‘The House of Three Candles’ – By Erle Stanley Gardner, Hindi Translation – By Saba Khan

मूल कथा – एर्ल स्टैनले गार्डनर
हिंदी अनुवाद – सबा खान
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वह ‘लव आफ लॉयल्टी’ नाम की एक चौड़ी सी सड़क थी जिसे उस केंटन शहर को आधुनिक बनाने के चलते शहर के भीड़ भाड़ वाले इलाके से गुज़ार दिया गया था I उस चौड़ी सी सड़क के अगल बगल की गलियाँ बस कभी कभार ही उस सड़क पर ऑटोमोबाइल्स और रिक्शों का रेला सा उड़ेलती थीं, लेकिन हकीक़त तो ये थी कि इन गलियों के पिछली तरफ घुसने पर टिनकैन में ठसाठस भरी सारडाइन मछलियों की तरह इंसानों के झुण्ड के झुण्ड भरे पड़े थे I

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मूल कथा – एर्ल स्टैनले गार्डनर
हिंदी अनुवाद – सबा खान
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वह ‘लव आफ लॉयल्टी’ नाम की एक चौड़ी सी सड़क थी जिसे उस केंटन शहर को आधुनिक बनाने के चलते शहर के भीड़ भाड़ वाले इलाके से गुज़ार दिया गया था I उस चौड़ी सी सड़क के अगल बगल की गलियाँ बस कभी कभार ही उस सड़क पर ऑटोमोबाइल्स और रिक्शों का रेला सा उड़ेलती थीं, लेकिन हकीक़त तो ये थी कि इन गलियों के पिछली तरफ घुसने पर टिनकैन में ठसाठस भरी सारडाइन मछलियों की तरह इंसानों के झुण्ड के झुण्ड भरे पड़े थे I
इसी तरह ‘स्ट्रीट आफ द वाइल्ड चिकन’ नाम की वह सड़क थी जिसकी चौड़ाई केवल इतनी थी कि उस पर से केवल एक रिक्शा ही गुजर सकता था I ये दोनों ही सड़कें आगे चलकर जिस जगह पर एक दुसरे को काटती थीं उसके १०० फीट के दायरे के भीतर ही ‘तिएन मह होंग’ नाम की एक गली जैसी कदरन संकरी सी सड़क थी जिसके नाम का अगर तर्जुमा किया जाए तो माएने है – ‘अभ्र अश्व वीथिका’ या ‘आसमानी घोड़े की गली’ I यह गली इतनी संकरी थी की इस पर से होकर न केवल रिक्शे का गुजरना असंभव था, बल्कि चौड़े किनारे वाले हैट पहने दो मुसाफिरों को भी एक साथ गुजरने पर अपने सरों को झुकाना पड़ जाता था ताकि हैट की किनारे एक दूसरे से रगड़ न खा जाएँ I
इस गली में स्थित तकरीबन सभी मकानों की बालकनियाँ और खिड़कियाँ सीधे इस ‘अभ्र अश्व वीथिका’ नाम की गलीनुमा सड़क की ओर ही खुलती थीं, जिसके कारण उन मकानों के निवासियों की जिंदगियां पूरे अन्तरंग ब्योरों के साथ उघडी पड़ी रहती थीं जो कि कदरन कम भीड़ भाड़ भरे वाले इलाके में या किसी सुसंस्कृत पाश्चात्य समाज में एकदम कल्पनातीत हैं I रात में उस गली से होकर बिसाती और फेरीवाले भेड़ियों के चिल्लाने जैसी ऊंची आवाजों में चिल्लाते हुवे या कभी कभार डुगडुगी बजाते हुवे गुजरा करते थे I
लियुंग फः उस गली से अपनी ‘कुली क्लास’ की शालीनता और स्वाभाविकता के अनुसार निगाहों को झुकाए गुजरी I हमेशा की तरह उसका चेहरा उस वक़्त भी मुकम्मल तौर पर भावहीन था जिसे देखकर कोई भी मानव स्वभाव का कुशलतम विद्वान् यह बता पाने में पूर्णतया असमर्थ होता की उस वक़्त उसके दिमाग के हर कोने खुदरे में किन विचारों का आवागमन हो रहा है I अभी एक महीने से भी कम समय पहले की बात थी जब उसने एक बच्चे को जन्म दिया था और उस फटे चीथड़े से गूद्ड़े में लिपटे, बगैर बाप के बच्चे को अपनी छाती से चिपटाए घूमा करती थी जो न केवल उसके संपूर्ण जीवन की ख़ुशी, स्नेह का प्रतिनिधित्व करता था बल्कि उसके मातृत्व भाव और ममता का केंद्र भी था I
लेकिन फिर वह एक काली रात आई जब चारों ओर चीखती चिल्लाती साईरन की आवाजें गूँज रहीं थीं, डरे सहमे, भयाक्रांत चीखते चिल्लाते नगरवासी हड़बड़ाये, बौखलाए से अपनी जान बचाने को इधर उधर भागते फिर रहे थे I वातावरण में एयरप्लेन इंजन की वो मनहूस आवाजें अपने पीछे तबाही और बर्बादी का एक मंज़र छोड़कर अब असंख्य मशीनी मधुमक्खियों की भिनभिनाहट में बदल गयीं थीं I
हालांकि इन हालातों में किसी सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर जाने का विकल्प चुनना आसान है, लेकिन कैंटन की वो गलियां इतनी संकरी थीं की जान बचाने को दौडती इस भीड़ का एक साथ उन गलियों से होकर किसी सुरक्षित स्थान की तलाश में निकल जाना नामुमकिन ही था और सबसे बड़ी और दुखदायी बात ये थी की कोई भागकर जाता भी तो कहाँ ? क्योंकि दरअसल वहां कोई सुरक्षित स्थान था भी नहीं और उस पर चीन के अतिआक्रामक रवैय्ये नें भी हवाई हमले के विरुद्ध किसी भी प्रकार के सुरक्षा उपायों को अपनाने की दिशा में मुश्किलातें खड़ा करने में कोई कसर भी न छोड़ी थी I मृत्यु अपने कई क्रूरतम रूपों से कोहनियों के बल उठंगी हो सबका उपहास उड़ा रही थी I जब सुरक्षा उपायों को लेकर इस कदर लोगों के हाथ पांव कटे हुवे हों तो भला कोई कैसे मृत्यु के किसी प्रतिष्ठित रूप को गले से लगाने की सोच भी सकता था ?
