायेंगे की सींग के इस हिस्से में एक बाल भी चिपका हुआ है, जिसे लेंस से देखने पर उसकी जड़ के गाँठ जैसे फूले हुवे किनारे को भी देखा जा सकता है I यह एक सुनहरी रंगत का बाल है, लेकिन जड़ के पास यह काला है और कैलीपर गेज़ के मुताबिक बालों का यह काला हिस्सा महज़ ०.२१८ इंच ही लम्बा है I मेरे पास इस लिफ़ाफ़े में कुछ ऐसे ही बाल हैं जो मैंने मुर्दाघर में मकतूला के सिर से उखाड़ लिए थे – यह बाल भी सुनहरी रंगत लिए हुए हैं, जड़ों के पास काले हैं और जब मैंने इन बालों के काले हिस्से की माप ली तो यह भी ०.२१८ इंच ही लम्बे थे I और अब ये अंतिम सुराग ”-  कहते हुवे उसने हाथ में थमें उस सींग को पलट कर उल्टा कर दिया और वहां पर एक सूखे हुए खून के छोटे से धब्बे की ओर इशारा किया जिसमे एक नन्हा सा ‘झिलमिल सितारा’ चिपका हुआ था I

मि० स्टॉपफ़ोर्ड और वह ‘कसाई’ फेल्टन सकते की सी हालत में उस सींग को एकटक निहारे जा रहे थे I थार्नडाइक को खामोश होता देख स्टॉपफ़ोर्ड अपनी उस हालत से बाहर आया और एक ठंडी सांस भरते हुवे बोला – “ बिलाशक, यह सब सुनकर बहुत अच्छा लग रहा है और यह गुत्थी भी सुलझती दिखाई पड़ रही है और मुझे कुछ उम्मीद भी नज़र आ रही है, मगर मैं अभी तक हक्का बक्का हूँ और उलझन में हूँ…क्यूंकि अभी तक पूरा किस्सा मुझे समझ ही नहीं आया है ”

“ तो अब बचा ही क्या है ? पूरा मामला शीशे की तरह साफ़ है ” – थार्नडाइक ने जवाब दिया – “ भले ही हमारे पास यही कुछ थोड़े से सुराग हैं, मगर इन सुरागों के आधार पर जो मेरी थ्योरी है वो ऐन चौकस है, और उसमे गलती की सम्भावना न के बराबर ही है, मैंने अपनी ओर से यह केस हल कर लिया है I मैं आपको अपनी थ्योरी बताता हूँ, बेहतर है आप लोग खुद ही आकलन करें ”- कहते हुवे उसने एक सादे कागज़ पर एक कामचलाऊ स्केच सा बनाया और उस पर जगह जगह अपनी अंगुली रखते हुए बोला – “ जब ट्रेन ‘वोल्डहर्स्ट’ स्टेशन के पास पहुँचने ही वाली थी, तो उस वक़्त वहां के हालात कुछ इस तरह से थे – यहाँ पर ‘प्रथम श्रेणी’ का वह यात्री कोच था, यहाँ पर जलते हुवे पुवालों के ढेर थे, यहाँ पर ‘साइडिंग’ ( मालगाड़ी से सामान उतारने या ‘शंटिंग’ के काम में आने वाली पटरियां ) पर  ‘मवेशियों से भरी मालगाडी’ का वह डिब्बा था जिसमे इस सींग वाला बछड़ा था I अब मेरी थ्योरी यह कहती है कि उस वक़्त मिस ग्रांट दाहिनी तरफ वाली खिड़की से अपना सिर बाहर निकाले खड़ी हुई थीं और बाहर पटरियों पर जलते हुए पुवालों के ढेरों को देख रही थीं I उन्होंने चौड़े किनारों वाला अपना वह हैट पहना हुआ था जो उनके माथे पर बायीं तरफ झुका हुआ था और यही वजह थी कि जब उनका कोच ‘मवेशी वाले डिब्बे’ के नजदीक आया तो वह कुछ भी न देख पायी और यूँ ही सिर निकाले खड़ी रही I और फिर वह हो गया जिसके होने के इमकान भी न थे -” उसने एक दूसरा कागज़ लिया और उस पर  बड़ा सा एक नया स्केच बनाकर बोला – “ जैसे ही मिस ग्रांट मवेशी वाले डिब्बे के सामने आई, उसी वक़्त इस बछड़े ने अपने लम्बे सींगों को एक तेज़ झटके के साथ सलाखों से बाहर की ओर झटका I उस सींग की तीखी नोक ने खिड़की से बाहर सिर निकाले मिस ग्रांट के सिर में बाएं कान के पास जोरदार टक्कर मारी जिसके प्रभाव से उसका चेहरा पूरे वेग से खिड़की के किनारे जाकर टकराया और बछड़े के सींग छुड़ाने की कोशिश ने किसी ‘हल के धारदार फल’ की ही तरह सिर की खाल को उधेड़ डाला और इस झटके नें स्वयं बछड़े के इस सींग के अंदरूनी हिस्से में भी फ्रैक्चर कर दिया I पूरे वेग से खिड़की के किनारे से टकराने और बछड़े के सींग छुड़ाने से पैदा हुए झटके के ही चलते दाहिना गाल खिड़की के तीखे किनारों पर रगड़ गया जो मृतका के चेहरे पर दाहिने गाल पर ‘कांटियूज्ड वुंड’ की सूरत में नुमायाँ हुआ है I ये थ्योरी उपलब्ध तथ्यों और सुरागों के आधार पर सहज रूप से संभावित है क्यूंकि इसी थ्योरी में ही, उपलब्ध सभी सुराग अपने खानों में सही फिट बैठ रहे हैं I

