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उसका दावा था की उसके गुनाहों की फेहरिस्त काफी लम्बी थी, जो तलाफी के लायक तक ना थीं, उसका अकीदा था की वो महज़ इस लिए ही अब तक जीता रह सका है की इस दो जहान के मालिक ने जब भी उसके गुनाहों की तरफ नजर डाली तो सबसे पहले अपनी रहमत का जायजा लिया I उसने खता खायी थी, उसके यक़ीन की बुनियाद की ईंटें दरक चुकी थीं, फिर भी उसकी दुनिया में उसके लिए उसके जीने की वजुहातों के पीछे भी उसके बनाने वाले की साज़िश थी I वो जीता था, वो जीत सिंह था, वो बद्री था, वो वो सबकुछ था जो एक इन्सान के बच्चे को होना चाहिए था I लेकिन उसे हर उस चीज़ के लिए जद्दोजहद और मशक्कत के रास्ते पर चलना होता था जिसे पाने का  उसे पूरा हक था I

हिंदी जासूसी, रहस्य और अपराध कथाओं के एकलौते और पाए के अफ़सानानिगार सुरेन्द्र मोहन पाठक के ‘जीत सिंह सीरीज’ का अगला शाहकार ‘मुझसे बुरा कोई नहीं‘  नजदीकी बुकस्टोर पर हासिल करें I

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Author: Saba Khan

I am a covetous reader and an ardent lover of crime and mystery genre. By day I'm an Astt. Professor, but by night I'm a reader, writer and books reviewer regarding genre.

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