आसमान से गिरते ओलों की ही तरह शहर पर बम पर बम बरसते जा रहे थे I छिटपुट प्रतिरोध के तौर पर कहीं कहीं एंटी एयरक्राफ्ट गन्स गरज के साथ अपनी मौजूदगी जरूर दर्ज करा रही थीं और कभी कभार किसी कोने खुदरे से आती मशीन गन्स की तड़तड़ाहट भी फिजाओं में गूँज उठती थी I लेकिन एक ऐसा शहर जिसे ऐसे किसी भी हमले के बारे में दूर दूर तक कोई अंदेशा न हो, उसके द्वारा इस अकस्मात हुवे हमले के विरोध में उठाये गए कमज़ोर से प्रतिरोध को पूरी तरह रौंदते हुवे दुश्मन के जहाज़ पूरी बेरहमी से मौत का नंगा नाच किये जा रहे थे I
आसमान से लगातार बरसती इस मौत के नंगे नाच से बचकर भागती लियुंग ने एक मां की तीव्र मातृत्व वृत्ति के चलते उस नवजात मासूम को अपने दुर्बल शरीर की ढाल बनाते हुवे छाती से भींच रखा था, मानो अपने जिस्म के मांस और हड्डियों की इन परतों से इस तरह उस नर्म, नाजुक से वजूद को ढांप लेना मात्र ही इस “सभ्य” युद्ध विभीषिका के विरुद्ध सुरक्षा हेतु पर्याप्त उपाय हो I जमीन एक के बाद एक उठने वाले धमाकों के चलते डोल उठी थी, चारों ओर भयंकर अफरा तफरी का माहौल था I लोग इधर से उधर चीखते चिल्लाते अपने बच्चों, अपने परिजनों को लिए भाग रहे थे और तभी अचानक लियुंग के चारों ओर एक धमाके के साथ, उधडी लकड़ियों की किरचें और खपचियों के साथ साथ धूल तथा ईंट रोड़े के मलबे का बड़ा गुबार सा बिखर गया और उसे एक तीव्र झटका सा लगा I गुबार की वजह से उसे कुछ पलों के लिए कुछ भी सुझाई न पडा की क्या घटित हो गया था, मगर जब उसने अपनी आँखों को साफ़ करके छाती में सिमटे उस नन्हे, नाजुक से मासूम बच्चे को देखा, तो एक पल के लिए वह सवेंदनाशून्य सी हो गयी फिर एक गहरे दुःख और तीव्र वेदना से भर कर चीख उठी I
लियुंग के इस नवजात शिशु जो कि एक बेटी थी, के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी I पति न होने के कारण ही उसने उस बिन बाप की बच्ची को एक रहस्य की तरह ही सबकी निगाहों से पोशीदा रखा था; और शहर के सबसे निम्न और गरीब इलाके में वहाँ अस्थायी तौर पर असंख्य की तादाद में बसे खुद में डूबे लोगों के बीच रहा करती थी I एक वजह ये भी थी जो उसने पूरी कामयाबी से इस रहस्य पर पर्दा डाला हुआ था क्यूंकि इस इलाके के लोग साथ साथ रहने के वाबजूद खुद की परेशानियों में इस कदर डूबे हुवे रहते थे की किसी को किसी की कोई खबर ही न रहती थी I
इन्ही सब कारणों के चलते उसके बच्चे को लेकर उसके साथ हुई घटना, उसकी पीड़ा, उसकी तकलीफ, और उसके इस नुक्सान के बारे में किसी को भी कोई अंदाजा न हुआ I और तबसे वह रात दर रात अपने चेहरे पर एक भावहीन मुखौटा सा लगाये शहर की भीषण उमस, गर्मी और बदबू में लिथड़ी बेज़ार, बेहिस और बेजान हुई सी अपने काम के लिए इधर उधर डोलती फिरती थी I