वकील कुछ देर यूँ ही स्तब्ध बैठा रहा; फिर एकाएक उठा और भावातिरेक में थार्नडाइक का हाथ थामकर चूमने लगा “ मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि आपसे क्या कहूं –“ उसकी आवाज़ रूंध गयी और गला भर आया – “ बस इतना ही कहूँगा की आपने मेरे बेगुनाह भाई को क़त्ल की सजा पाने से बचाया, भगवान् उसका बेहतरीन सिला देगा आपको”

फेल्टन भी मुस्कुराते हुए उठ खड़ा हुआ – “ अब तो मुझे लग रहा है कि आपका ये ‘ओक्स –ग़ाल’ वाला चक्कर महज़ एक कोरा ब्लफ था, है न ?”

थार्नडाइक ने अपने होंटो पर एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ उसकी ओर देखा….फेल्टन ने भी खीसें निपोर दीं I

अगले दिन जब हम वापस लौट रहे थे तो हम चार थे – मेरी, थार्नडाइक और स्टॉपफ़ोर्ड की तिकड़ी में नया जुड़ा सदस्य हेरोल्ड स्टॉपफ़ोर्ड था I ‘कॉरोनर’ की ज्यूरी नें इस घटना को ‘दुर्घटनावश हुई मृत्यु’ का केस करार देते हुए तत्काल उसकी रिहाई के आदेश दिए थे और अब वह हमारे साथ बैठा पूरी एकाग्रता से थार्नडाइक का इस केस के बारे में विश्लेषण सुन रहा था I

“ तो आपने देखा,” – थार्नडाइक कह रहा था – “ हैलबरी पहुँचने से पहले ही ‘मृत्यु के कारण’ के सम्बन्ध में मेरे दिमाग में ६ संभावित थ्योरीज थीं बस यहाँ पहुंचकर मुझे इतना ही करना था कि तथ्य और सुराग के आधार पर अपनी ६ थ्योरीज में से कोई एक थ्योरी को चुनना था जिस पर उपलब्ध तथ्य और सुराग खरे उतरते I और फिर जब मैंने ‘साइडिंग’ पर खड़ी ‘मवेशियों वाली मालगाड़ी’ देखी जिसमे मि० फेल्टन के मवेशी थे, कोच के पास से वह ‘सितारा’ उठाया, हैट और उस पर हुए सजावट के काम को देखा, मकतूला के जिस्म पर हुए जख्मों को देखा और सबसे आखिर में जब उस बछड़े के अजीब से व्यवहार को देखा, तो सब कुछ दो जमा दो नतीजा चार निकालने जैसा काम था I

“ और क्या मेरी बेगुनाही की दुहाई पर कभी शक नहीं हुआ ?” – हेरोल्ड ने पूछा

थार्नडाइक ने अपने पूर्व क्लाइंट की ओर मुस्कुराकर देखा

“ तुम्हारे बनाये उस ‘स्केच’ और तुम्हारे पेंटिंग के साजो सामान को देखने के बाद से उस छाते में लगे लम्बे से नोंकदार कीले के बारे में कुछ भी कहने और सोचने को नहीं बचा था – थार्नडाइक ने जवाब दिया –“ और बतौर आलाए क़त्ल उसका तसव्वुर तो मैंने शुरू से ही नहीं किया था I”

मैंने खिड़की से बाहर देखा …मजदूरों का एक झुण्ड पटरियों के किनारे बिखरे पुवाल के ढेरों में आग लगा चुका था और बाहर अब धुवां फैलने लगा था I

© Saba Khan

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Author: Saba Khan

I am a covetous reader and an ardent lover of crime and mystery genre. By day I'm an Astt. Professor, but by night I'm a reader, writer and books reviewer regarding genre.

2 thoughts on “अनुवाद – ‘ द ब्लू सेक्विन’ लेखक – आर ० आस्टिन फ्रीमैन”

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