साम सेउह एक ऐसा शख्स था जिसके दाहिने हाथ में केवल तीन अंगुलियाँ थीं, और आँखों में धूर्तता की सियाही रक्स किया करती थी जो किसी सांप की लिजलिजी जीभ की तरह अपनी कटोरियों में अबाध रूप से घूमती रहती थीं I अक्सर लियुंग जब अपने काम काज के सिलसिले में इधर उधर आया जाया करती थी तो हमेशा वह साम की धूर्त निगाहों के केंद्र में होती थी I मगर कभी लियुंग ने इस ओर ध्यान दिया था या नहीं, यह कभी उसने जाहिर ही न होने दिया था I हाल फिलहाल लियुंग में आई तब्दीली के चलते वो निहायत ही फिक्रमंद हो उठा था और तरह तरह के सवाल उसके दिमाग को मथते रहते थे – ‘आजकल वो कुछ सुस्त, उदास और अनमनी सी नज़र आती है, क्या वह बीमार है ? अब वो पहले की तरह हंसती भी नही है, न ही सुबह सबेरे तडके कहीं आते जाते में ठहरकर अन्य लड़कियों के साथ ऊंची आवाज़ में गपशप करती है, क्या उस पर रुपये पैसे को लेकर कोई माली दुश्वारी आन पड़ी है, या फिर उसकी रोजमर्रा की ज़रूरियातों और अखराज़ात के लिए उसकी कमाई काफी नहीं है ? ……तमाम तरह के इन सवालातों से जूझते साम की तीखी निगाहों ने अर्थपूर्ण ढंग से सामने से चली आ रही लियुंग का मुआइना किया I उसे लियुंग के चेहरे से कोई भी अंदाजा न हो सका I ‘मुमकिन है की वह बीमार है और उसे किसी तरह के इलाज़ की सख्त जरूरत हो’ – सोचते हुवे साम ने लियुंग को एक बार फिर गहरी निगाहों से देखा फिर उसकी ओर बढ़ गया I
चूंकि लियुंग फः ने उससे कभी किसी भी विषय पर कैसी भी कोई बातचीत न की थी, तो कुछ कहने सुनने का कोई सवाल ही नहीं था I अक्सर इधर उधर जाते हुवे लियुंग ने यूँ ही सरसरी तौर पर ही देखा था, तो उसने साम की बातों को भी चुपचाप अनदेखी के भाव से और सुनकर भी अनसुना कर देने सी लापरवाही जैसे रवैय्ये से तवज्जोह दी I दरअसल उसकी रूह भी कहीं भीतर गहरे में वेदना की अधिकता से इस कदर सुन्न सी पड़ गयी थी जिसके चलते वो अब रातों में उठ उठ कर किसी नींद में चलने वाले व्यक्ति की तरह ही बेहिसी और बेलौसी के आलम में एक रूह की मानिंद भटकने वाली शै बनकर रह गयी थी I उसे यूँ निश्चल और खामोश देखकर साम सेउह की हिम्मत थोड़ी बढ़ गयी और उसने बात आगे बढ़ाई – “क्या तुम्हे कुछ पैसों की जरूरत है ? ढेर सारा पैसा – सोने के रूप में ? चीन में चलने वाले ये कागज़ के रुपये नहीं, बल्कि सोना जो तुम्हे न केवल आत्मनिर्भर बना सकता है, बल्कि इस मशक्कत और मोहताजी भरी ज़िन्दगी से छुटकारा भी दिला सकता है I और फिर इसे पाना भी बहुत आसान है, फकत इक दियासलाई की तीली भर जलाना है ” – और साम सेउह ने अपनी कही बातों के मर्म को स्पष्ट करने की मंशा से अपनी कलाईयों को झटकते हुवे एक दियासलाई की तीली को जला दिया और होंठों पर एक रहस्यमयी मुस्कान ओढ़े दूसरी ओर बढ़ गया I और पीछे बैठी वह ठगी सी ये सोचती रह गयी थी की शायद ये मामला यहीं खत्म हो गया है I
उसी रात, जब वह शहर के एक संकरे रास्ते से होकर जा रही थी, तो उसका मस्तिष्क निरंतर चिंतित भाव से साम सेउह की बातों को मुसलसल संजीदगी से सोचे जा रहा था ………..
कैंटन एक अस्थिर और कभी न सोने वाला शोरगुल भरा शहर है I गर्मियों के महीनो में आधी रात के बाद, शुरुवाती कुछ घंटों में ऐसे भी क्षण आते हैं जब रोजमर्रा के जीवन की हलचल में एक हल्का ठहराव सा आ जाता है, मगर ये ठहराव पाश्चात्य सभ्यता के रंग में रचे बसे लोगों को नाममात्र के लिए ही महसूस होता है I चीन के बड़े शहरों में लोग शिफ्ट में सोते हैं क्यूंकि वहां इतने लोगों को एक साथ एक ही वक़्त में आराम करने एवं सोने हेतु घरों में पर्याप्त कमरे तक नहीं हैं I वे लोग जो ‘आफ शिफ्ट’ होते हैं, गलियों में इधर उधर घूमते रहते हैं और जैसा की कहा जाता है की ‘चीनी लोगों के कान’ शोर के प्रति अभेद्य होते हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह ‘चीनी नासापुट (नथुने)’ गंध के प्रति उदासीन से रहते हैं – तो बाहर गलियाँ भी शोरयुक्त होती हैं और बातचीत का गुलगपाड़ा भी बगैर किसी रोक टोक के जारी रहता है I
सुबह का झुटपुटा फ़ैल रहा था – एक धुंधला और आर्द्र झुटपुटा, जो उस शहर की अपनी दीवारों के भीतर पनपती , खुद की बजबजाती और ठहरी हुई सी उमस भरी जिंदगी से पनपे माहौल – मच्छर, उमसदार एवं तपती हुई गर्मी, चिपचिपाता पसीना, और वे कुछ विशेष गंध जो चीन के वातावरण में हर सू छितराई हुई सी हैं – को एक नयी उमस के साथ अतिरिक्त उष्णता प्रदान कर रहा था I
साम सेउह अकस्मात् उसके सामने आ खड़ा हुआ I
“तो फिर क्या सोचा तुमने ?” उसने लियुंग की ओर अपलक देखते हुवे सवाल किया – “क्या तुम्हे वह सोना चाहिए ?”
मन ही मन किसी फैसले पर पहुँचते हुवे लियुंग ने स्पष्ट आवाज़ में सिर्फ इतना कहा – “ हाँ मैं दियासलाई जलाने के लिए तैयार हूँ ”
“आज रात ही ७ से ९ बजे के दरमियान अभ्र अश्व वीथिका में स्थित उस मकान में आकर मिलो जो ‘तीन मोमबत्तियों’ वाले घर के नाम से मशहूर है I दरवाजा खोलकर सीधे सामने की सीढियां चढ़कर ऊपर आ जाना” – साम ने उसकी आँखों में झांकते हुवे आदेश सा दिया I
सकते की सी हालत में कुछ पशेमानी के साथ लियुंग अभ्र अश्व वीथिका की तरफ भारी क़दमों से मुड़ गयी I उसकी आँखें मुकम्मल तौर से भावहीन थीं जैसे किसी बेहिस से लकड़ी के पुतले में कील दी गयीं हों…………………………….
शाम जल्द अज जल्द गुजरने वाली थी और रात ने अपने सुरमई पंख पसारने शुरू कर दिए थे I लियुंग अभ्र अश्व वीथिका में दाखिल हो चुकी थी I बायीं तरफ के घर में एक लड़की मशीनी आवाज़ वाला ‘चीनी हार्प’ बजा रही थी I उस से १० कदम पीछे ही एक फेरीवाला ऊंचे सुर में आवाज़ लगाता फिर रहा था I जहाँ वह खड़ी थी उससे तकरीबन ५० फीट की दूरी पर सामने की ओर, एक परिवार बालकनी से जलते हुवे पटाखे फेंककर बुरी आत्माओं को तितर बितर करने की कोशिश में लगा हुआ था I
लियुंग ने कुछ पलों के लिए ठहरकर इधर उधर निगाहें फिराईं फिर थके क़दमों से आगे बढ़ी, उसने पास ही जल रहे उस अलाव का घेरा काटा जिसमे नकली कागज़ के रुपये, एक पालकी की मॉडलनुमा छोटी अनुकृति, तथा पुतले के रूप में गुलामों को जलाकर अग्नि के ज़रिये पूर्वजों की आत्माओं से मिलन हेतु भेजा जा रहा था I तीन मोमबत्तियां गर्म रात की उस भारी हवा में फुटपाथ की पटरी पर फडफडा रही थीं I लियुंग उस मकान तक पहुँची और दरवाजा खोलकर सामने नज़र आ रही सीढियां चढ़ गयी I आगे सिर्फ अँधेरा ही था, सिर्फ अँधेरा जिसके कालेपन में वहां मौजूद हर चीज़ ने अपना वजूद खो सा दिया था I उसने हाथों से टटोलकर एक और दरवाज़ा तलाश किया और उसमे प्रवेश कर गयी I कमरे में प्रवेश करते ही उसे फ़ौरन एहसास हुआ कि वहां कुछ दूसरे लोग भी मौजूद थे I वह उनकी साँसों की आवाजें सुन सकती थी, उनके जिस्मों की बेचैन जुम्बिशों को, उनके कपड़ों की सरसराहटो को और कभी कभार एक दबी सी खांसी की आवाज़ को महसूस कर सकती थी I कमरे में कहीं एक घडी ने टनटनाकर याद दिलाया कि ‘ऑवर आफ द डॉग’ ( चीनी राशिचक्र मान्यतानुसार शाम ७ बजे से ९ बजे का समय ) समाप्त होने वाला था और ‘ऑवर आफ द बोर’ (चीनी राशिचक्र मान्यतानुसार रात्रि ९ बजे से ११ बजे का समय ) शुरू ही होने वाला था I वह ठीक समय पर ठीक जगह आ पहुंची थी I साम ने उसे खासतौर से ताकीद की थी की ‘आवर आफ द डॉग’ के आखिरी क्षणों में उसे वहां होना था I वह आँखें फाड़ फाड़कर कमरे में देखने की कोशिश कर रही थे तभी साम सेउह की अँधेरे में गूंजती आवाज आई – “ आओ सभी लोग अपनी आँखें बंद करें और अंधे हो जाएँ I जो कोई भी अपनी आँखें खोलेगा उसे झूठा और उसकी नीयत को सवालिया अंदाज़ में देखा और समझा जाएगा I केवल एक ही व्यक्ति को उन लोगों पर नज़र रखने का कार्य सौंपा गया है जो यहाँ इस कमरे में इकट्ठे हैं I तांक झाँक करने शख्स को गर्म लोहे से दागा जायेगा, ताकि जो कुछ भी उन्होंने देखा है और नाफ़रमानी के तौर पर जो सजा उन्हें मिली है वो उनके दिमागों में पैवस्त होकर रह जाए” I
लियुंग, अपने घुटनों को भीतर की तरफ मोड़े अपनी आँखों को भरपूर कोशिशों से पूरी तरह बंद किये फर्श पर बैठी थी और उसे पूरी शिद्दत से एहसास हो रहा था कि लोग कमरे में चारों ओर फिर रहे हैं और एक फ़्लैशलाइट की तीखी रौशनी जो कि हर चेहरे पर चुभ सी रही थी, की सहायता से वहां मौजूद लोगों के चेहरों का मुआइना भी किया जा रहा है I उसे अपने गालों के पास तीखी गर्माहट सी महसूस हो रही थी जिससे उसने ये अंदाज़ा लगाया की हाथों में गर्म लोहा लिए वो व्यक्ति उसके नजदीक ही खड़ा था जो उन लोगो से उस गर्म लोहे को छुवा देने को तैयार बैठा था जो अतिउत्सुकता के चलते कोई भी हिमाकत करने की जुर्रत कर बैठते I
“ओह, यह तो बिलकुल मेरे ख्वाबों की ताबीर जैसी है,” – कमरे में अचानक एक फुफकारता सा गूंजा I
“नहीं, वह मेरी है” साम सेउह की आवाज़ ने उत्तर दिया, इसी के साथ उसकी बंद पलकों पर पड़ने वाला प्रकाश भी हट गया और गर्म लोहे की तपिश भी अब उससे दूर हो चुकी थी I
तभी अचानक उसने एक तीखी चीख के साथ, तपते हुवे लोहे की सनसनाहट, और किसी इंसान की दर्द में डूबी कराह के साथ साथ फर्श पर धप्प की आवाज़ के साथ कुछ गिरने का स्वर सुना I लेकिन उसने अपनी आँखें फिर भी नहीं खोली I चीन में, जीवन की कोई कीमत नहीं थी I
काफी देर बाद वहां उस ख़ामोशी की मौजूदगी का अंत हुआ जो किसी के चीखकर गिरने के तुरंत बाद वहां फ़ैल सी गयी थी, जब कमरे में साम की प्रभावशाली आवाज़ गूंजी – “अब आप अपनी आँखें खोल सकते हैं ”
लियुंग ने अपनी आँखें खोली I कमरा अब भी अन्धकार की अधिकता से काला ही था I उसने कई बार अपनी पलकें फड़फड़ाई और आँखों को मलते हुवे अन्धकार में दीदे फाड़कर देखने की नाकाम कोशिश की I
“पौ फटने से कुछ ही पलों पहले” – कमरे में साम की आवाज़ फिर गूंजने लगी – “आसमान में बहुत सारी मोटरों के गरजने की आवाज़ सुनाई पड़ेगी I आप में से प्रत्येक को एक लाल ‘फ्लेयर’ ( तेज रौशनी के साथ धमाका उत्पन्न करने वाली एक प्रकार की आसमानी फुलझड़ी ) और माचिस दी जाएगी I आप में से प्रत्येक को धीमे स्वर में उस स्थान का नाम बताया जायेगा जहाँ उस लाल फ्लेयर को रखना है I जब आप मोटर के गरजने की आवाज़ सुने तो आप लोग उस फ्लेयर के ऊपर इस तरह दुबक के बैठ जायेंगे मानो डर से घुटनों के बल जमीन पर बैठ गए हों I जब मोटर शहर के पूर्वी किनारे की तरफ पहुँच जाए, तब आप लोग हाथों में माचिस थाम लोगे I वहां आपकी इन हरकतों को देखने वाला कोई भी नहीं होगा I क्यूंकि वहां पर मौजूद आसपास के सभी लोग सिर्फ अपनी और अपने परिवार की हिफाज़त को लेकर ही फिक्रमंद और पशेमान होंगे I जब वे जहाज़ सर के ऊपर आ जाएँ, ठीक उसी वक़्त आप लोग फ्लेयर्स में आग लगा दोगे, और लगभग फ़ौरन ही वहां से निकलकर इस स्थान पर वापस लौटोगे I आप सबको ढेर सारा सोना मिल जायेगा I ताकीद रहे की यहाँ जल्द अज जल्द वापस लौटना निहायत ही जरूरी है I बमबारी दिन निकलने से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी I अतः आप सबको बमबारी समाप्त होने से पूर्व ही यहाँ हाज़िर होना है I आपको आपका सोना इंतेज़ार करता मिलेगा I किसी भी तरह की हड़बड़ी और दिमागी तवाज़न के सही तौर पर काम न करने की स्थिति में आप सभी नदी की ओर भागेंगे I वहां एक नाव इंतज़ार कर रही होगी और फिर उन हालातों में ये निहायत ही पुख्ता और जरूरी एहतियाती कदम होगा कि आप कुछ समय के लिए छुप जाएँ, क्यूंकि बहुत बड़े पैमाने पर सरगर्मी से खोजबीन की जायेगी I बाहर जासूस हैं जो हम पर नज़र रखते हैं, और आप में से कोई भी अपने पास से इतना सारा सोना बरामद होने की सूरत में सही मायनों में कोई भी जायज़ वजह न सुझा सकेगा I इसलिए ऐसी सूरतेहाल में यही सही होगा कि आप तब तक छुपे रहें जब तक कि आपको हमारी तरफ से कोई पक्की खबर न मिले या कोई दूसरा काम न सौंपा जाए” – इतनी देर तक बोलते रहने के बाद साम की आवाज़ कुछ देर के लिए ठहर सी गयी और कमरे के भीतर एक बार फिर ख़ामोशी का दौर आ गया, जो केवल लोगों के इधर उधर हिलने डुलने से पैदा हुई आवाजों एवं दबे स्वर में दिए जा रहे आदेशों से भंग हो रहा था I लियुंग ने अपने हाथों में एक गोल लकड़ी जैसी वस्तु का सरकाया जाना महसूस किया I कुछ ही क्षणों बाद, माचिस का एक बॉक्स भी उसकी अँगुलियों के दरमियान फंसा दिया गया I एक आदमी उसकी तरफ झुका, इतना करीब की उसकी आवाज़ महज़ साँसों की सरसराहट के ज़रिये उसके कानों में कुछ कह रही थी – “ सार्वजनिक सुरक्षा आयुक्त का घर” I
लोगों की चहलकदमी अब पूरी तरह थम गयी थी और उस कमरे में एक बार फिर साम की आवाज़ गूंजने लगी थी – “जाइए और जाकर अपने निर्धारित स्थान पर प्रतीक्षा कीजिये और सौंपे गए काम को कामयाबी से अंजाम देकर जल्द यहाँ आइये और बदले में ढेर सारा सोना ले जाइए I अतिरिक्त सुरक्षा के चलते आप लोग यहाँ से पांच पांच मिनट के अंतराल पर एक एक करके निकलेंगे I निकास द्वार पर एक व्यक्ति आप सबकी निकासी सुनिश्चित करेगा I कमरे में किसी भी तरह का कोई उजाला न होगा और न ही आप लोगों के दरमियान एक दुसरे से कोई बातचीत होगी” I
लियुंग उस घुप्प अँधेरे में उन अजनबियों के बीच एक ओर खड़ी, माहौल में अब तक पूरी तरह रच बस गयी पसीने की तीखी बदबू से परेशान बार बार पहलू बदल रही थी I कमरे में रह रहकर उसे फुसफुसाहट भरे स्वर में आदेश सुनाई पड़ते थे और हर फुसफुसाहट के फ़ौरन बाद सामने का दरवाज़ा खुलता था और उस संकरी सीढ़ियों से होकर कोई एक व्यक्ति इस दमघोंटू माहौल से निकलकर नीचे गली की कदरन खुली हवा और ताजगी भरे माहौल में निकल जाता था I
काफी देर बाद उसकी बारी आई I नीचे गली में आकर वह कुछ देर तक लम्बी लम्बी साँसे लेती रही फिर अपने चेहरे पर हमेशा मौजूद रहने वाली भावहीनता के साथ आगे बढ़ी, लेकिन उसने उस गली को पार करने की कोई कोशिश नही की और केवल उस स्थान तक गयी जहाँ मृत आत्माओं हेतु भेंट चढ़ाई जा रही थी I अलाव की राख अब भी उस संकरी गली में सुलग रही थी जो आवारा हवाओं के झोंकों से इधर उधर चिंगारियों की शक्ल में उड़ती फिर रही थीं I सामने के मकान में कुछ हलचल सी थी, लियुंग जानती थी कि इस घर में शोकाकुल लोग होंगे जिन्होंने इस यक़ीन के साथ आज सारी रस्में की थीं की उनके ऐसा करने से ही उनके पूर्वजों की आत्माओं को उस लोक में शान्ति मिली होगी I वो उस मकान के सामने कुछ देर ठिठकी खड़ी रही फिर कुछ सोचकर सीढियां चढ़कर ऊपर पहुँची जहाँ उसे मन्त्रों की आवाज़ सुनाई पड़ी I एक मेज़ के चारों तरफ सात ‘नन’ इकट्ठे बैठी थीं जिन्होंने सर घुटाये हुवे थे I दूसरी मेज़ पर, एक तेल से जलने वाला लैंप फडफडा रहा था जिसके प्रकाश में शायद उनके किसी पूर्वज की पेंटिंग जगमगा रही थी, जो अब अपने पूर्वजों की कतार में शामिल हो गया था I मेज़ पूरी तरह भेंट में चढ़ाई जाने वाली वस्तुवों से भरी हुई थी I कमरे में उन ननों के अलावा तकरीबन २० अन्य लोग भी थे जो रुक रुक कर प्रार्थना में अपने सुर लगा रहे थे I लियुंग बगैर कोई आवाज़ किये दबे पाँव प्रार्थना में शामिल हो गयी I जब उसे इस बात का यक़ीन हो गया की वहां मौजूद लोगों में से किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया था तो वो चुपचाप उन सीढ़ियों की तरफ बढ़ गयी जो सीधे छत की ओर जाती थीं I छत खुली खुली सी थी, और आधे घंटे की मशक्कत के बाद वह तीन मोमबत्तियों वाले उसी मकान की छत पर वापस पहुँच चुकी थी जहाँ अभी कुछ ही देर पहले वो अँधेरे में अन्य कई लोगों के साथ मौजूद थी I उसने छत पर एक छुपने जैसी जगह तलाश की जो एक अँधेरा कोना था और वहां छुप कर बैठ गयी I उसके दिमाग में कई विचार एक साथ उथल पुथल कर रहे थे जिसकी शिद्दत उसके चेहरे पर लगातार आ जा रहे भाव से ही ज्ञात हो रही थी I लेकिन उसने फ़ौरन ही उन पर काबू पा लिया था और अब उस छत के अँधेरे कोने में वही लियुंग बैठी थी जिसका चेहरा हमेशा पत्थर की तरह बेहिस और आँखें भावहीन सी रहा करती थीं I रात लगभग बीत चुकी थी और झुटपुटा अपने पैर पसारने लगा था I लियुंग ने पूर्व दिशा की ओर कान लगाकर कुछ सुनने का प्रयत्न किया I कुछ पलों तक उसे रात की ख़ामोशी और हवा की सायं सायं के सिवा कुछ भी न सुनाई पड़ा, फिर अचानक एक विचित्र सी ध्वनि भी उस सायं सायं में शामिल हो गयी जो बिलकुल ऐसी थी मानो कहीं सुदूर पहाड़ों पर बिजली की कड़कड़ाहट हुई हो, एक ऐसी कड़कड़ाहट जो किसी अपशकुन के आगमन के संकेत की तरह थी I और देखते ही देखते पूर्व दिशा से उठने वाली कड़कड़ाहट अब लगातार एक तरह की गरज में बदल गयी थी जो पल पल तीखी और तीव्र होती जा रही थी I उसे नीचे गली में लोगों के चीखने चिल्लाने की आवाजें सुनाई पड़ने लगीं, उन छोटे बच्चों, दुधमुवों का चिढ़चिढ़ाहट भरा क्रन्दन सुनाई पड़ने लगा जो उनके अभिभावकों द्वारा घबराहट और भय के कारण सोते से उठा दिए गए थे I लियुंग अब भी छत पर अविचल सी बैठी थी I जहाज़ अब सरों के ऊपर आ गए थे और शहर में जहाँ तहां चमकीले लाल फ्लेयर्स रक्तिम आभा लिए सुर्ख लहू के तालाब में खिल से उठे थे I और जहाँ जहाँ यह फ्लेयर चमक उठते थे वहीँ पर एक शत्रु जहाज़ किसी परकटे पंक्षी की तरह हवा में गोते लगाता नीचे की ओर तेजी से बढ़ता था और कुछ ही क्षणों बाद रात्रिकालीन आकाश में किसी विशालकाय मशरूम की शक्ल में लपटों का एक गुबार सा उग आता था जो बाद में एक ऐसी प्रतिध्वनी उत्पन्न करता था जिससे शहर की बुनियादें तक हिल जाती थीं I लियुंग छत के किनारे की तरफ रेंग गयी जहाँ से वो नीचे गली में झाँक सकती थी I नीचे अफरा तफरी का माहौल था और तभी उसने एक रहस्यमयी आकृति को गुप्त रूप से तीन मोमबत्तियों वाले मकान के द्वार से होकर जाते देखा I उसके कुछ ही देर बाद एक भारी भरकम जिस्म वाली एक आकृति, लगभग दौड़ते हुवे गली को पार करके तीन मोमबत्तियों वाले मकान के द्वार पर आकर लुप्त हो गयी I उसने सर उठाकर आसमान की ओर निहारा, जहाज़ अब बिलकुल सरों के ऊपर आ गये थे I लियुंग ने अपने लाल फ्लेयर वाले बॉक्स को छत पर रखा और कागज़ को फाड़ दिया I उसने पूरी शान्ति और पूरी कुशलता के साथ माचिस जलाई और फ्लेयर को आग दिखा दी I रक्तिम आभा युक्त लाल रौशनी के तालाब में आसपास के सभी घरों की छत रोशन हो उठी और लगभग उसी के साथ लियुंग भी एक छत से दूसरी छत पर होते हुवे भाग खड़ी हुई I अभी उसे दौड़ते हुवे कुछ ही सेकंड हुवे थे, तभी एक विशालकाय जहाज़ सर के ऊपर प्रकट हुआ और आसमान से दहाड़ते हुवे नीचे की ओर आ गिरा I पूरी गली इस विस्मयकारी विस्फोट के प्रभाव से थरथरा उठी I लियुंग भी झटके से अपने घुटनों के बल आ पडी, उसे अपने कानो के परदे फटते प्रतीत हुवे, उसकी आँखें इस भयंकर विस्फोट के फलस्वरूप उत्पन्न हुवे दबाव की अधिकता के चलते अपनी कटोरियों से फट पड़ने को प्रतीत हुईं I और फिर सब कुछ खामोश सा हो गया, चीखो पुकार की आवाजें, जहाजों की गड़गड़ाहट, सभी कुछ धीरे धीरे अपनी आवाजें खोने लगीं और फिर उसे कुछ भी न सुनाई पड़ा I
जब उसे होश आया तो उसे अपने शरीर में दर्द की तीखी लहरें सी उठती महसूस हुईं, उसने उठने की कोशिश की मगर फ़ौरन ही उसे दर्द से लेट जाना पड़ा I उसकी एक टांग जख्मी हो गयी थी I दिन निकल आया था और माहौल में अब कोई गड़गड़ाहट न थी I उसने अपने जिस्म की बची खुची ताकत को इकठ्ठा किया और उठकर लंगडाते हुवे गली से बाहर आई और दर्द से कांखती, कराहती उस स्थान की ओर बढ़ी जहाँ तीन मोमबत्तियों वाला मकान स्थित था I पूरी गली खत्म हो चुकी थी और उसके स्थान अब एक बहुत बड़ा खड्डा था जो की मलबे और जलकर काले पड़ चुके इंसानी शरीरों से पटा पड़ा था I एक ऐसा ही काला धड़ लगभग उसके क़दमों के पास ही पड़ा था I उसने उसकी तरफ देखा तो फ़ौरन ही उसे एहसास हो गया की साम सेउह का बस यही एक हिस्सा बचा था I वह अभ्र अश्व वीथिका के परली तरफ लंगडाते हुवे मुडी, उसकी नज़रें झुकी हुईं थीं और चेहरा भावहीन था मानो किसी कलाकार ने लकड़ी के बुत के चेहरे को पूरी नफासत और कामयाबी से तराशा हो, मगर चेहरे पर जरूरी भाव तराश पाने में नाकामयाब रहा हो I
सूरज पूर्व दिशा में अब पूरी तरह से उग आया था और पूरा कैंटन दिन के उजाले में रोशन हो उठा था और इसी के साथ कैंटन के निवासी जो कि लम्बे समय से अपने बनाने वाले के द्वारा अपने हिस्से में दी गयी सिर्फ और सिर्फ मृत्यु की बेरहम मौजूदगी के चलते अभ्यस्त हो चुके थे, वो मृत शरीरों और मलबे की साफ़ सफाई हेतु तैयार थे ताकि उनकी दिनचर्या का कभी न टूटने वाला अनवरत सिलसिला फिर से शुरू हो सके I जिंदगी की वो रोजमर्रा की उधेड़बुन फिर से साँसे ले सके I कुछ लम्हों या फिर कुछ दिनों या फिर कुछ महीनो के लिए ही सही, ये जिंदगी कुछ देर मुस्कुरा तो सके I
लियुंग ने भी अपने दर्द से दुखते कन्धों पर बांस का जुवा उठा लिया I एक तीखी दर्द की लहर उसके कन्धों से लेकर कूल्हे तक दौड़ गयी, लेकिन उसने अपने दांत भींचे रखे I मुख़्तसर ही सही, अभी बहुत जिन्दगी बाकी थी, और जब जिन्दगी बाकी थी तो बहुत से अधूरे काम भी बाकी थे और उन अधूरे कामों को उसे ही सरअंजाम देना था I भूख थी जिसके लिए काम भी करना था I उसने एक बार फिर सर उठाकर आसमान की ओर निहारा, सूरज चढ़ आया था I आसमान पर पंक्षियों का दिखना शुरू हो गया था जो कतार बांधे एक दिशा में उड़े जा रहे थे I लियुंग ने कंधे पर रखे बांस को मजबूती से थामा फिर लंगडाते हुवे क़दमों मगर मजबूत हौसलों के साथ आगे बढ़ गयी I उसका चेहरा एक बार फिर भावहीन था I
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Author: Saba Khan

I am a covetous reader and an ardent lover of crime and mystery genre. By day I'm an Astt. Professor, but by night I'm a reader, writer and books reviewer regarding genre.

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